प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
रुपया सोमवार को दो महीने के निचले स्तर पर आ गया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं, जिससे घरेलू मुद्रा पर दबाव पड़ा और नुकसान रोकने के लिए संभवतः आरबीआई ने दखल दिया। डीलरों ने यह जानकारी दी।
जुलाई में दबाव में रही भारतीय मुद्रा में अब सुधार देखने को मिल सकता है। बाजार बंद होने के बाद जारी आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले महीने घोषित रियायती स्वैप स्कीम के जरिये विदेशी मुद्रा की अच्छा-खासी आवक हुई है। 17 जुलाई तक कुल आवक 20.72 अरब डॉलर थी, जिसमें से एफसीएनआर (बी) जमाओं की आवक 17.41 अरब डॉलर थी।
डॉलर के मुकाबले स्थानीय मुद्रा 96.45 पर बंद हुई, जो पिछले बंद भाव से 0.2 फीसदी कम है। कारोबार के दौरान यह 96.53 के निचले स्तर तक गिर गई थी, जो मई के मध्य के बाद इसका सबसे कमजोर स्तर है। कारोबारियों का कहना है कि आरबीआई ने सरकारी बैंकों के जरिये डॉलर बेचे होंगे ताकि मुद्रा में गिरावट रोकी जा सके।इस दखल और बाद में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट की वजह से रुपया दिन के निचले स्तर से उबर पाया।
पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ने के कारण इस महीने भारतीय मुद्रा पर नया दबाव बना है।