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चीनी की मिठास के साथ गुड़ में भी चढ़ा महंगाई का रंग, 60 रुपये किलो के पार पहुंचा भाव

रिफाइंड चीनी की लागत में बढ़ोत्तरी और त्योहारी मांग बढ़ने के कारण गुड़ के दाम अभी और मजबूत होने के आसार हैं

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सुशील मिश्र   
Last Updated- August 12, 2026 | 8:03 PM IST

Jaggery prices: चीनी में चढ़ती महंगाई का असर अब गुड़ पर भी पड़ना शुरू हो गया है। गुड़ का भाव 60 रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गया। रिफाइंड चीनी की लागत में बढ़ोत्तरी और त्योहारी मांग बढ़ने के कारण गुड़ के दाम अभी और मजबूत होने के आसार हैं। इस साल गुड़ की कीमतों में पिछले पांच सालों की सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।महाराष्ट्र में गुड़ की खुदरा कीमतें 60 रुपये प्रति किलो से ऊपर चली गई हैं। देशभर की थोक मंडी में औसत कीमत 3,500 से 5,400 रुपये प्रति क्विंटल (कीमतें बाजार की गुणवत्ता और क्षेत्र के आधार पर) के बीच रही हैं। नवी मुंबई एपीएमसी में गुड़ के थोक दाम 6,000 रुपये के पार पहुंच गए है। मंड़ी समिति से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में गुड़ का औसत भाव 5,312 रुपये, राजस्थान में 5,400 रुपये, उत्तर प्रदेश में 4,046 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। जबकि खुदरा बाजार में दाम 40 रुपये से 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक चल रहे हैं।

त्योहारी मांग से चढ़े दाम

त्योहारी मांग में तेजी के कारण दाम बढ़ रहे हैं। गणेशोत्सव तक गुड़ के दाम में 5 से 10 रुपये प्रति किलो की और बढ़ोतरी हो सकती है। गुड़ व्यापारी ललित भाई ने बताया कि इस समय बाजार में रंग और रसायन से मुक्त शुद्ध पीला गुड़ तथा जैविक (ऑर्गेनिक) गुड़ की मांग सबसे अधिक है। प्रशासन की सख्ती और ग्राहकों में जागरुकता के कारण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कृत्रिम रंग मिलाया हुआ गुड़ बाजार में लगभग दिखाई नहीं दे रहा है।

मंडियों में पर्याप्त स्टॉक

गुड़ कारोबारियों की मानी जाए तो गुड़ के दाम बहुत ही अस्थिर हैं। स्थानीय बाजार में आवक के आधार पर कीमतों में हर सप्ताह लगभग 5 से 10 फीसदी तक का उतार-चढ़ाव हो रहा है। लेकिन पिछले एक महीने से कीमतों में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। रक्षाबंधन और गणेशोत्सव के दौरान गुड़ की खपत विशेष रूप से बढ़ जाती है। इस वर्ष गुड़ पाउडर की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सांगली चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अमरसिंह देसाई ने बताया कि वर्तमान में त्योहारों की मांग को पूरा करने के लिए गुड़ पर्याप्त मात्रा में बाजार में पहुंच रहा है।

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सप्लाई में बारिश का रोड़ा

महाराष्ट्र और कर्नाटक में लगातार बारिश के कारण परिवहन और भंडारण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। हवा में बढ़ी नमी के कारण गुड़ का सुरक्षित भंडारण कठिन हो जाता है। यदि वर्षा का दौर जारी रहा, तो गुड़ उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, जिससे कीमतों में और वृद्धि की संभावना है। लगातार बढ़ती मांग के कारण गुड़ पाउडर के दाम तेजी से बढ़े हैं। पिछले वर्ष इसका भाव 38 रुपये प्रति किलो था, जो इस वर्ष बढ़कर 55 से 60 रुपये प्रति किलो हो गया है।

निर्यात में गिरावट

भारत का गुड़ निर्यात 2025-26 में 466.7 लाख अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 493.9 लाख डॉलर की तुलना में कम है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-मई के दौरान गुड़ निर्यात 56.6 मिलियन डॉलर रहा। भारत का गुड़ निर्यात 2021-22 के 324.7 लाख डॉलर से बढ़कर 2023-24 में 426.8 लाख डॉलर और 2024-25 में 493.9 लाख डॉलर तक पहुंचा था। इसके बाद 2025-26 में इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई।

मिठास का जादू

दुनिया भर में गुड़ के कुल उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 70 फीसदी से ज्यादा है, जिससे यह प्राकृतिक मिठास के मामले में दुनिया का लीडर बन गया है। देश में पैदा होने वाले गन्ने का लगभग 20-30 फीसदी हिस्सा गुड़ बनाने में इस्तेमाल होता है, जिससे करीब 25 लाख ग्रामीण लोगों को रोजगार मिलता है। भारत का गुड़ उद्योग बड़े पैमाने पर गन्ने के उत्पादन पर टिका है।

First Published : August 12, 2026 | 8:03 PM IST