म्युचुअल फंड

एक जैसी थीम, अलग-अलग नतीजे; पैसिव वैल्यू फंड्स ने ऐक्टिव को पीछे छोड़ा

निफ्टी 200 वैल्यू 30 इंडेक्स पिछले तीन वर्ष में 29 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के हिसाब से बढ़ा, इस तरह से ऐक्विट फंडों के औसत रिटर्न का करीब-करीब दोगुना हो गया

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अभिषेक कुमार   
Last Updated- June 12, 2026 | 10:23 PM IST

पिछले तीन सालों में वैल्यू में हुई बढ़ोतरी ने ऐक्टिव और पैसिव निवेशकों के लिए बहुत अलग-अलग नतीजे दिए हैं। जहां वैल्यू ओरिएंटेड सूचकांकों ने सालाना करीब 30 फीसदी का रिटर्न दिया, वहीं ऐक्टिव वैल्यू फंडों ने उनसे लगभग आधा ही रिटर्न दिया। इससे जाहिर होता है कि वैल्यू के मौके पहचानने और उनसे फायदा उठाने में ये दोनों तरीके कितने अलग हैं।

जून 2026 में समाप्त तीन वर्षों में निफ्टी 200 वैल्यू 30 इंडेक्स ने 29.7% का सालाना चक्रवृद्धि के हिसाब से रिटर्न दिया। निफ्टी 500 वैल्यू 50 इंडेक्स ने 28.9% का रिटर्न दिया। इनकी तुलना में ऐक्टिव वैल्यू फंडों ने औसतन 15.8% का सालाना रिटर्न दिया। बाजार के जानकारों का मानना ​​है कि पैसिव रणनीति के बेहतर प्रदर्शन की वजह पीएसयू, एनर्जी, मेटल्स और दूसरे साइक्लिकल शेयरों में उनका ज्यादा निवेश था, जिनका इस दौरान वैल्यू ट्रेड पर दबदबा रहा।

पिछले एक साल में यह अंतर और भी साफ दिखा। जहां ज्यादातर ऐक्टिव वैल्यू फंडों ने ऋणात्मक रिटर्न दिया, वहीं निफ्टी 200 वैल्यू 30 और निफ्टी 500 वैल्यू 50 इंडेक्स में क्रमशः 14.6% और 13.9% की बढ़त हुई। लेकिन एक साल की अवधि में ऐक्टिव वैल्यू फंडों ने अपने व्यापक बेंचमार्क निफ्टी 500 इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया।

विशेषज्ञों के मुताबिक ऐक्टिव और पैसिव वैल्यू स्ट्रैटजी की सीधी तुलना भ्रामक हो सकती है क्योंकि दोनों के पोर्टफोलियो बनाने के तरीके में काफी अंतर होता है। जूलियस बेयर इंडिया में वेल्थ मैनेजमेंट सॉल्यूशंस के प्रमुख अश्विन पाटनी ने कहा, पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि ऐक्टिव वैल्यू फंडों को वैल्यू इंडेक्स जैसा ही रिटर्न देना चाहिए, लेकिन यह कहना कुछ ज्यादा ही आसान होगा। वैल्यू इंडेक्स आमतौर पर नियमों पर आधारित तरीके अपनाते हैं और मुख्य रूप से कम मूल्यांकन जैसे क्वांटिटेटिव पैमाने के आधार पर शेयर चुनते हैं। इसके उलट ऐक्टिव मैनेजर प्रबंधन की गुणवत्ता, कमाई की संभावना और बैलेंस शीट की मजबूती जैसे पहलुओं का भी आकलन करते हैं। पाटनी ने कहा कि इस कारण ऐक्टिव पोर्टफोलियो वैल्यू इंडेक्स से काफी अलग हो सकते हैं।

आनंद राठी वेल्थ में म्युचुअल फंड्स की प्रमुख श्वेता रजनी ने कहा, हाल का बाजार का चक्र पैसिव वैल्यू रणनीति के लिए खास तौर पर फायदेमंद रहा है। रिटर्न में यह फर्क मुख्य रूप से निवेश की शैली और पोर्टफोलियो बनाने के तरीके में अंतर की वजह से है।

उन्होंने कहा, निफ्टी 200 वैल्यू 30 इंडेक्स का लगभग आधा हिस्सा पीएसयू और एनर्जी से जुड़े सेक्टरों जैसे ऑयल ऐंड गैस, मेटल्स और पावर में लगा है। ये सेक्टर हाल के वर्षों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सेगमेंट में से रहे हैं। पोर्टफोलियो का संकेंद्रण और बाजार पूंजीकरण के हिसाब से निवेश में अंतर की वजह से भी प्रदर्शन में यह फर्क आया है।

क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पीयूष गुप्ता ने कहा, पैसिव वैल्यू इंडेक्स और उनसे जुड़े फंडों में आम तौर पर 30-50 शेयर होते हैं, जबकि ऐक्टिव वैल्यू फंडों में ऐतिहासिक रूप से ज्यादा विविधिकरण होता है और इनमें औसतन 60 शेयर शामिल होते हैं। पैसिव वैल्यू फंडों में लार्ज-कैप शेयरों पर ज्यादा जोर रहता है जबकि स्मॉल-कैप में कम निवेश होता है। ऐक्टिव वैल्यू फंडों में आम तौर पर स्मॉल-कैप में ज्यादा निवेश किया जाता है, जिसका असर उनके सापेक्षिक रिटर्न पर पड़ सकता है।

वेल्दी डॉट इन के सह-संस्थापक आदित्य अग्रवाल ने कहा, कई अन्य कारक भी प्रदर्शन में अंतर ला सकते हैं। उन्होंने कहा, ऐक्टिव वैल्यू फंड केंद्रित निवेश बनाए रख सकते हैं, रणनीतिक रूप से सेक्टर का चयन कर सकते हैं या नकदी रख सकते हैं, ये सभी कारक विविध वैल्यू इंडेक्स से महत्त्वपूर्ण विचलन पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा, कई ऐक्टिव मैनेजर वैल्यू इन्वेस्टिंग को ग्रोथ-ओरिएंटेड अवसरों के साथ जोड़ते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे पोर्टफोलियो बनते हैं, जो शुद्ध वैल्यू बेंचमार्क से काफी अलग हो सकते हैं। बाजार चक्र भी मायने रखते हैं, क्योंकि कुछ चरण डीप-वैल्यू शेयरों के पक्ष में होते हैं जबकि अन्य उचित मूल्यांकन पर उपलब्ध गुणवत्ता या वृद्धि वाले कारोबारों से फायदा देते हैं।

First Published : June 12, 2026 | 10:23 PM IST