वित्तीय वर्ष 2009-10 टेलीविजन विज्ञापन, ब्रॉडकास्टर और डायरेक्ट टू होम ऑपरेटरों के लिए काफी मुश्किल भरा हो सकता है।
इसकी वजह बताते हुए मीडिया पार्टनर्स एशिया (एमपीए) ने कहा है कि विज्ञापन के विकास में कमी आई है और आमदनी में भी गिरावट दर्ज की गई है। एमपीए एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय मीडिया शोध एजेंसी है। इसका मुख्यालय हांगकांग में है।
यह एजेंसी एशिया-प्रशांत क्षेत्र के हरेक देशों की मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के आंकड़े और विकास का अनुमान लगाती है। भारत के टेलीविजन और मनोरंजन क्षेत्र पर जारी हालिया आंकड़े में एमपीए ने कहा है कि 2009 में टीवी विज्ञापन 6.5 फीसदी की दर से विकास करेगा, जिसकी विकास दर पिछले साल 15.6 फीसदी थी।
हालांकि एमपीए 2010 में टेलीविजन विज्ञापन की विकास दर 8.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाती है। 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विज्ञापन बाजार में टेलीविजन विज्ञापन का हिस्सा 45 से 47 फीसदी है। एमपीए ने आशंका जताई है कि पूरा विज्ञापन उद्योग मौजूदा साल में जबर्दस्त गिरावट के दौर से गुजर सकता है।
एमपीए ने अनुमान लगाया है कि 2009 में विज्ञापन क्षेत्र की विकास दर 5.4 फीसदी तक रह सकती है। एमपीए की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है, ‘विज्ञापन उद्योग की विकास दर 2008 में 14.3 फीसदी थी, जो घटकर 2009 में 5.4 फीसदी रह सकती है। इसमें थोड़ा बहुत सुधार 2010 में देखने को मिल सकता है।’
डीटीएच ऑपरेटरों पर प्रतिक्रिया देते हुए एमपीए ने कहा है कि इसकी औसत प्रति यूजर आमदनी में काफी गिरावट आई है। मालूम हो कि अकेले 2008 में डीटीएच बाजार में 72 लाख उपभोक्ता जुड़े।
एमपीए के कार्यकारी निदेशक विवेक कूटो ने कहा, ‘डीटीएच के विकास की सबसे बड़ी बाधा घट रही प्रति यूजन आमदनी है। बहुत सारे मेट्रो शहरों में अभी तक डीटीएच सेवा पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाई है, जबकि वहां पर इनकी मांग काफी अधिक है।’