प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने अगस्त में एक और नया रिकॉर्ड बनाया। महीने के दौरान UPI पर लेनदेन की संख्या बढ़कर 24.51 अरब पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ओर से मंगलवार को साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इन लेनदेन का कुल मूल्य 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा।
अगस्त में UPI लेनदेन की संख्या जुलाई के मुकाबले 3.6 फीसदी बढ़ी, जबकि लेनदेन का कुल मूल्य 0.2 फीसदी घट गया। अगस्त लगातार दूसरा महीना रहा, जब UPI लेनदेन की संख्या ने रिकॉर्ड बनाया। जुलाई में UPI पर 23.66 अरब लेनदेन हुए थे, जिनका कुल मूल्य 29.88 लाख करोड़ रुपये था। वहीं, मूल्य के लिहाज से UPI लेनदेन का सबसे ऊंचा स्तर मई में दर्ज किया गया था। मई में 23.2 अरब लेनदेन के जरिए कुल 29.9 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था।
अगस्त में UPI लेनदेन की संख्या पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 22 फीसदी बढ़ी। वहीं, लेनदेन के कुल मूल्य में 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अगस्त में UPI पर रोजाना होने वाले लेनदेन की औसत संख्या बढ़कर 79.1 करोड़ हो गई, जो जुलाई में 76.3 करोड़ थी। मूल्य के लिहाज से अगस्त में रोजाना औसतन 96,205 करोड़ रुपये के लेनदेन हुए, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 96,383 करोड़ रुपये था।
फिनटेक कंपनी कीवी के को-फाउंडर और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) सिद्धार्थ मेहता ने कहा, “UPI की लगातार बढ़ती स्वीकार्यता यह दिखाती है कि आज उपभोक्ता भुगतान करने और अपने पैसों को मैनेज करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। UPI पर अब रोजाना औसतन 79.1 करोड़ लेनदेन हो रहे हैं। हमारा मानना है कि UPI के विकास के अगले चरण में केवल लेनदेन की संख्या बढ़ना ही महत्वपूर्ण नहीं होगा, बल्कि यह भी अहम होगा कि उपभोक्ताओं के लिए इससे किस तरह के व्यापक वित्तीय अनुभव संभव होते हैं।”
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इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) के जरिए होने वाले लेनदेन में अगस्त में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। अगस्त में IMPS लेनदेन की संख्या घटकर 36 करोड़ रह गई, जबकि जुलाई में यह 36.4 करोड़ थी। मूल्य के लिहाज से भी IMPS लेनदेन 1 फीसदी घटकर 7.04 लाख करोड़ रुपये रह गया। जून में IMPS के जरिए 35.4 करोड़ लेनदेन हुए थे, जिनका कुल मूल्य 6.77 लाख करोड़ रुपये था।
अगस्त में IMPS लेनदेन की संख्या पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 25 फीसदी कम रही। हालांकि, इस दौरान लेनदेन के कुल मूल्य में 18 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
रोजाना होने वाले IMPS लेनदेन की संख्या जुलाई में 1.175 करोड़ से घटकर अगस्त में 1.161 करोड़ रह गई। इसके साथ ही, रोजाना लेनदेन का कुल मूल्य जुलाई में 22,958 करोड़ रुपये से घटकर अगस्त में 22,701 करोड़ रुपये रह गया।
अगस्त में FASTag लेनदेन की संख्या 1.2 फीसदी बढ़कर 35.1 करोड़ हो गई। वहीं, लेनदेन का कुल मूल्य जुलाई के 7,143 करोड़ रुपये से बढ़कर अगस्त में 7,185 करोड़ रुपये हो गया। रोजाना FASTag लेनदेन की संख्या जुलाई में 1.121 करोड़ से बढ़कर अगस्त में 1.132 करोड़ हो गई। वहीं, रोजाना लेनदेन का मूल्य 230 करोड़ रुपये से बढ़कर 232 करोड़ रुपये हो गया।
पे-नियरबाय के फाउंडर एमडी और सीईओ आनंद कुमार बजाज ने कहा, “विकास के अगले चरण में यह देखा जाएगा कि देश भर में रोजमर्रा के लेन-देन में डिजिटल पेमेंट कितनी गहराई और समावेशी तरीके से शामिल होते हैं। इस विकास को सच में समावेशी बनाने के लिए, डिजिटल पेमेंट को स्मार्टफोन इकोसिस्टम से बाहर के ग्राहकों तक भी पहुंचाना जरूरी है। असिस्टेड पेमेंट इस अंतर को कम करने और डिजिटल लेन-देन को अंतिम छोर तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।”
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अगस्त में आधार-इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के जरिए होने वाले लेनदेन की संख्या 4 फीसदी बढ़कर 10.4 करोड़ हो गई, जबकि जुलाई में यह 10 करोड़ थी। हालांकि, लेनदेन का कुल मूल्य 5 फीसदी घटकर 26,035 करोड़ रुपये रह गया, जो जुलाई में 27,539 करोड़ रुपये था। अगस्त 2025 के मुकाबले AePS लेनदेन की संख्या और कुल मूल्य, दोनों में 19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रोजाना AePS लेनदेन की संख्या 32.4 लाख से बढ़कर 33.5 लाख हो गई। वहीं, रोजाना लेनदेन का कुल मूल्य 888 करोड़ रुपये से घटकर 840 करोड़ रुपये रह गया।
एनपीएसटी के को-फाउंडर और सीईओ दीपक चंद ठाकुर ने कहा, “अगस्त में UPI लेनदेन का आंकड़ा 24.51 अरब पर पहुंचना और अब तक का सबसे ऊंचा स्तर दर्ज करना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण बदलाव को दिखाता है। डिजिटल पेमेंट अब भारत के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुका है। चाहे किराना की खरीदारी हो, ऑटो का किराया हो या आसपास का कोई दुकानदार, जो पहले पूरी तरह नकद लेनदेन पर निर्भर था, अब डिजिटल भुगतान अपना रहा है। लेनदेन की संख्या बढ़ने के साथ औसत लेनदेन राशि का कम होना बताता है कि UPI की यह वृद्धि स्वाभाविक है और बड़े पैमाने पर हो रही है। यह सिर्फ कुछ चुनिंदा इलाकों या वर्गों तक सीमित नहीं है।”