देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI के शेयर में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली। जहां बीएसई सेंसेक्स करीब 1.1 प्रतिशत कमजोर था, वहीं SBI का शेयर करीब 4 प्रतिशत टूटकर 980 रुपये के आसपास पहुंच गया। दिन के कारोबार में यह 975 रुपये तक फिसल गया।
शेयर में यह दबाव बैंक के चौथी तिमाही के नतीजों के बाद आया। पहली नजर में नतीजे बहुत खराब नहीं दिखते, क्योंकि बैंक का मुनाफा बढ़ा है और लोन ग्रोथ भी मजबूत रही है। लेकिन बाजार की चिंता बैंक की कमाई की गुणवत्ता और मार्जिन को लेकर है।
SBI का सबसे बड़ा झटका उसके नेट इंटरेस्ट मार्जिन यानी NIM में गिरावट से आया। NIM बैंक की असली कमाई को दिखाता है। बैंक जितने ब्याज पर पैसा उधार देता है और जितने ब्याज पर जमा लेता है, दोनों के बीच का अंतर ही उसकी कमाई बनता है। चौथी तिमाही में SBI का NIM घटकर 2.81 प्रतिशत पर आ गया, जबकि पिछली तिमाही में यह ज्यादा था।
इस गिरावट की मुख्य वजह RBI की रेपो रेट कट रही। ब्याज दरें घटने से बैंक को लोन पर मिलने वाला रिटर्न कम हुआ। साथ ही SBI के कई बड़े कॉरपोरेट लोन कम ब्याज वाले T-Bill आधारित रेट से जुड़े हुए हैं, जिससे यील्ड और नीचे चली गई।
SBI का तिमाही मुनाफा करीब 197 अरब रुपये रहा, जो पिछले साल से थोड़ा ज्यादा है। लेकिन बाजार को उम्मीद थी कि बैंक ब्याज से ज्यादा कमाई करेगा। नेट इंटरेस्ट इनकम यानी NII अनुमान से कमजोर रही। इसके अलावा ट्रेजरी इनकम में भी नुकसान हुआ। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बैंक के निवेश पोर्टफोलियो पर असर पड़ा और ट्रेजरी से कमाई घट गई। यानी बैंक की बैलेंस शीट मजबूत होने के बावजूद कमाई के कुछ अहम हिस्सों में कमजोरी दिखी।
हालांकि बाजार ने तुरंत निगेटिव रिएक्शन दिया, लेकिन ज्यादातर ब्रोकरेज फर्म अब भी SBI को मजबूत बैंक मान रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह बैंक की लगातार मजबूत लोन ग्रोथ है। SBI का लोन बुक सालाना आधार पर 17 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है, जो पूरे बैंकिंग सिस्टम से बेहतर है। बैंक को उम्मीद है कि अगले साल भी 13 से 15 प्रतिशत तक ग्रोथ बनी रहेगी। रिटेल, MSME, एग्रीकल्चर और कॉरपोरेट सभी सेगमेंट में मांग मजबूत बनी हुई है। खासकर गोल्ड लोन तेजी से बढ़ रहे हैं। बैंक अब ज्यादा गुणवत्ता वाले ग्राहकों पर फोकस कर रहा है ताकि ग्रोथ के साथ जोखिम भी कंट्रोल में रहे।
एक और बड़ी राहत बैंक की एसेट क्वालिटी है। SBI का बैड लोन अनुपात यानी GNPA और NNPA दोनों ही काफी नीचे हैं। चौथी तिमाही में कुछ स्लिपेज जरूर बढ़े, खासकर MSME और एग्री सेगमेंट में, लेकिन ब्रोकरेज इसे बहुत बड़ी चिंता नहीं मान रहे। बैंक का मानना है कि अगले साल भी क्रेडिट कॉस्ट नियंत्रण में रहेगा और प्रोविजनिंग का दबाव ज्यादा नहीं बढ़ेगा।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि SBI अगले कुछ क्वार्टर में अपने मार्जिन को कैसे सुधारता है। बैंक मैनेजमेंट का कहना है कि FY27 में घरेलू NIM फिर 3 प्रतिशत से ऊपर जा सकता है। इसके लिए बैंक ज्यादा CASA डिपॉजिट जुटाने, कम लागत वाले फंड बढ़ाने और बेहतर यील्ड वाले लोन पर फोकस कर रहा है। अगर यह रणनीति सफल रहती है, तो मौजूदा गिरावट के बाद शेयर में रिकवरी देखने को मिल सकती है।
एक्सिस डायरेक्ट ने SBI पर 1,285 रुपये का टारगेट दिया है, जो मौजूदा 980 रुपये के स्तर से करीब 31 प्रतिशत ऊपर है। मोतीलाल ओसवाल ने 1,300 रुपये का लक्ष्य रखा है, जो करीब 33 प्रतिशत की संभावित तेजी दिखाता है। वहीं Emkay और Antique ने 1,225 रुपये का टारगेट दिया है, जो मौजूदा भाव से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा है। नुवामा ने 1,200 रुपये का लक्ष्य रखा है, यानी करीब 22 प्रतिशत अपसाइड।
यानी बाजार फिलहाल कमजोर तिमाही और मार्जिन दबाव पर फोकस कर रहा है, लेकिन ज्यादातर ब्रोकरेज को भरोसा है कि SBI की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी अभी भी मजबूत बनी हुई है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)