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भारत का कमोडिटी में बढ़ रह दबदबा! ग्लोबल इंटीग्रेशन की जरूरत; ईयरबुक भी हुई लॉन्च

Global Commodity Conclave: कमोडिटी के बड़े प्रोड्यूसर और कंज्यूमर के तौर पर भारत की बढ़ती भूमिका इस बात पर जोर देती है कि घरेलू कमोडिटी बाजार और मजबूत हों, प्राइस-रिस्क मैनेजमेंट के तरीके बेहतर हों और ग्लोबल मार्केट के साथ…

Tuhin Kanta Pandey, Chairman, SEBI

सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय

Last Updated: अगस्त 13, 2026 | 4:35 PM IST

Global Commodity Conclave: कमोडिटी के बड़े प्रोड्यूसर और कंज्यूमर के तौर पर भारत की बढ़ती भूमिका इस बात पर जोर देती है कि घरेलू कमोडिटी बाजार और मजबूत हों, प्राइस-रिस्क मैनेजमेंट के तरीके बेहतर हों और ग्लोबल मार्केट के साथ बेहतर तालमेल हो। बाजार प्रतिभागियों ने मुंबई में आयोजित ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव (GCC) 2026 में यह बात कही। इसके अलावा इस कॉन्क्लेव के पहले दिन ‘कमोडिटी इनसाइट्स ईयरबुक 2026’ भी जारी की गई।

सेबी चेयरमैन ने सम्मेलन का उद्घाटन किया

इस तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन बुधवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने किया। इस कार्यक्रम में इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) के चेयरमैन के. राजारमन, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) के चेयरमैन हर्ष कुमार भानवाला और देश-विदेश की कई कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

भारत का कमोडिटी बाजार ₹50 लाख करोड़ का

ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव (GCC) में अपने शुरूआती संबोधन में MCX की एमडी और सीईओ प्रवीणा राय ने कहा कि, “कमोडिटी के बड़े उत्पादक और उपभोक्ता के रूप में भारत की अहमियत बढ़ रही है। ऐसे में देश को मजबूत घरेलू बाजारों, बेहतर प्राइस-रिस्क मैनेजमेंट तथा ग्लोबल बाजार के साथ और करीबी तालमेल की जरूरत है।”

प्रवीणा राय ने बताया कि, उत्पादन और आयात के मामले में भारत का कमोडिटी बाजार करीब 50 लाख करोड़ रुपये (लगभग 600 अरब डॉलर) का है। इसके बावजूद, देश का मार्केट-टू-जीडीपी रेशियो महज 3.1 फीसदी है, जो विकसित बाजारों से काफी कम है।

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कमोडिटी बाजार में हेजिंग की बढ़ती जरूरत

स्टील, एल्युमिनियम, कोयला और कपास के बड़े उत्पादक होने के साथ-साथ सोना और कच्चे तेल के प्रमुख उपभोक्ता के रूप में वैश्विक स्तर पर भारत का दबदबा बढ़ रहा है। इससे भारतीय बाजार पर ग्लोबल कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है। हालांकि, यही स्थिति देश में जोखिम प्रबंधन के लिए मजबूत घरेलू तंत्र विकसित करने के बड़े अवसर भी पैदा करती है।

प्रवीणा राय ने आगे कहा, “इसलिए यह अवसर दोनों ही लिहाज से फायदेमंद है। इससे एक तरफ कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलती है, तो वहीं दूसरी तरफ इन बाजारों में निवेश और भागीदारी का मौका भी मिलता है।”

कमोडिटी इनसाइट्स ईयरबुक 2026 लॉन्च

इसी व्यापक संदर्भ में ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव के पहले दिन ‘कमोडिटी इनसाइट्स ईयरबुक 2026’ भी जारी की गई। ईयरबुक का केंद्रीय तर्क है कि भारत के कमोडिटी बाजार की सबसे बड़ी कमी बाजार के आकार में नहीं, बल्कि कीमत तय करने की क्षमता में है। इसका विषय ‘भारत में कीमत निर्धारण: आर्थिक विकास और बाजार के विस्तार के केंद्र में’ रखा गया है।

ईयरबुक में अर्थशास्त्रियों, बाजार विशेषज्ञों, उद्योग जगत के दिग्गजों और विभिन्न संस्थानों के विषय विशेषज्ञों के विचार शामिल किए गए हैं। इसमें कुल 13 लेख हैं, जिनमें सोना, स्टील, बेस मेटल, मेटल रीसाइक्लिंग, ऊर्जा और कृषि जिंसों में बेंचमार्क तय होने तथा कीमत निर्धारण की प्रक्रिया में हो रहे बदलावों का विश्लेषण किया गया है। इसके अलावा, इसमें विस्तृत सांख्यिकीय आंकड़े भी दिए गए हैं।

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कमोडिटी बाजार के ग्लोबल इंटीग्रेशन पर जोर

‘फिजिकल और फाइनेंशियल मार्केट का मिलन’ (Convergence of Physical and Financial Markets) थीम वाले इस सम्मेलन का फोकस घरेलू स्तर पर कीमत तय करने की प्रक्रिया को मजबूत करने और भारतीय कमोडिटी मार्केट को ग्लोबल मार्केट के साथ और करीब से जोड़ने पर होगा।

तीन दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में भारतीय कमोडिटी बेंचमार्क, कीमत तय होने की प्रक्रिया, करेंसी रिस्क मैनेजमेंट और रुपया हेजिंग जैसे विषयों पर चर्चा होगी। CME और LME जैसे इंटरनेशनल एक्सचेंज के साथ-साथ भारतीय एक्सचेंज, रेगुलेटर, इंडस्ट्री बॉडी, प्रोड्यूसर और कंज्यूमर की भागीदारी का मकसद ग्लोबल जुड़ाव को और मजबूत करना है।

राय ने कहा, “ग्लोबल इंटीग्रेशन (वैश्विक एकीकरण) इस कॉन्क्लेव का मुख्य संदेश है।”

MCX के सहयोग से आयोजित यह कॉन्क्लेव 14 अगस्त तक चलेगा। इसमें बुलियन, बेस मेटल्स, एनर्जी, एग्रीकल्चरल कमोडिटीज, कोयला और कैपिटल मार्केट्स पर खास सेशन होंगे। टेक्नोलॉजी, रिटेल भागीदारी और क्लाइमेट रिस्क पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम का समापन तीसरे दिन एक खास रिटेल सेगमेंट और समापन भाषण के साथ होगा।

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