मंदी के कारण सीमेंट उद्योग की दिग्गज कंपनियों ने फिलहाल विलय और अधिग्रहण की योजनाएं टाल दी हैं।
बाजार के आर्थिक हालात फि लहाल कंपनियों के मुताबिक नहीं हैं। विलय और अधिग्रहण के लिए किए जा रहे मूल्यांकन में खरीदी जाने वाली कंपनियों की कीमत काफी कम लगाई जा रही है।
इसके अलावा बाजार में सीमेंट की मांग कम होने के बाद भी सभी कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रही हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि कम से कम आने वाली दो-तीन तिमाहियों तक तो अधिग्रहण और विलय की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। देश में साल भर में कुल 20.5 करोड़ टन सीमेंट का उत्पादन किया जाता है।
जून में फ्रांस की दिग्गज सीमेंट कंपनी विकात ने सागर सीमेंट्स में हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके बाद से उद्योग में कोई विलय या अधिग्रहण नहीं हुआ है।
हालांकि, इससे पहले देश में होलसिम, लाफार्ज, सिम्पोर और हेडलबर्ग समेत 6 दिग्गज विदेशी कंपनियों में भारत में कदम रखा है।
उद्योग विश्लेषकों के अनुसार बाजार के इन खराब हालात में कोई भी कंपनी 70 डॉलर प्रतिटन की कम कीमत पर बिकना नहीं चाहेंगी।
दरअसल इससे पहले 200 डॉलर प्रतिटन की कीमत के हिसाब से करार हुए हैं। इसीलिए सीमेंट कंपनियां विलय और अधिग्रहण के लिए बाजार के हालात सामान्य होने का इंतजार कर रही हैं।
विश्लेषकों ने बताया, ‘अगली 4-6 तिमाहियों तक मंदी के हालात में सुधार होने की संभावना नजर नहीं आ रही है। ऐसे में किसी भी खरीदार के लिए ज्यादा दर पर ऋण लेकर अधिग्रहण करने में कोई भी समझदारी नहीं है।’
बिनानी सीमेंट के प्रबंध निदेशक विनोद जुनेजा ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि अगली दो तिमाही तक कोई भी विदेशी सीमेंट कंपनी भारत में आएगी।
हालांकि घरेलू सीमेंट कंपनियां अपनी उत्पापदन क्षमता का विस्तार कर रही हैं। इस समय अपने परिचालन को बेहतर करना ही कंपनियों की प्राथमिकता है।’
विश्लषकों का मानना है कि मेक्सिको की सेमेक्स के लिए इस समय भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का सुनहरा अवसर है। खरीदार कंपनियां 70 डॉलर प्रतिटन के मूल्यांकन को मोलभाव कर 130-140 डॉलर प्रतिटन तक ला सकती हैं।
ऐसे में वह होलसिम और आयरलैंड की सीआरएच की तरह अधिग्रहण के लिए मोटी रकम खर्च करने से बच जाएंगी। होलसिम ने अंबुजा और सीआरएच ने माई होम इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण किया था।
उन्होंने कहा, ‘लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इस समय अपनी कंपनी कौन बेचेगा।’ माई होम इंडस्ट्रीज में 50 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए सीआरएच ने 235 डॉलर प्रतिटन के हिसाब से रकम खर्च की थी। जो घरेलू सीमेंट उद्योग की अभी तक का सबसे महंगा सौदा है।
हालांकि इस सौदे के एक महीने बाद ही बाजार की हालत खराब होने पर विकात ने सागर सीमेंट्स में 100 डॉलर प्रतिटन के हिसाब से हिस्सेदारी खरीदी थी।
डालमिया सीमेंट्स के मुख्य कार्याधिकारी टी वेंकटेशन ने बताया, ‘आने वाली 2-3 तिमाहियों में कोई भी अधिग्रहण और विलय होने की संभावना नहीं है।’
विश्लेषकों का कहना है कि इस समय घरेलू सीमेंट कंपनियां अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रही हैं। इस समय कोई भी कंपनी अधिग्रहण और विलय के जरिए विस्तार करने के बारे में नहीं सोचेगी।
फिलहाल एसीसी, अंबुजा, ग्रासिम, अल्ट्राटेक और इंडिया सीमेंट जैसी दिग्गज कंपनियां ही देश में हो रहे कुल सीमेंट उत्पादन का 50 फीसदी उत्पादन कर रही हैं।