प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
ठेके पर आईफोन बनाने वाली कंपनियों से मिले आंकड़ों के मुताबिक ऐपल इंक 70 अरब डॉलर से अधिक मूल्य (एफओबी मूल्य) का उत्पादन लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार है। ऐपल यह उपलब्धि वित्त वर्ष 2022 से 2026 तक के पांच साल की अवधि में हासिल करने जा रही है और इसका मुख्य कारण मौजूदा वित्त वर्ष में अमेरिका को होने वाले निर्यात में आई अप्रत्याशित तेजी है। एफओबी मूल्य का मतलब सामान तैयार करने से लेकर निर्यात के लिए बंदरगाह तक लाने और जहाज पर लादने तक का पूरा खर्च होता है।
वित्त वर्ष 2026 ऐपल के लिए बंपर साल साबित होने वाला है। इस साल देश में पिछले 5 वर्षों में कुल मिलाकर बने आईफोन की कुल एफबोबी मूल्य का अनुमानित 36 फीसदी का उत्पादन किया जाएगा। यह 5 साल की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के दौरान किसी एक साल में अभी तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है।
यह योजना मार्च के आखिर में खत्म हो रही है। ऐपल अपने लिए ठेके पर आईफोन बनाने वाली फॉक्सकॉन और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के माध्यम से प्रमुख लाभार्थी रही है।
कुल मिलाकर 5 साल की अवधि में निर्यात का हिस्सा एफओबी उत्पादन मूल्य का 70 फीसदी रहा क्योंकि ऐपल ने दुनिया भर में ‘मेड इन इंडिया’ आईफोन की आपूर्ति की।
ऐपल के दो मुख्य आपूर्तिकर्ताओं के आकलन के आधार पर आईफोन का एफओबी उत्पादन मूल्य वित्त वर्ष 2026 में 25 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है जो किसी एक साल में अभी तक का सर्वाधिक आंकड़ा होगा। यह वित्त वर्ष 2025 के मुकाबले 20 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी भी दिखाता है। उस समय इसका एफओबी मूल्य 21 अरब डॉलर था। इसमें निर्यात के साथ-साथ घरेलू बिक्री के लिए किया गया उत्पादन भी शामिल है।
ऐपल ने महामारी के बाद के दौर में धीरे-धीरे भारत में उत्पादन शुरू किया और पीएलआई योजना के पहले साल वित्त वर्ष 2022 में देश में बने आईफोन की कीमत महज़ 2.5 अरब डॉलर थी, जो अगले साल तीन गुना से भी ज्यादा बढ़कर 7.5 अरब डॉलर हो गई। लेकिन असली उछाल वित्त वर्ष 2024 में आया, जब कुल 13.8 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन का उत्पादन किया गया और अब उम्मीद है कि इस योजना के आखिरी साल यानी वित्त वर्ष 2026 में यह लगभग दोगुना हो जाएगा।
वित्त वर्ष 2026 में आईफोन के उत्पादन में अप्रत्याशित बड़ा उछाल आया। असल में पिछले साल अप्रैल में अमेरिकी सरकार ने कई देशों पर कर लगा दिया था, जिसमें चीन भी शामिल था मगर भारत ने बिना किसी शुल्क के आईफोन का निर्यात जारी रखा। चीन के मुकाबले भारत में लागत करीब 10 से 14 फीसदी अधिक होती है जिसकी कुछ हद तक भरपाई पीएलआई के तहत दी जाने वाली 4 से 6 फीसदी की वित्तीय प्रोत्साहन से होती है।
चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर के बीच भारत ने अमेरिका को 14.1 अरब डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन, खास तौर पर आईफोन का निर्यात किया जो वित्त वर्ष 2025 के 5.04 अरब डॉलर से करीब 182 फीसदी अधिक है। हालांकि अमेरिका की शीर्ष अदालत ने शुल्क को रद्द करने का फैसला दिया, जिससे भारत को चीन पर जो बढ़त थी वह खत्म हो गई। नतीजतन सरकार पीएलआई योजना को जारी रखने पर विचार कर रही है।