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चीन के सस्ते AI मॉडल बने अमेरिका के लिए खतरा! जेफरीज की वॉर्निंग, निवेशक हो जाएं सतर्क?

Jefferies के क्रिस्टोफर वुड ने AI पर बढ़ते कर्ज, महंगे वैल्यूएशन और चीन की बढ़ती बढ़त को लेकर चेतावनी दी है। जानिए क्यों AI शेयरों पर बढ़ रहा है दबाव

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- July 28, 2026 | 3:54 PM IST

सस्ते चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल अमेरिकी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट की वजह बन सकते हैं। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस्टोफर वुड ने अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट GREED & Fear में यह चेतावनी दी है। उनका कहना है कि AI पर भारी निवेश करने वाली अमेरिकी कंपनियों को भविष्य में निवेश पर मिलने वाले रिटर्न (ROI) को लेकर बाजार सवाल उठाना शुरू कर सकता है।

वुड का मानना है कि फिलहाल AI थीम में निवेश का सबसे अच्छा तरीका उन कंपनियों पर दांव लगाना है, जो AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर बनाने या उनसे जुड़ी सेवाएं देने का काम कर रही हैं। यानी AI मॉडल बनाने वाली कंपनियों के बजाय उन कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जो इस पूरे इकोसिस्टम से सीधे फायदा उठा रही हैं।

AI निवेश पर बढ़ रही है चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक अब निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि AI पर कंपनियां जितना पैसा खर्च कर रही हैं, उससे उन्हें उतनी कमाई होगी या नहीं। वुड ने कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि जून में OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों की कमाई की रफ्तार धीमी हुई या नहीं। उनका मानना है कि अब कई कंपनियां कर्मचारियों को बिना जरूरत AI टूल इस्तेमाल करने के लिए पहले जैसी छूट नहीं दे रही हैं, क्योंकि इससे लागत बढ़ रही है।

दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार 11% टूटा

AI से जुड़ी कंपनियों को लेकर बढ़ती चिंता का असर दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। मंगलवार को कोस्पी इंडेक्स कारोबार के दौरान करीब 11% तक टूट गया। भारी गिरावट के कारण कुछ समय के लिए ट्रेडिंग भी रोकनी पड़ी।

दिन के अंत में इंडेक्स 10.8% गिरकर 6,023.66 पर बंद हुआ। इस दौरान Samsung Electronics का शेयर 13.4% और SK Hynix का शेयर 14.7% टूट गया।

AI शेयरों में तेजी बहुत जल्दी आ गई

Valentis Advisors के संस्थापक और MD ज्योतिवर्धन जयपुरिया का कहना है कि AI से जुड़ी कंपनियों के शेयर बहुत कम समय में काफी तेजी से चढ़ गए हैं। अब निवेशक यह सोचने लगे हैं कि कंपनियां AI पर जो भारी पूंजी खर्च कर रही हैं, उससे उन्हें कितना फायदा मिलेगा।

उनका कहना है कि शेयरों में तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली होना स्वाभाविक है। साथ ही AI कंपनियों के बढ़ते पूंजीगत खर्च को लेकर भी निवेशक सतर्क हो गए हैं।

चीनी AI मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं

क्रिस्टोफर वुड के मुताबिक चीनी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि 19 जुलाई को समाप्त सप्ताह में OpenRouter प्लेटफॉर्म पर चीन के प्रमुख AI मॉडल ने 36.39 ट्रिलियन टोकन प्रोसेस किए। अप्रैल के आखिर में यह आंकड़ा 4.37 ट्रिलियन टोकन था।

इसके मुकाबले इसी अवधि में अमेरिका के प्रमुख AI मॉडल ने 7.39 ट्रिलियन टोकन ही प्रोसेस किए। वुड का कहना है कि इससे साफ है कि AI के क्षेत्र में चीन अब अमेरिका का मजबूत प्रतिस्पर्धी बन चुका है।

बाजार ने अभी इस जोखिम को नहीं समझा

वुड का मानना है कि बाजार ने अभी तक इस बदलाव का पूरा असर शेयर कीमतों में नहीं दिखाया है। उनके मुताबिक AI को लेकर बढ़ते उत्साह के बीच क्रेडिट जोखिम भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में अमेरिकी हाइपरस्केलर कंपनियों ने AI पर निवेश के लिए अपनी नकदी से ज्यादा कर्ज का सहारा लिया है। इस साल अब तक इन कंपनियों ने 194 अरब डॉलर का इन्वेस्टमेंट-ग्रेड कर्ज जुटाया है, जबकि अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र ने केवल 55 अरब डॉलर का कर्ज लिया है।

अमेरिकी बाजार पर नजर रखने की सलाह

क्रिस्टोफर वुड का मानना है कि दुनिया के कुल शेयर बाजार पूंजीकरण में अमेरिकी बाजार की हिस्सेदारी शायद अपने हाई पर पहुंच चुकी है। ऐसे में आने वाले समय में AI पर भारी निवेश करने वाली बड़ी टेक कंपनियों के प्रदर्शन पर निवेशकों को खास नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही आगे बाजार की दिशा तय कर सकती हैं।

First Published : July 28, 2026 | 2:45 PM IST