देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ लिमिटेड अपने समूह की ही दूसरी कंपनी डीएलएफ एसेट लिमिटेड (डीएएल) का अधिग्रहण करने जा रही है।
समूह के अध्यक्ष के. पी. सिंह और उनके परिवार द्वारा प्रवर्तित इस कंपनी का अधिग्रहण सौदा (कर्ज सहित) करीब 7,000 करोड़ रुपये में पूरा किया जाएगा। माना जा रहा है कि डीएलएफ का यह कदम कर्ज चुकाने और इसकी संपत्ति डीएलएफ के अधीन लाने के लिया किया गया है।
ऐसा होने से लीज रेंटल सहित अन्य स्रोत से मिलने वाली सालाना करीब 600 करोड़ रुपये की राशि वित्त वर्ष 2009-10 से डीएलएफ के खाते में जुड़ जाएगी। डीएएल फिलहाल लीज रेंटल से 325 करोड़ रुपये की राशि जुटा पाती है। प्रस्तावित सौदा पूरा करने के लिए डीएलएफ बैंकों और वित्तीय संस्थानों से करीब 2,500 करोड़ रुपये उधार लेगी।
सूत्रों के मुताबिक, कंपनी में डीई शॉ के 40 करोड़ डॉलर का निवेश चुकता कर दिया जाएगा। इसके अलावा, सिंफनी कैपिटल और अन्य से लिए गए 3,500 करोड़ रुपये का कर्ज डीएलएफ के खाते में स्थानांतरित कर दिए जाएंगे। समूह के मुख्य वित्तीय अधिकारी रमेश संका ने इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, ”मौजूदा वित्त वर्ष खत्म हो रहा है, लिहाजा अभी कुछ भी कहना मुमकिन नहीं है।” उल्लेखनीय है कि डीएएल ने डीई शॉ और सिंफनी कैपिटल से ऑप्शनल कंवर्टिबल प्रीफेरेंस शेयर के जरिए 1.1 अरब डॉलर का कर्ज लिया था। माना जा रहा है कि डीई शॉ का कर्ज अदा करने के लिए ही यह कदम उठाया जा रहा है।
जानकारों के मुताबिक, किसी और पक्ष का रास्ता बंद करने के लिए कंपनी ने यह निर्णय लिया है। सूत्र के मुताबिक, समूह दो विकल्पों पर विचार कर रहा है। पहला, कंपनी की पूर्ण खरीदारी और दूसरा डीएएल की समूची संपत्ति खरीदना।
सूत्र के मुताबिक, कर नियमों को देखते हुए ही कोई कदम उठाया जाएगा। लक्ष्य रखा गया है कि मार्च अंत तक इस सौदे का पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन ज्यादा संभावना है कि अप्रैल के पहले हफ्ते तक यह सौदा पूरा हो पाए। समूह ने इस सौदे को पूरा करने के लिए सिटी बैंक, अर्नस्ट ऐंड यंग और ग्रांट थार्नटन इंडिया को बतौर सलाहकार नियुक्त किया है।