केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज कहा कि वैश्विक स्तर पर जुड़े बाजार में चीनी की कीमतें मांग और आपूर्ति के हिसाब से तय होती है, सरकारों की इसमें कोई भूमिका नहीं है। नैशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में राज्यों के मंत्रियों और उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों द्वारा चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि की मांग के जवाब में गडकरी ने यह कहा। उत्पादन की कमी के कारण घरेलू बाजार में चीनी के दाम 70 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के कुछ हफ्तों बाद गड़करी का यह बयान आया है।
मंत्री ने कहा, ‘हम अब वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं। ऐसी अर्थव्यवस्था में कोई भी सरकार कृषि उपज की दरें चाहकर भी तय नहीं कर सकती। चीनी की दरें ब्राजील में तय होती हैं, अमेरिका मक्के की दरें तय करता है, मलेशिया पाम तेल की कीमतें तय करता है। जो लोग अभी विपक्ष में हैं, वे किसानों के लिए ऐसी दरों की मांग करते हैं, और सत्ता में आने पर वे ऐसा नहीं बोल पाते। बोलना आसान है। कीमतें तय करने और उन्हें लागू करने में व्यावहारिक कठिनाइयां हैं।’
मांग व आपूर्ति के मुताबिक दरें तय होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘ब्राजील में एकल कृषि भूमि का 2,000 से 3,000 एकड़ का होता है। उनके पास ज्यादा जमीन है और मशीन की मदद से खेती होती है। चीनी उत्पादन की उनकी लागत 23 रुपये प्रति किलोग्राम है, हमारी उत्पादन लागत कम से कम 33-34 रुपये प्रति किलोग्राम है। यदि ब्राजील के पास अतिरिक्त चीनी है, तो भारत में दरें गिर जाती हैं।’
उन्होंने कहा, ‘मैं ऐसे क्षेत्र से आता हूं जहां हमने 10,000 किसानों की आत्महत्याएं देखी हैं। मैं 15-20 वर्षों से इस मुद्दे पर काम कर रहा हूं। मैं कह सकता हूं इस समस्या का मूल कारण यह है कि हमारी कृषि आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है।’
उन्होंने कहा कि केवल चीनी पर निर्भर रहना अव्यावहारिक है, चीनी उत्पादकों को पुआल और बायोमॉस से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने और जैविक खाद जैसे सह उत्पादों पर ध्यान देने की जरूरत है।
उल्लेखनीय है कि इंडियन शुगर ऐंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के साथ मिलकर एनएफसीएसएफ कोयंबटूर में एक ‘ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर एक्सेलरेटेड शुगर ब्रीडिंग’स्थापित करने पर काम कर रहा है। इसका मकसद गन्ने की खेती के लिए नई किस्में विकसित करना है।
