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UPI में बड़ा बदलाव संभव: NPCI एआई-आधारित A2A वर्कफ्लो से तेज करेगा अनुपालन प्रक्रिया

एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि यह मामला अभी शुरुआती दौर में है लेकिन एनपीसीआई संभवत: बैंकों और प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाताओं से संपर्क कर सकती है

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अजिंक्या कवाले   
Last Updated- May 05, 2026 | 11:04 PM IST

भारत की तत्काल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) में तेजी से अपडेट आ रहे हैं। ऐसे में नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) अनुपालन चक्रों को रफ्तार देने के लिए एजेंट-टु-एजेंट (ए2ए) वर्कफ्लो की संभावनाएं तलाश रही है। इस मामले से अवगत सूत्रों ने यह जानकारी दी।

ए2ए वर्कफ्लो आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) एजेंटों की एक शुरुआती झलक दिखा सकते हैं जिसमें रिटेल पेमेंट्स की शीर्ष संस्था के एजेंट भारत के शीर्ष बैंकों के एजेंटों के साथ बातचीत करेंगे ताकि यूपीआई प्रणाली में नए बदलाव आने के साथ ही अनुपालन की प्रक्रिया को तेज किया जा सके। फिलहाल बैंकों को एनपीसीआई द्वारा समय-समय पर जारी किए गए यूपीआई के परिचालन प्रपत्र के साथ प्रमाणन के लिए चार से आठ सप्ताह का समय लगता है।

एनपीसीआई एक ऐसे परिवेश की परिकल्पना कर रही है जहां इस अवधि को घटाकर एक सप्ताह या दस दिन किया जा सके। मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘यूपीआई जैसा उत्पाद काफी डायनेमिक है और उसमें कुछ स्वचालन की आवश्यकता है।’

एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि यह मामला अभी शुरुआती दौर में है लेकिन एनपीसीआई संभवत: बैंकों और प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाताओं से संपर्क कर सकती है। उन्होंने कहा कि इसका ठोस फायदा करीब एक साल में दिखने की उम्मीद है।

एक व्यक्ति ने कहा, ‘एजेंट किसी समस्या के समाधान के लिए लगातार नजर रखेंगे। एंड पॉइंट का पता चलने के बाद एजेंट उस ओर काम करने में सक्षम होते हैं। प्रमाणन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब बैंक और एनपीसीआई एक-दूसरे के साथ संवाद कर रहे हों तो सबकुछ ठीक से काम करे।’

इस संबंध में जानकारी के लिए एनपीसीआई को भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया।

यूपीआई से संबंधित परिचालन प्रपत्र एनपीसीआई द्वारा बैंकों और फिनटेक कंपनियों सहित तमाम प्रतिभागियों को जारी किए गए नीतिगत एवं तकनीकी निर्देश हैं। ये परिपत्र नियमित तौर पर जारी किए जाते हैं और इनका उद्देश्य भुगतान प्रणाली के एकसमान रखरखाव को सुनिश्चित करना है जिसका दायरा बैंकों के अलावा फोनपे, गूगल पे, पेटीएम जैसे तीसरे पक्ष के ऐप्लिकेशन प्रदाताओं (टीपीएपी) तक फैला हुआ है।

यूपीआई जैसी विकसित हो रही प्रणालियों के लिए अनुपालन में तेजी लाने पर ध्यान ऐसे समय में दिया जा रहा है जब प्रणाली हर साल कई नए उपयोग मामलों के लॉन्च के साथ कई पुनरावृत्तियों से गुजरती है। उदाहरण के लिए, केवल वित्त वर्ष 2025-26 में ही एनपीसीआई ने प्रणाली के प्रतिभागियों के बीच अनुपालन के लिए 30 से अधिक यूपीआई संबंधी परिचालन प्रपत्र जारी किए। उम्मीद है कि एक ए2ए वर्कफ्लो उनके लिए तकनीकी और अनुपालन बैंडविड्थ को आसान बनाएगा।

भले ही एनपीसीआई एआई एजेंटों के जरिये दक्षता को बढ़ावा देने की तरफ बढ़ रही है लेकिन वह बैंक के परिवेश में अपने एजेंटों को तैनात नहीं करेगी। 

बैंकों को संभवतः खुद के एजेंट बनाने होंगे। इसके बदले दोनों तरफ के एजेंट सुरक्षित प्रोटोकॉल पर संवाद करेंगे। ऐसा कहा गया है कि अंतिम प्राधिकरण, परीक्षण और प्रमाणन के लिए लूप में एक इंसान रहेगा।

एक सूत्र ने बताया, ‘इस स्तर पर यह एक प्रयास है। भविष्य में अधिकांश बातचीत एजेंटिक फ्लो में चली जाएगी। दोनों एजेंट अलग-अलग संदर्भ एवं माहौल में काम करते हैं और उन्हें एक-दूसरे के साथ संवाद करने में सक्षम होना चाहिए।’

दूसरे व्यक्ति ने कहा, ‘एनपीसीआई के पास परिचालन प्रपत्र के प्रमाणन के संबंध में विभिन्न निर्भरताओं की एक सूची है। ए2ए संचार के साथ इन मुद्दों को निपटाया जा सकता है।’

कंपनी के ब्लॉग के अनुसार, गूगल का ए2ए एक ओपन प्रोटोकॉल है जो एजेंटों को एक-दूसरे के साथ सहयोग करने का एक मानक तरीका प्रदान करता है।

यह अपने उपयोगकर्ताओं को रियल टाइम फीडबैक, सूचनाएं और अपडेट प्रदान करने में सक्षम है। एनपीसीआई ऐसे ओपन प्रोटोकॉल के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश सकती है या कस्टम प्रोटोकॉल विकसित कर सकती है। गूगल का कहना है कि ए2ए दो एजेंटों के बीच बातचीत की सुविधा प्रदान करता है।

इस साल के आरंभ में एनपीसीआई ने भारतीय भुगतान परिवेश के लिए एक विशेष डोमेन भाषा मॉडल एफआईएमआई (फाइनैंस मॉडल फॉर इंडिया) को लॉन्च किया था। इसे यूपीआई सहित भारतीय भुगतान प्रणालियों की जटिलताओं को देसी तरीके से समझने, लेनदेन विवादों को संभालने, भुगतान के प्रबंधन एवं अन्य कार्यों के लिए तैयार किया गया है।

First Published : May 5, 2026 | 10:54 PM IST