भारत

रक्षा निर्यात के नियमों में बड़ा बदलाव, सरकान ने SOP आसान की; OGEL ढांचे का किया विस्तार

रक्षा मंत्रालय ने निर्यात नियमों को सरल बनाते हुए OGEL की वैधता तीन साल की और प्रक्रियाओं को आसान बनाकर रक्षा निर्माताओं के लिए विदेशी बाजार खोला

Published by
मार्तंड मिश्रा   
Last Updated- August 28, 2026 | 9:48 PM IST

रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को भारत की रक्षा निर्यात मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को सरल बना दिया। साथ ही प्रक्रियात्मक देरी को कम करने और रक्षा निर्माताओं को विदेशी बाजारों तक तेजी से पहुंचने में सक्षम बनाने के लिए ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) ढांचे का विस्तार भी किया गया है।

रक्षा उत्पादन विभाग (डीपीपी) द्वारा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में किए गए इन सुधारों से अधिकांश देशों के लिए गैर-घातक रक्षा वस्तुओं के निर्यात के लिए हितधारक परामर्श को हटा दिया गया है, जबकि संवेदनशील देशों के लिए सुरक्षा उपाय बनाए रखे गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय निविदाओं और प्रदर्शनियों के लिए सभी वस्तुओं के निर्यात पर परामर्श को भी हटा दिया गया है, जिससे कंपनियां विदेशी अवसरों पर अधिक तेजी से आगे बढ़ सकेंगी। इन बदलावों का मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए भारतीय रक्षा कंपनियों को विदेशी बाजार तक तेजी से पहुंचने और वैश्विक व्यावसायिक अवसरों पर अधिक तेज़ी से प्रतिक्रिया करने में मदद करना है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘सुधार भारत के रक्षा निर्यात व्यवस्था को एक अधिक व्यापक और सुविधा-आधारित प्रणाली की ओर ले जाते हैं।’ इसमें कहा गया है कि संवेदनशील वस्तुओं, प्रौद्योगिकियों और गंतव्यों के लिए सुरक्षा उपाय जारी रहेंगे।

प्रमुख सुधार

ओजीईएल का विस्तार सबसे बड़ा बदलाव है। इसमें एक बार ही निर्यात के लिए अधिकृत कर दिया जाता है, जिससे पात्र निर्यातक अपने आप अधिकृत हो जाते हैं और चिह्नित की गई रक्षा वस्तुओं के लिए उन्हें बार बार अनुमति नहीं लेनी पड़ती है।  सरकार ने मौजूदा तीन ओजीईएल एसओपी को एकीकृत करके एक ढांचे में शामिल कर दिया है, जिसमें ज्यादातर प्लेटफॉर्म और उपकरण, पार्ट्स और कंपोनेंट और कंपनी के भीतर तकनीक हस्तांतरण आते हैं।

वैधता को भी 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है, जबकि पात्र देशों का कवरेज 41 देशों से बढ़ाकर सभी देशों तक कर दिया गया है, जिसमें संवेदनशील देशों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित देशों व हथियारों पर प्रतिबंध का सामना करने वाले देशों को ही बाहर रखा गया है।

पुणे स्थित स्मार्ट और स्वायत्त गोला-बारूद निर्माण फर्म जीउस न्यूमेरिक्स के सह-संस्थापक अभिषेक जैन ने कहा, ‘घोषणा से दो बड़े लाभ हैं, खासकर नवोन्मेषी एमएसएमई के लिए। पहला, जो हमने बनाया है उसे प्रदर्शित करने के लिए स्वतंत्र हैं। दूसरा, हम एक लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं और दुनिया को अपना बाजार बना सकते हैं। इसका मतलब है कि हम नवाचार पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जबकि सरकार कागजी कार्रवाई का खयाल रखेगी।’

पिछली प्रक्रिया

ओजीईएल से पहले, रक्षा निर्यात के लिए आमतौर पर व्यक्तिगत निर्यात प्रक्रियाओं के लिए अलग सरकारी मंजूरियों की आवश्यकता होती थी, जिससे बार-बार शिपमेंट और नियमित निर्यात धीमे हो जाते थे। निर्यातकों की मांगों के बाद सरकार ने 2019 में रक्षा निर्यात को आसान बनाने के लिए ओजीईएल की शुरुआत की थी। इसे एक-बार के लाइसेंस के रूप में डिजाइन किया गया था, जो एक कंपनी को लाइसेंस अवधि के दौरान निर्दिष्ट देशों में निर्दिष्ट वस्तुओं का निर्यात करने की अनुमति देता है और हर शिपमेंट के लिए अनुमति मांगने की जरूरत नहीं होती है।

First Published : August 28, 2026 | 9:41 PM IST