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बॉन्ड मार्केट में हड़कंप: रुपये की कमजोरी और अमेरिकी यील्ड ने बिगाड़ा विदेशी निवेशकों का मूड

वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशकों ने मार्च में 13,000 करोड़ से अधिक की सरकारी प्रतिभूतियां बेचकर ऋण बाजार से हाथ खींच लिए हैं

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- March 22, 2026 | 9:18 PM IST

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का मार्च 2026 में पूर्णतः सुलभ मार्ग (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश ऋणात्मक हो गया। एफपीआई के निवेश की प्रवृत्ति वैश्विक जोखिम भावना में कमजोरी से पलट गई है। 

क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएल) के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने मार्च में अब तक 13,027 करोड़ रुपये मूल्य की एफएआर प्रतिभूतियों की शुद्ध बिक्री की है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि यह उलटफेर मुख्य रूप से वैश्विक जोखिम लेने की प्रवृत्ति में गिरावट के कारण हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया। इससे आयातित महंगाई और भारत के चालू खाता घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये पर भी दबाव डाला। इससे विदेशी निवेशकों के लिए रिटर्न कम हो गया। 

निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने बताया, ‘विदेशी निवेश संकेतक (एफपीआई) के दृष्टिकोण से शेयर बाजार स्पष्ट रूप से नकारात्मक क्षेत्र में हैं। यहां तक ​​कि ऋण बाजार में भी रुपये की कथित कमजोरी बाजार के रुझान पर असर डाल रही है। परिणामस्वरूप बॉन्ड फिलहाल विदेशी निवेशकों के लिए विशेष रूप से आकर्षक नहीं हैं।’  

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि ने उभरते बाजारों के ऋणों को कम आकर्षक बना दिया। इससे वैश्विक पूंजी भारत जैसे बाजारों से दूर स्थानांतरित हो गई। कारोबारियों ने कहा कि मुद्रा अस्थिरता के साथ-साथ उच्च वैश्विक यील्ड ने एफएआर बॉन्ड पर हेज्ड रिटर्न के आकर्षण को कम कर दिया।

First Published : March 22, 2026 | 9:18 PM IST