प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्ते और पेंशन में सुधार के लिए गठित ‘8वां केंद्रीय वेतन आयोग’ इन दिनों काफी सक्रिय नजर आ रहा है। आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कर्मचारियों, यूनियों और पेंशनर्स से सीधे बातचीत कर रहा है। हाल ही में आयोग के दौरों से जुड़े कुछ बड़े अपडेट सामने आए हैं, जिनमें लखनऊ, दिल्ली, हैदराबाद, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दौरे मुख्य रूप से शामिल हैं। यह पूरी कवायद इसलिए की जा रही है ताकि नई सैलरी और पेंशन की सिफारिशें तैयार करने से पहले सभी पक्षों की उम्मीदों और सुझावों को अच्छी तरह समझा जा सके और जमीनी हकीकत को जाना जा सके।
इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर 21 मई 2026 को जारी किए गए एक नोटिस के मुताबिक, लखनऊ में 21 और 22 जून को आयोग की बड़ी बैठकें होने जा रही हैं। यह बैठक देश भर के करीब 1.1 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों यानी केंद्रीय कर्मचारियों और रिटायर्ड लोगों की आर्थिक और उनकी जेब पर सीधा असर डालने वाला है। इन बैठकों से मिलने वाले इनपुट्स के आधार पर ही आने वाले समय में नए वेतन भत्तों की रूपरेखा तय होगी।
अगामी 22 और 23 जून 2026 को होने वाला लखनऊ दौरा 8वें वेतन आयोग की तैयारियों में बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान अलग-अलग कर्मचारी संगठन, यूनियनें और क्षेत्रीय प्रतिनिधि आयोग के सामने अपनी मांगें, वेतन से जुड़ी परेशानियां और पेंशन के मुद्दे रखेंगे। जो संगठन या यूनियन लखनऊ में आयोग से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं, उन्हें 10 जून 2026 तक तय फॉर्मेट में आवेदन देकर मिलने का समय लेना होगा।
इसके लिए आयोग ने एक ऑनलाइन लिंक भी जारी किया है, जिसके जरिए आप अपना रिक्वेस्ट फॉर्म जमा कर सकते हैं। यह फॉर्म आपको आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर मिल जाएगा। इस बैठक की जगह और समय सारणी की पूरी जानकारी बाद में अलग से दी जाएगी। सभी आधिकारिक सूचनाओं और नए अपडेट्स के लिए आप आयोग की वेबसाइट पर अपनी नजर रख सकते हैं ताकि कोई जरूरी जानकारी छूटने न पाए।
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केंद्रीय कर्मचारियों के बीच अक्सर यह सवाल बना रहता है कि यह वेतन आयोग क्या है और यह किस तरह काम करता है। दरअसल, यह सरकार द्वारा बनाया गया एक अस्थाई निकाय होता है जिसका मुख्य काम देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, महंगाई की दर और सरकार की क्षमता को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों के वेतन-भत्ते और पेंशन ढांचे की समीक्षा करना है। सारी कड़ियों को जोड़ने और गहन चर्चा के बाद यह आयोग सरकार को एक संशोधित पे-स्ट्रक्चर और फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश करता है।
यह आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ हर एक पहलू की जांच करता है। इसमें कर्मचारियों की कार्यप्रणाली, उनके रहने-खाने का खर्च और बाजार की महंगाई जैसे कई अहम फैक्टर्स को ध्यान में रखा जाता है। यही कारण है कि इस आयोग की सिफारिशों का केंद्रीय कर्मचारियों को हमेशा बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है क्योंकि इससे उनका रहन-सहन और भविष्य सीधे तौर पर प्रभावित होता है।
जब भी कोई नया वेतन आयोग आता है, तो कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर ही होती है। आसान शब्दों में समझें तो फिटमेंट फैक्टर एक तरह का गुणांक यानी मल्टिप्लायर होता है, जिसका इस्तेमाल नए वेतन ढांचे के तहत पुरानी बेसिक पे को संशोधित बेसिक पे में बदलने के लिए किया जाता है। इसी आंकड़े से तय होता है कि किसी कर्मचारी की सैलरी या किसी पेंशनभोगी की पेंशन में कुल कितनी बढ़ोतरी होगी।
अगर पिछले वेतन आयोगों के इतिहास को देखें तो छठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 तय किया गया था, जिसे बाद में सातवें वेतन आयोग में बढ़ाकर 2.57 कर दिया गया था। हालांकि, आठवें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फैक्टर क्या रहने वाला है, इस पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। यही वजह है कि लखनऊ समेत देश के अन्य हिस्सों में होने वाली इन मुलाकातों में फिटमेंट फैक्टर और सर्विस कंडीशन को लेकर सबसे ज्यादा बातचीत होने की उम्मीद है। देश भर से मिलने वाले इसी फीडबैक के आधार पर आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।