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Explainer: गोल्ड इम्पोर्ट कम करना क्यों जरूरी? एक्सपर्ट की सलाह- FTA नीतियों की हो समीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में एक साल सोने की खरीद टालने की अपील की। इसका मकसद गोल्ड इम्पोर्ट को हत्तोत्साहित करना और अर्थव्यवस्था को सपोर्ट देना है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- May 12, 2026 | 5:02 PM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों सादगी और खर्च में संयम बरतने की अपील की। इसके बाद भारत में बढ़ते सोने के आयात की अचानक चर्चा होने लगी है। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को कहा कि सरकार पश्चिम एशिया संघर्ष के असर से लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पेट्रोल-डीजल के समझदारी से इस्तेमाल, सोने की खरीद टालने और विदेशी यात्रा कम करने जैसी अपील की, ताकि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके। वहीं, सोने की बढ़ते आयात पर काबू पाने के लिए थिंक टैंक GTRI ने सरकार से अपनी FTA नीतियों की समीक्षा करने की अपील की है।

GTRI ने सुझाव दिया है कि सरकार को सख्त ओरिजिन नियम लागू करने चाहिए, FTA के तहत कीमती धातुओं को दी गई छूट की समीक्षा करनी चाहिए और भविष्य के व्यापार समझौतों से सोना, चांदी, प्लैटिनम और हीरों को बाहर रखना चाहिए, ताकि भारत के व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा की जा सके।

Gold Import रिकॉर्ड स्तर पर

भारत का सोना आयात 2025-26 में 24 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह 2024-25 में 58 अरब डॉलर, 2023-24 में 45.54 अरब डॉलर, 2022-23 में 35 अरब डॉलर, 2021-22 में 46.14 अरब डॉलर, 2020-21 में 34.62 अरब डॉलर और 2019-20 में 28.2 अरब डॉलर था। हालांकि वॉल्यूम के लिहाज से सोने का आयात 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रह गया, जो 2024-25 में 757.09 टन था। यह 2023-24 में 795.2 टन और 2022-23 में 678.3 टन था।

भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। भारत में सोने का आयात मुख्य रूप से ज्वेलरी इंडस्ट्री की मांग के कारण होता है। जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितताओं के दौरान सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए वैश्विक जोखिम बढ़ने पर भारत में इसकी मांग भी बढ़ जाती है।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, सोने के आयात में बढ़ोतरी की मुख्य वजह कीमतों में तेज उछाल है। FY25 में सोने की कीमत 76,617.48 डॉलर प्रति किलो थी, जो FY26 में बढ़कर 99,825.38 डॉलर प्रति किलो हो गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोने की कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच चुकी है। पिछले साल अप्रैल में पहली बार सोने की कीमत 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार गई थी।

वित्त वर्ष गोल्ड इंपोर्ट (अरब डॉलर में) गोल्ड इंपोर्ट (टन में)
2019-20 28.2 अरब डॉलर
2020-21 34.62 अरब डॉलर
2021-22 46.14 अरब डॉलर
2022-23 35 अरब डॉलर 678.3 टन
2023-24 45.54 अरब डॉलर 795.2 टन
2024-25 58 अरब डॉलर 757.09 टन
2025-26 71.98 अरब डॉलर 721.03 टन

सोर्स: वा​णिज्य मंत्रालय

FTA नीतियों की हो समीक्षा: एक्सपर्ट

थिंक टैंक GTRI ने सरकार से अपनी FTA नीतियों की समीक्षा करने की अपील की है। खासकर भारत-UAE व्यापार समझौते के तहत दुबई को दिए गए कीमती धातुओं पर टैरिफ छूट की समीक्षा की मांग की गई है, क्योंकि इससे हाल के वर्षों में सोने के आयात में तेज बढ़ोतरी हुई है।

भारत-UAE व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) मई 2022 में लागू हुआ था। इस समझौते के तहत भारत ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) प्रणाली के जरिए UAE से आने वाले सोने पर सामान्य आयात शुल्क से 1 प्रतिशत कम ड्यूटी की अनुमति दी। यह कोटा शुरुआत में 120 टन सालाना रखा गया था, जिसे 2027 से बढ़ाकर 200 टन किया जाएगा। यह भारत के कुल सोना आयात का लगभग 25 प्रतिशत कवर करेगा।

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि 2024 के बजट में भारत द्वारा सामान्य गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी को 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत करने के बाद इसका फायदा और बढ़ गया। इसके चलते दुबई से आने वाला सोना प्रभावी रूप से केवल 5 प्रतिशत ड्यूटी पर भारत में आने लगा। इसके बाद दुबई से सोने का आयात तेजी से बढ़ा है। भारत का UAE से गोल्ड बार आयात 2022 में 2.9 अरब डॉलर से बढ़कर 2023 में 6.7 अरब डॉलर और 2025 में 16.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत के कुल सोना आयात में दुबई की हिस्सेदारी FTA से पहले 7.9 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 28 प्रतिशत हो गई।

उनहोंने कहा कि यह रुझान चिंता पैदा करता है, क्योंकि UAE न तो सोने का खनन करता है और न ही वहां बड़े स्तर पर प्रोसेसिंग गतिविधियां होती हैं। ऐसा लगता है कि तीसरे देशों से सोना दुबई के रास्ते केवल कम भारतीय टैरिफ का फायदा लेने के लिए भेजा जा रहा है।

Gold Import: अर्थव्यवस्था पर क्या असर

सोने के अधिक आयात से देश के व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा खर्च पर दबाव बढ़ता है। सोने के आयात में बढ़ोतरी के कारण 2025-26 में भारत का व्यापार घाटा (आयात और निर्यात के बीच अंतर) बढ़कर 333.2 अरब डॉलर पहुंच गया। इसका असर भारत के चालू खाते के घाटे (CAD) पर भी पड़ता है।

RBI के 2 मार्च को जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर तिमाही में भारत का CAD बढ़कर 13.2 अरब डॉलर यानी GDP का 1.3 प्रतिशत हो गया, जबकि एक साल पहले यह 11.3 अरब डॉलर था। इसका मुख्य कारण अमेरिका को निर्यात में गिरावट और बढ़ता व्यापार घाटा रहा। सोना भारत के कुल आयात का 9 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा रखता है। 2025-26 में भारत का कुल आयात 775 अरब डॉलर रहा।

Gold Import: किन देशों से आता है सोना?

भारत के लिए स्विट्जरलैंड सोने का सबसे बड़ा स्रोत है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। इसके बाद UAE का हिस्सा 16 प्रतिशत से अधिक और दक्षिण अफ्रीका का करीब 10 प्रतिशत है। 2025-26 के दौरान स्विट्जरलैंड से भारत का कुल आयात (सोने सहित) 11.36 प्रतिशत बढ़कर 24.27 अरब डॉलर हो गया।

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इसके अलावा, तीसरा बड़ा नाम दक्षिण अफ्रीका है, जो भारत की सोने की जरूरत का करीब 10% हिस्सा पूरा करता है। साथ ही भारत पेरू से लगभग 8% सोना मंगवाता है। इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया और बोलीविया जैसे देशों से भी कच्चा या रिफाइंड सोना भारत आता है।

Gold Import: सरकार ने क्या उठाए कदम

सोने के आयात को कम करने के लिए सरकार ने सोना, चांदी और प्लैटिनम से जुड़े सभी प्रकार के आर्टिकल्स पर आयात प्रतिबंध लगाए हैं। इस कदम का मकसद मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के दुरुपयोग को रोकना और थाईलैंड जैसे देशों से बिना जड़े आभूषणों के नाम पर होने वाले आयात पर लगाम लगाना है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ कारोबारी भारत-आसियान FTA का फायदा उठाकर ड्यूटी अंतर का लाभ लेने और टैरिफ से बचने की कोशिश कर रहे थे।

भारत ने 2022 में चालू खाते के घाटे और सोने के बढ़ते आयात को नियंत्रित करने के लिए गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी को 10.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। मई 2022 में भारत ने 107 टन सोने का आयात किया था हालांकि 2024-25 के बजट में सरकार ने घरेलू जेम्स और ज्वेलरी उद्योग को बढ़ावा देने, अवैध तस्करी रोकने और स्थानीय कीमतों को कम करने के उद्देश्य से इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर 6 प्रतिशत कर दी।

PM की अपील के पीछे का मकसद

प्रधानमंत्री की अपील के पीछे सबसे बड़ा मकसद देश की ‘बचत’ बढ़ाना है। अगर लोग सोने की खरीद थोड़ी कम कर दें, तो इससे अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा हो सकता है।

मोतीलाल ओसवाल के आंकड़ों के मुताबिक, अगर भारत में सोने की मांग 30-40 फीसदी भी घटती है, तो देश करीब 20-25 अरब डॉलर बचा सकता है। वहीं अगर मांग में 50 फीसदी की कमी आती है, तो लगभग 36 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। यह रकम इतनी बड़ी है कि इससे देश के व्यापार घाटे (CAD) का लगभग आधा हिस्सा कवर हो सकता है।

सोने के आयात पर कम खर्च होने से डॉलर की निकासी घटेगी, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होंगे और रुपये पर दबाव कम होगा। इससे बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई के असर से देश को काफी राहत मिल सकती है।

पीटीआई इनपुट के साथ 

First Published : May 12, 2026 | 5:02 PM IST