प्रवर्तकों पर भी उठी उंगली

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 1:31 AM IST

सत्यम मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या सत्यम से धन बाहर ले जाने में इसके प्रवर्तक भी शामिल थे।
इस मामले की जांच से जुड़े सीबीआई के एक अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इस मामले में हमें यदि कोई प्रमाण मिला तो हम पूरक आरोप-पत्र दाखिल करेंगे।’
इसके अलावा, सीबीआई जांच कर रही है कि क्या सत्यम संस्थापक बी. रामलिंग राजू और उनके नजदीकी सहयोगियों ने खर्च को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया। अधिकारी ने बताया, ‘उन्होंने नकली खाते दिखाकर कंपनी के राजस्व को बढ़ा हुआ दिखाया है। इसके साथ ही इस बात की भी जांच की जाएगी कि कहीं उन्होंने खर्चों के मामले में भी तो ऐसा नहीं किया है।’
सत्यम घोटाले से जुड़े कई पहलुओं की जांच क र रही सीबीआई की टीम ने 7 अप्रैल को फाइल की गई चार्जशीट में जालसाजी, धोखाधड़ी, जाली कागजात और सबूतों को नष्ट करने का आरोप लगाया है। हालांकि फंडों में धोखाधड़ी का कोई आरोप नहीं लगाया गया है। 
सीबीआई की जांच में पता चला है कि रामलिंग राजू, उनके भाई बी रामा राजू और सत्यम के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी श्रीनिवास वाडलामणि इन्वेस्टर लिंक पर कर्मचारियों और कंपनी को मिल रहे प्रोजेक्टों की गलत जानकारी दे रहे थे। सीबीआई ने बताया कि कंपनी कम काम मिलने के समय में भी सभी कर्मचारियों को वेतन दे रही थी, इससे कंपनी पर वित्त भार और बढ़ गया है।
सीबीआई ने राजू भाइयों पर एसोसिएट स्टॉक ऑप्शन प्लान के जरिए कंपनी के वित्त विभाग के अधिकारियों को स्टॉकों का आवंटन करने का भी आरोप लगाया है।
वाटरहाउस के ऑडिटर श्रीनिवास तल्लुरी पर आरोप है कि उन्होंने बैंक और सत्यम से मिली सावधि जमा रसीदों (एफडीआर) में अंतर होते हुए भी कंपनी के बहीखातों को सही ठहराया और एफडीआर से जुड़े सही कागजात मिलने के बाद भी तल्लुरी ने राजू द्वारा बैंक की नकली मंजूरी से जुड़े कागजातों का ही इस्तेमाल किया गया।
सीबीआई की जांच में पता चला है कि सत्यम ने ऑडिटरों को 3.67 करोड़ रुपये की अच्छी खासी रकम चुकाई थी, जबकि विप्रो और इन्फोसिस ने ऑडिटरों को क्रमश: 1.1 करोड़ और 83 लाख रुपये चुकाए थे।
अब सोमवार को होगी सुनवाई
हैदराबाद के चौदहवें अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने सत्यम संस्थापक बी. रामलिंग राजू, उनके भाई बी. रामा राजू और पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी एस. वाडलामणि की जमानत याचिका पर सुनवाई 20 अप्रैल तक टाल दी है।
अभियोजन पक्ष ने अपना जवाब देने के लिए कुछ समय की मांग की। इस मामले में सीबीआई ने आरोपितों के खिलाफ 7 अप्रैल को आरोपत्र दाखिल किया था।  

First Published : April 17, 2009 | 10:04 PM IST