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100 डॉलर से सीधा 90 पर तेल, आखिर क्या हुआ बाजार में?

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी IEA ने एक और चिंता बढ़ा दी है। एजेंसी का कहना है कि इस साल वैश्विक तेल की मांग घट सकती है

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- April 15, 2026 | 2:27 PM IST

Crude Oil Price: दुनिया के तेल बाजार में एक बार फिर बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कुछ दिन पहले जो कच्चा तेल 100 डॉलर के पार पहुंच गया था, अब वही फिसलकर 90 डॉलर के करीब आ गया है। बुधवार को WTI क्रूड गिरकर करीब 90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार का मूड अचानक बदल गया है और माहौल में अनिश्चितता साफ महसूस हो रही है।

तेल की कीमतों में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह है उम्मीद। उम्मीद इस बात की कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरू हो सकती है। खबरें हैं कि अगले दो दिनों में दोनों देश आमने-सामने आ सकते हैं। बस इसी संभावना ने बाजार की दिशा बदल दी। जहां पहले डर हावी था, अब वहां थोड़ी राहत की उम्मीद दिख रही है।

हालांकि तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। होरमुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, अब भी तनाव के साए में है। यहां किसी भी तरह की रुकावट पूरी दुनिया की सप्लाई को हिला सकती है। यही वजह है कि बाजार हर छोटी खबर पर तेजी से प्रतिक्रिया दे रहा है।

मांग घटने का डर, बाजार पर भारी

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी IEA ने एक और चिंता बढ़ा दी है। एजेंसी का कहना है कि इस साल वैश्विक तेल की मांग घट सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो यह 2020 के बाद पहली बार होगा। ऊंची कीमतों ने खपत को दबा दिया है और अब इसका असर साफ नजर आने लगा है।

उधर अमेरिका से आई खबर ने भी बाजार को झटका दिया। कच्चे तेल का भंडार 6.1 मिलियन बैरल बढ़ गया है। यह लगातार आठवां हफ्ता है जब स्टॉक बढ़ा है। यानी बाजार में तेल की कोई कमी नहीं है, बल्कि सप्लाई जरूरत से ज्यादा है। यही कारण है कि कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

कुछ दिन पहले क्यों मची थी आग

यही बाजार कुछ दिन पहले बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रहा था। सोमवार को तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार निकल गई थीं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बेनतीजा रही और तनाव अचानक बढ़ गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए होरमुज क्षेत्र में कार्रवाई की बात कही। बस फिर क्या था, बाजार में डर की लहर दौड़ गई और कीमतें तेजी से उछल गईं।

हाल के महीनों में तेल की कीमतों ने कई बार चौंकाया है। मार्च में ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि यह अभी भी 2008 के 147 डॉलर के रिकॉर्ड से नीचे है, लेकिन बाजार की तेजी और गिरावट दोनों ही यह दिखा रही हैं कि हालात कितने अस्थिर हैं।

Crude Oil Outlook: आगे क्या होगा

तेल बाजार इस वक्त दो ताकतों के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ युद्ध और तनाव का डर है, तो दूसरी तरफ बातचीत और समझौते की उम्मीद। इसी खींचतान के बीच कीमतें ऊपर-नीचे हो रही हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका और ईरान की अगली चाल क्या होगी, क्योंकि वही तय करेगी तेल का अगला रुख।

First Published : April 15, 2026 | 2:09 PM IST