वित्त-बीमा

1 अगस्त से फिलहाल नहीं बदलेंगे ई-वे बिल के नियम, GSTN ने जारी की नई एडवाइजरी

अब करदाताओं को फिलहाल अपनी ERP प्रणाली या कारोबारी प्रक्रियाओं में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी

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मोनिका यादव   
Last Updated- July 30, 2026 | 12:28 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (GSTN) ने ई-वे बिल (e-way bill) सिस्टम में प्रस्तावित बदलावों को अगले आदेश तक के लिए टाल दिया है। ये बदलाव 1 अगस्त से लागू होने वाले थे। इंडस्ट्री की ओर से टे​क्निकल सिस्टम और कारोबारी प्रक्रियाओं की तैयारियों को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद यह फैसला लिया गया है।

ई-वे बिल GST व्यवस्था के अंतर्गत निर्धारित मूल्य से ज्यादा के सामान की आवाजाही के लिए तैयार किया जाने वाला एक इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज है।

बुधवार को जारी एक एडवाइजरी में GSTN ने कहा कि करदाताओं को पहले जारी की गई एडवाइजरी के आधार पर अपनी प्रणालियों में फिलहाल कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। आगे की सूचना मिलने तक मौजूदा व्यवस्था ही लागू रहेगी।

GSTN ने रखा था बदलावों का प्रस्ताव

GSTN ने 9 जून और 17 जून को जारी एडवाइजरी के जरिए कई बदलावों का प्रस्ताव रखा था। इनमें बिल-टू/शिप-टू (Bill-to/Ship-to) लेनदेन में शिप-टू GSTIN दर्ज करना अनिवार्य करना शामिल था। यह नियम उन मामलों पर लागू होना था, जहां चालान एक व्यक्ति के नाम पर जारी किया जाता है, लेकिन सामान किसी अन्य व्यक्ति को भेजा जाता है।

इसके अलावा, GSTN ने सामान की डिलीवरी के बाद ई-वे बिल को स्वेच्छा से बंद करने की सुविधा देने का भी प्रस्ताव रखा था। इन बदलावों से जुड़े विस्तृत अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) 2 जुलाई को जारी किए गए थे। GSTN ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से जुड़ी सभी एडवाइजरी और FAQ भी GST पोर्टल से हटा दिए जाएंगे।

इंडस्ट्री को तैयारी का समय मिलेगा: PwC इंडिया

PwC इंडिया के पार्टनर प्रशांत अग्रवाल ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे कारोबारों को जरूरी तैयारियां पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलावों के लिए कंपनियों को अपने एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) सिस्टम, ग्राहक डेटाबेस और कारोबारी प्रक्रियाओं में बदलाव करने होंगे। इन बदलावों को लागू करने और उनकी जांच के लिए पर्याप्त समय चाहिए। GSTN का यह फैसला उद्योग की चिंताओं पर विचार करने की उसकी इच्छा को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि आगे चलकर बिल-टू/शिप-टू लेनदेन से जुड़े कुछ वैलिडेशन, खासकर उन मामलों में जहां बिलिंग और डिलीवरी दोनों स्थानों का GSTIN एक ही हो, उन पर इंडस्ट्री से व्यापक चर्चा के बाद दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, तीन से छह महीने का ट्रांजिशन पीरियड इन बदलावों को सुचारु रूप से लागू करने में मदद करेगा।

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अनिवार्य हो सकती है ई-वे बिल क्लोजर सुविधा

ई-वे बिल को स्वेच्छा से बंद करने की प्रस्तावित सुविधा पर अग्रवाल ने कहा कि यह सरकार की उस लॉन्ग टर्म सोच को दर्शाता है, जिसके तहत सामान की वास्तविक डिलीवरी से जुड़ा डेटा एकत्र किया जाना है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को इस अतिरिक्त समय का उपयोग अपनी प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने में करना चाहिए, क्योंकि भविष्य में यह व्यवस्था अनिवार्य भी की जा सकती है।

इंडस्ट्री ने मांगा था अतिरिक्त समय

इंडस्ट्री ने इन बदलावों को लागू करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी। उनका कहना था कि कंपनियों को अपने ERP सिस्टम में बदलाव, ग्राहक डेटाबेस को अपडेट करने और व्यापक स्तर पर परीक्षण करने की जरूरत होगी। इंडस्ट्री ने शिप-टू GSTIN से जुड़ी जानकारी जुटाने, व्यावसायिक गोपनीयता और प्रस्तावित वैलिडेशन के कारण अनुपालन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर भी चिंता जताई थी।

First Published : July 30, 2026 | 12:28 PM IST