Representational Image
चीनी क्षेत्र ने 30 सितंबर तक निर्यात पर अचानक प्रतिबंध लगाने के फैसले पर हैरानी जताई है। सरकार ने 15 लाख टन से अतिरिक्त 5 लाख टन निर्यात करने की अनुमति दी थी, उसके बाद अचानक यह फैसला आया है। बहरहाल कुछ लोगों ने कहा कि घरेलू कीमतों में उछाल को नियंत्रित करने और आने वाले महीनों में बाजार में पर्याप्त चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है, वहीं अन्य ने इसे एक तरह की तात्कालिक प्रतिक्रिया कहा है, जिससे लंबे समय में किसानों को नुकसान हो सकता है।
वहीं कुछ लोगों का कहना है कि सरकार के इस कदम से चीनी की मिल पर कीमत में लगाम लगाने का मकसद पूरा नहीं होगा, जो पिछले कुछ हफ्तों में कम क्लोजिंग स्टॉक और उत्पादन में गिरावट की आशंका के कारण लगभग 35-36 रुपये प्रति किलो से बढ़कर लगभग 38 से 40 रुपये प्रति किलो हो गए हैं।
उद्योग के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘कुल भंडारण कम है। 2025-26 सीजन (अक्टूबर से सितंबर) में चीनी उत्पादन पहले अनुमानित 290 लाख टन के मुकाबले लगभग 279.5 लाख टन होने की उम्मीद है और क्लोजिंग स्टॉक का अनुमान 38 से 39 लाख टन है, जो पिछले साल के 50 लाख टन से काफी कम है।’
उन्होंने कहा कि निर्यात प्रतिबंध से अधिक से अधिक सरकार लगभग 2 लाख टन चीनी बचा सकेगी, जो निर्यात के माध्यम से देश से बाहर चला जाता, लेकिन कुल आपूर्ति में इससे कितनी वृद्धि होगी यह देखा जाना बाकी है। किसान नेता राजू शेट्टी ने निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह निर्णय अविवेकपूर्ण है और इससे मिलों और किसानों दोनों का बकाया बढ़ेगा।
इंडियन शुगर ऐंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने कहा कि सरकार के इस कदम से उन मिलों को कठिनाई हो सकती है, जिनकी विदेशी खरीदारों के प्रति प्रतिबद्धता है।
इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने एक बयान में कहा, ‘पहले से संपन्न अनुबंधों के निष्पादन की अनुमति देने से व्यवस्थित व्यापार निपटान में सुविधा हो सकती है और वैश्विक बाजार में भारतीय आपूर्तिकर्ताओं की विश्वसनीयता को समर्थन मिल सकता है।’
वर्तमान चीनी सीजन 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए खाद्य मंत्रालय ने शुरू में 15 लाख टन के निर्यात की अनुमति दी थी, बाद में 5 लाख टन अतिरिक्त निर्यात की अनुमति दी गई, जिसमें केवल 87,587 टन को मंजूरी मिली।
चीनी निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध के फैसले के बाद गुरुवार को चीनी कंपनियों के शेयरों में 7 प्रतिशत तक की गिरावट आई। बीएसई में घाटमपुर शुगर मिल्स के शेयर में 6.95 प्रतिशत, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज में 6.65 प्रतिशत, उत्तम शुगर मिल्स में 5.60 प्रतिशत, बजाज हिंदुस्तान शुगर में 4.95 प्रतिशत, मवाना शुगर्स में 4.83 प्रतिशत और डालमिया भारत शुगर ऐंड इंडस्ट्रीज में 3.98 प्रतिशत की गिरावट आई है। त्रिवेणी इंजीनियरिंग ऐंड इंडस्ट्रीज के शेयर 3.85 प्रतिशत, राजश्री शुगर्स ऐंड केमिकल्स में 3.42 प्रतिशत, शक्ति शुगर्स में 2.92 प्रतिशत, बलरामपुर चीनी मिल्स में 2.52 प्रतिशत, और श्री रेणुका शुगर्स में 2.13 प्रतिशत गिरावट आई है। अन्य में अवध शुगर ऐंड एनर्जी का शेयर 1.76 प्रतिशत और ईआईडी पैरी इंडिया का शेयर 1.64 प्रतिशत गिरा।