टेक-ऑटो

ई-कमर्शियल वाहन कंपनियों की बढ़ी चिंता, पीएम ई-ड्राइव के लोकलाइजेशन नियम से दुविधा

दुर्लभ मैग्नेट की आपूर्ति और चीन के कड़े निर्यात नियमों के कारण ई-वाणिज्यिक वाहन विनिर्माता पीएम ई-ड्राइव योजना के स्थानीय विनिर्माण नियम पूरा करने में असमर्थ हैं

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दीपक पटेल   
Last Updated- August 31, 2026 | 11:31 PM IST

इलेक्ट्रिक वा​णि​ज्यिक वाहन (ई-सीवी) बनाने वाली कंपनियां मु​​श्किल में हैं। इसकी वजह यह है कि ये कंपनियां पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत स्थानीय स्तर पर विनिर्माण की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही हैं, जो मंगलवार से लागू होने वाली हैं। उद्योग के अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) ने 22 जुलाई को भारी उद्योग मंत्रालय से सात महीने का समय और बढ़ाने की मांग की थी। उन्होंने इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों के लिए ट्रैक्शन मोटर और मोटर नियंत्रण प्रणाली को स्थानीय स्तर पर बनाने की समय-सीमा 1 सितंबर, 2026 से आगे बढ़ाकर 1 अप्रैल, 2027 करने का अनुरोध किया था। उद्योग के संगठन ने चीन के निर्यात पर लगी पाबंदियों के कारण दुर्लभ खनिज मैग्नेट की आपूर्ति में लगातार आ रही रुकावट का हवाला दिया।

सरकारी अधिकारियों ने सोमवार को बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि उद्योग के अनुरोध पर अभी निर्णय नहीं लिया गया है। पीएम ई-ड्राइव योजना के चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) के तहत ई-बस और ई-ट्रक बनाने वाली कंपनियों के लिए ट्रैक्शन मोटर के मुख्य पुर्जे भारत में ही बनाना जरूरी था। सरकार ने शुरू में इन नियमों को 1 सितंबर, 2025 से लागू करने की योजना बनाई थी, लेकिन उद्योग की तरफ से मिली प्रतिक्रिया के बाद इस समय-सीमा को दो बार आगे बढ़ा दिया।

30 सितंबर, 2025 को घोषित पहले विस्तार के तहत इसके लागू होने की तारीख को मार्च 2026 तक टाल दिया गया था। इसके बाद 13 मार्च, 2026 को मंत्रालय ने विनिर्माताओं को 31 अगस्त, 2026 तक दुर्लभ खनिज मैग्नेट वाली ट्रैक्शन मोटर का आयात जारी रखने की अनुमति दे दी। इससे स्थानीयकरण के नियमों का पालन करने की समय-सीमा 1 सितंबर, 2026 तक बढ़ गई।

भारी उद्योग मंत्रालय को 22 जुलाई को लिखे अपने पत्र में सायम ने कहा कि डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे दुर्लभ खनिज तत्वों के साथ-साथ स्थायी मैग्नेट पर चीन के निर्यात नियंत्रण ने स्थायी मैग्नेट के मामले में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में खासा बदलाव कर दिया है। यह इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों में उपयोग किए जाने वाले ट्रैक्शन मोटर के लिए अहम इनपुट होता है।

उद्याोग के संगठन ने कहा था, ‘हालांकि कुछ खेपों के लिए निर्यात लाइसेंस दे दिए गए हैं, लेकिन खरीद अब भी नियामकीय मंजूरी, लंबे समय और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितता पर निर्भर है।’

First Published : August 31, 2026 | 11:31 PM IST