बीएसएनएल की उधारी सीमा में हुआ इजाफा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 5:17 AM IST

बीएसएनएल को राहत

भारत संचार निगम को राहत मिली है क्योंंकि सरकार को इस कंपनी की उधारी सीमा 31,213 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 39,713 करोड़ रुपये करने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। इसके तहत वित्त वर्ष 2021 में कुछ शर्तों के साथ सॉवरिन गारंटी बॉन्ड के जरिए 8,500 करोड़ रुपये जुटाया जाना शामिल है। यह मंजूरी बीएसएनएल के कायापलट के लिए अहम है, जिसमें 4 जी नेटवर्क की स्थापना शामिल है ताकि वह निजी प्रतिस्पर्धियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके। इस साल फरवरी तक भारतीय मोबाइल बाजार में उसकी हिस्सेदारी सिर्फ 10.32 फीसदी थी।

हालांकि यह सख्त शर्तों के साथ आया है। बीएसएनएल को वित्त वर्ष 2021 और भविष्य के लिए अपना परिचालन राजस्व सुधारने के लिए उपयुक्त कदम उठाना होगा ताकि वह आंतरिक संग्रह से पूंजीगत खर्च समेत सभी खर्च पूरी कर सके और समय पर कर्ज का पुनर्भुगतान भी कर सके। दूसरा, उसे वित्त वर्ष 2021 के लिए अनिवार्यता का प्रमाणपत्र दूरसंचार विभाग को देना होगा कि परियोजना के क्रियान्वयन के लिए कर्ज का प्रस्ताव वित्तीय रूप से उपयुक्त है। तीसरा, उसका कुल बकाया कर्ज तय सीमा से ज्यादा नहीं होना चाहिए और उसे अपना परिचालन खर्च कम रखना होगा। साथ ही बीएनसएनएल को अपनी इकाइयों को उचित निर्देश जारी करना होगा कि पूंजीगत व परिचालन खर्च के लिए खर्च की सही बुकिंग की गई है।

सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी को हाल में झटका लगा जब वह करीब 8,000 करोड़ रुपये के 4जी उपकरण की निविदा को रद्द करने के लिए बाध्य होना पड़ा। यह देसी दूरसंचार कंपनियों के विरोध में हुआ, जिसने कहा कि उनके साथ विभेद दिया गया है और यह सरकार की स्थानीय खरीद नीति के खिलाफ है। अब दूरसंचार विभाग ने तकनीकी सदस्य की अध्यक्षता में आठ सदस्यों की समिति बनाई है, जो बीएसएनएल के विवादास्पद 4जी निविदा के लिए तकनीकी विशेषता पर सिफारिश देगी।

यहां तक कि निविदा पर नीति आयोग ने दूरसंचार विभाग और बीएसएनएल के अधिकारियों के साथ बैठक की और दूरसंचार कंपनियों टेक महिंद्रा, ट्यूलिप सॉफ्टवेयर व सी-डॉट के साथ भी। थिंक टैंक ने बीएसएनएल से कहा है कि वह अपने 4जी नेटवर्क के लिए देसी समाधान पर ध्यान दे। हालांकि बीएसएनएल के चेयरमैन पी के पुरवार ने स्पष्ट किया है कि देसी कंपनियों की प्रतिक्रिया के आधार पर यह साफ हो गया है कि उत्पादों को और विकसित करने की दरकार है। साथ ही उनकी कंपनी के पास प्रयोग के लिए रकम नहीं है, ऐसे में निविदा को अंतिम रूप देने से पहले क्षमता का प्रदर्शन होना चाहिए। अगर यह कदम उठाया गया है तो संशोधित निविदा वैश्विक विनिर्माताओं मसलन चीन की हुआवे व जेडटीई और यूरोपीय दिग्गज एरिक्सन व नोकिया के लिए मुसीबत भरा हो सकता है।

First Published : July 4, 2020 | 12:17 AM IST