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फ्रंट-रनिंग केस में केतन पारेख को झटका! SAT ने Capital Group के ट्रेडर्स से पूछताछ की मांग की खारिज

फ्रंट-रनिंग मामले में SAT ने केतन पारेख की Capital Group के दो ट्रेडर्स से जिरह की मांग खारिज कर दी, जबकि सेबी का अंतिम आदेश अभी बाकी है।

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खुशबू तिवारी   
Last Updated- August 24, 2026 | 1:56 PM IST

Ketan Parekh News: सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने शेयर बाजार में कथित फ्रंट-रनिंग मामले में केतन पारेख की अपील खारिज कर दी है। पारेख ने बाजार नियामक सेबी (SEBI) के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें Capital Group के दो ट्रेडर्स से जिरह करने की अनुमति नहीं दी गई थी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला जनवरी 2025 में सेबी की ओर से जारी अंतरिम आदेश से जुड़ा है। सेबी ने कथित फ्रंट-रनिंग के आरोप में केतन पारेख और सिंगापुर के ट्रेडर रोहित सालगांवकर को शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया था।

सेबी का आरोप था कि दोनों ने अमेरिका स्थित एक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) के आगामी ट्रेड्स की जानकारी का इस्तेमाल कर मुनाफा कमाया। यह FPI दुनियाभर में करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करने वाले Capital Group से जुड़ा है।

सेबी ने कथित अवैध कमाई के तौर पर करीब 65.77 करोड़ रुपये की रकम वापस लेने का भी निर्देश दिया था। हालांकि, जनवरी 2025 का आदेश अंतरिम था और मामले में सेबी का अंतिम आदेश अभी आना बाकी है।

SAT ने क्यों खारिज की अपील?

SAT ने कहा कि जब किसी मामले में सुनवाई पूरी होकर फैसला सुरक्षित रखा जा चुका हो, तो अपीलकर्ता के पास अंतिम आदेश को चुनौती देने का अधिकार रहता है। ऐसे में इस चरण पर दो ट्रेडर्स से जिरह की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर पारेख को लगता है कि सेबी ने ऐसी किसी सामग्री का इस्तेमाल किया है, जिसे कार्यवाही के दौरान उनके सामने नहीं रखा गया था, तो वह सेबी के अंतिम आदेश को चुनौती देते समय इस आधार को उठा सकते हैं।

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सेबी ने जिरह की मांग का विरोध क्यों किया?

सेबी ने पारेख की मांग को खारिज करते हुए कहा था कि दोनों ट्रेडर्स के बयानों का इस्तेमाल पारेख के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष निकालने के लिए नहीं किया गया। ट्रेडर्स ने यह भी कहा था कि वे पारेख को नहीं जानते थे। इसके अलावा, जनवरी 2025 के सेबी आदेश में दोनों ट्रेडर्स के नाम भी नहीं थे।

कैसे सामने आया फ्रंट-रनिंग का आरोप?

सेबी के अनुसार, दोनों ट्रेडर्स का संपर्क रोहित सालगांवकर से था और सालगांवकर की बातचीत केतन पारेख से होती थी। आरोप है कि सालगांवकर को FPI के आने वाले ट्रेड्स की जानकारी मिलती थी, जिसे वह पारेख तक पहुंचाता था।

इसके बाद पारेख ने कथित तौर पर कोलकाता में अपने कई सहयोगियों के जरिए संबंधित शेयरों में पहले से पोजीशन बनाई। इस तरह FPI के ट्रेड से पहले शेयरों में खरीद-बिक्री कर कथित तौर पर फायदा उठाया गया।

केतन पारेख इससे पहले भी शेयर बाजार से जुड़े मामले में कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। साल 2000 के चर्चित शेयर बाजार घोटाले में उनकी भूमिका के कारण उन्हें पहले 14 साल के लिए बाजार से प्रतिबंधित किया गया था। सेबी ने अपने जनवरी 2025 के आदेश में आरोप लगाया था कि इस बार उन्होंने नियामकीय निगरानी से बाहर रहकर फ्रंट-रनिंग करने का एक नया तरीका अपनाया।

First Published : August 24, 2026 | 1:56 PM IST