पंजाब में साइकिल की रफ्तार हुई तेज

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 12:52 AM IST

वित्तीय संकट ने पंजाब के उद्योगों को बडे पैमाने पर प्रभावित किया है। हालांकि राज्य में साइकिल और साइकिल कलपुर्जा निर्माता अब इस मंदी को पछाड़ने में सफल हो गए हैं।
राज्य में ज्यादातर इकाइयां अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर रही हैं, क्योंकि पिछले तीन साल के दौरान कारोबार में गिरावट के बाद इस साल साइकिलों और साइकिल कलपुर्जों की मांग में इजाफा हुआ है।
हालांकि रुपये में गिरावट साइकिल निर्माण इकाइयों के पक्ष में रही है। इन इकाइयों के मालिकों को संभावना है कि पूरे साल के दौरान रुपये में 20 फीसदी तक की गिरावट से उनका निर्यात बढ़ेगा। इसका असर आंशिक रूप से दिखा भी है।
पंजाब सरकार और कई अन्य राज्य सरकारों द्वारा शिक्षा पर खर्च में इजाफा किए जाने से भी घरेलू मांग में उछाल आने की संभावना है। निर्यातकों का कहना है कि इस वित्तीय वर्ष के लिए निर्यात आमदनी 800 करोड़ रुपये के आंकड़े को छू लेगी जो पिछले साल 746 करोड़ रुपये थी।
पंजाब में मझोले उद्योग विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष सतीश कुमार धांडा ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में निर्यात 2007-08 के 746 करोड़ रुपये की तुलना में बढ़ कर 800 करोड़ रुपये से अधिक का हो जाएगा। निर्यात में बढ़ोतरी की मुख्य वजह रुपये की तुलना में डॉलर की कीमत में इजाफा होना है।’
उन्होने कहा कि चीन से सस्ता आयात अभी भी एक चुनौती है और इससे घरेलू उद्योगों पर विपरीत असर पड़ा है। हालांकि डॉलर की तुलना में रुपये की कमजोरी ने आयात को खर्चीला बना दिया है जिससे चुनौती काफी हद तक कम हुई है।
इसके अलावा जून, 2008 में इस्पात की कीमतों में हुए इजाफे ने भी चीनी निर्माताओं और उनके वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुनाफे को प्रभावित किया है। पंजाब में साइकिल क्लस्टर लुधियाना में केंद्रित है और एक पटियाला जिले में लालरू के पास भी एक छोटा क्लस्टर है।
यह क्लस्टर दो दशक पहले विकसित किया गया। राज्य में 200 से अधिक लघु एवं मझोले उद्यम (एसएमई) साइकिल कलपुर्जा निर्माण में लगे हुए हैं जिनमें हजारों कामगारों को रोजगार मिला हुआ है।
धांडा ने कहा कि पूरे देश की राज्य सरकारों द्वारा वित्त वर्ष 2009-10 में लगभग 20 लाख साइकिलों की खरीद किए जाने की उम्मीद है जबकि वित्त वर्ष 2008-09 में 500,000-600,000 साइकिलें राज्य सरकारों द्वारा खरीदी गई थीं।
कर्नाटक सरकार ने लगभग 7 लाख साइकिलों, उत्तर प्रदेश ने 8 लाख, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों ने 5-5 लाख साइकिलों की खरीद के आदेश दिए हैं। संभावित मांग को पूरा करने के लिए साइकिल निर्माता इकाइयों ने बैंकों से बड़ी मात्रा में रकम उधार ली है।
इस क्षेत्र के कई बैंकों ने बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में यह स्वीकार किया है कि साइकिल क्लस्टर में इन इकाइयों के लिए ऋण प्रवाह में बढ़ोतरी हुई है। 

इसलिए कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि साइकिल क्लस्टर मंदी को मात देने में सफल हो रहा है। इसी तरह राज्य में कई अन्य क्लस्टरों में भी बदलाव की बयार बह रही है।

First Published : February 12, 2009 | 10:30 PM IST