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आय बढ़ी तो बीमा कवर भी बढ़ाएं? जानें टर्म प्लान अपडेट करना कब हो जाता है जरूरी

होम लोन, बच्चों की पढ़ाई और बढ़ते घरेलू खर्च जैसी जिम्मेदारियां सैलरी बढ़ने के बाद बढ़ सकती हैं। ऐसे में पर्याप्त बीमा कवर जरूरी हो जाता है

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अमित कुमार   
Last Updated- July 23, 2026 | 2:26 PM IST

Term insurance cover review: सैलरी बढ़ना हर किसी के लिए अच्छी खबर होती है, लेकिन इसके साथ आर्थिक जिम्मेदारियां भी बढ़ने लगती हैं। बढ़ी हुई आय के साथ परिवार की जरूरतें, खर्च और भविष्य की योजनाएं भी बदल सकती हैं। ऐसे में यह जांचना जरूरी हो जाता है कि आपका मौजूदा टर्म इंश्योरेंस कवर आपकी नई वित्तीय स्थिति के हिसाब से पर्याप्त है या नहीं।

फाइनेंशियल एडवाइजर्स का कहना है कि जीवन बीमा कवर को आय, कर्ज और परिवार के लंबे समय के लक्ष्यों में होने वाले बदलाव के हिसाब से समय समय पर जांचते रहना चाहिए। इसे कई सालों तक बिना रिव्यू किए एक जैसा नहीं रखना चाहिए।

कई लोग कई साल पहले खरीदे गए टर्म इंश्योरेंस कवर को ही जारी रखते हैं और यह नहीं देखते कि वह उनकी मौजूदा जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त है या नहीं। लेकिन समय के साथ आय बढ़ने पर जीवन स्तर, आर्थिक जिम्मेदारियां और परिवार की आप पर निर्भरता भी बढ़ सकती है।

आय बढ़ी तो क्या आपका बीमा कवर भी बढ़ना चाहिए?

टर्म इंश्योरेंस का मुख्य मकसद पॉलिसीधारक की मृत्यु की स्थिति में उसके परिवार और आश्रित लोगों को आर्थिक सुरक्षा देना होता है। जैसे जैसे आय बढ़ती है, परिवार की जरूरतें और उस आय की भरपाई करने की जरूरत भी बढ़ सकती है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति सालाना 8 लाख रुपये कमाता है और उसने उस समय अपनी जरूरत के हिसाब से बीमा कवर लिया था, तो वह पर्याप्त लग सकता है। लेकिन कुछ साल बाद अगर उसकी आय दोगुनी हो जाती है, साथ ही उसने होम लोन ले लिया है और बच्चों की पढ़ाई की योजना बना रहा है, तो पुराना बीमा कवर कम पड़ सकता है।

बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सालाना आय के 10 से 15 गुना बीमा लेने के सामान्य नियम पर हमेशा निर्भर नहीं रहना चाहिए। जब भी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आए, तब जीवन बीमा कवर की समीक्षा करनी चाहिए।

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सैलरी हाइक के बाद नई जरूरतें

सैलरी बढ़ने के साथ अक्सर नई आर्थिक जिम्मेदारियां भी जुड़ जाती हैं। इनमें घर खरीदना, होम लोन लेना, बच्चों की पढ़ाई की योजना बनाना, बुजुर्ग माता-पिता की आर्थिक मदद करना, लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण बढ़ने वाले घरेलू खर्च और भविष्य के बड़े वित्तीय लक्ष्य शामिल हो सकते हैं।

इन बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण परिवार को ज्यादा पैसों की जरूरत पड़ सकती है, खासकर उस स्थिति में जब परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य न रहे।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति पर होम लोन बाकी है, तो उसकी किस्त चुकानी होगी। वहीं, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च भी परिवार की आय रुकने के बाद जारी रहेंगे।

लाइफस्टाइल में बदलाव का बीमा कवर पर क्या असर पड़ता है?

वित्तीय विशेषज्ञ अक्सर लाइफस्टाइल इंफ्लेशन की बात करते हैं। इसका मतलब है कि आय बढ़ने के साथ खर्च भी बढ़ने लगते हैं। ज्यादा सैलरी मिलने के बाद कोई व्यक्ति बड़ा घर ले सकता है, बच्चों की स्कूल फीस बढ़ सकती है, माता-पिता की स्वास्थ्य जरूरतों पर ज्यादा खर्च हो सकता है, घरेलू सहायक रखा जा सकता है या भविष्य के लक्ष्यों के लिए ज्यादा बचत शुरू की जा सकती है।

ये बदलाव जीवन को बेहतर बनाते हैं, लेकिन इसके साथ परिवार की मासिक जरूरतें भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए ज्यादा जीवन बीमा कवर की जरूरत पड़ सकती है।

सही टर्म इंश्योरेंस कवर कैसे तय करें?

सही बीमा कवर का अनुमान लगाने के लिए इनकम रिप्लेसमेंट तरीका अपनाया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि अगर पॉलिसीधारक की आय बंद हो जाए, तो परिवार को कितने साल तक उस आय की जरूरत होगी।

इसके अलावा कई ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस कैलकुलेटर भी बीमा जरूरत का अनुमान लगाने में मदद करते हैं। इनमें मौजूदा सालाना आय, पहले से मौजूद जीवन बीमा कवर, बकाया लोन, परिवार पर निर्भर लोगों की संख्या, मौजूदा निवेश और बचत तथा पॉलिसी की अवधि जैसी जानकारी को ध्यान में रखा जाता है।

हालांकि, ये कैलकुलेटर कोई अंतिम फैसला नहीं देते, लेकिन यह समझने में मदद करते हैं कि मौजूदा बीमा कवर पर्याप्त है या नहीं।

क्या निवेश से बीमा कवर की जरूरत बदल सकती है?

आय बढ़ने के साथ अक्सर निवेश भी बढ़ने लगता है। इसमें म्यूचुअल फंड, प्रोविडेंट फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे निवेश शामिल हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति के पास बड़ा निवेश फंड है, तो परिवार को आर्थिक सहायता देने में ये संपत्तियां मदद कर सकती हैं। इससे अतिरिक्त बीमा कवर की जरूरत कुछ कम हो सकती है।

हालांकि,वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि निवेश, कर्ज और बीमा को अलग अलग नहीं, बल्कि एक साथ ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि मौजूदा संपत्तियों और भविष्य की जिम्मेदारियों को देखते हुए परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं।

क्या बढ़ी आय से बड़ा बीमा कवर लेना आसान होता है?

सैलरी बढ़ने से सिर्फ बीमा की जरूरत ही नहीं बढ़ती, बल्कि ज्यादा कवर लेना आसान भी हो सकता है। कई लोग करियर की शुरुआत में ज्यादा बीमा कवर नहीं ले पाते, क्योंकि उसका प्रीमियम उनके बजट पर बोझ डाल सकता है। लेकिन आय बढ़ने के बाद ज्यादा बीमा राशि वाला कवर लेना या अतिरिक्त पॉलिसी खरीदना आसान हो सकता है।

टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम उम्र, स्वास्थ्य, लाइफस्टाइल, पॉलिसी अवधि और बीमा राशि जैसी चीजों पर निर्भर करता है। इसलिए समय रहते बीमा जरूरतों का रिव्यू करना फायदेमंद हो सकता है।

कब टर्म इंश्योरेंस प्लान का रिव्यू करना चाहिए?

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, कुछ बड़े बदलावों के बाद टर्म इंश्योरेंस का रिव्यू करना चाहिए। इनमें शामिल हैं:

  • सैलरी बढ़ोतरी या प्रमोशन
  • शादी
  • बच्चे का जन्म या गोद लेना
  • बड़ा होम लोन या एजुकेशन लोन लेना
  • जीवनसाथी का नौकरी छोड़ना
  • माता-पिता का आर्थिक रूप से आप पर निर्भर होना
  • निवेश में बड़ा इजाफा होना

इन बदलावों के बाद यह जांचना जरूरी है कि आपका मौजूदा टर्म इंश्योरेंस कवर परिवार की मौजूदा और भविष्य की जरूरतों के लिए पर्याप्त है या नहीं।

First Published : July 23, 2026 | 2:26 PM IST