अर्थव्यवस्था

अब घर-गाड़ी नहीं, अनुभवों पर खर्च करेगी नई पीढ़ी! रिपोर्ट में सामने आया बड़ा बदलाव

सीबीआरई की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय परिवार अब वस्तुओं से ज्यादा अनुभवों पर खर्च करेंगे। होटल और ट्रैवल सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है

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अनीका चटर्जी   
Last Updated- June 23, 2026 | 8:03 AM IST

रियल एस्टेट सलाहकार फर्म सीबीआरई द्वारा किए गए शोध के अनुसार आने वाले पांच वर्षों में भारतीय परिवार भौतिक वस्तुओं की तुलना में अनुभव पर होने वाले खर्च को तेज गति से बढ़ाएंगे। ऑक्सफर्ड इकनॉमिक्स के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2025 से 2030 के बीच भौतिक वस्तुओं पर खर्च 9.1 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ेगा, जबकि इसी अवधि में अनुभवों पर खर्च 10.3 प्रतिशत की अधिक दर से बढ़ने की उम्मीद है।

सीबीआरई की रिपोर्ट ‘जेन जी चेक इन: द राइज ऑफ द लाइफस्टाइल होटल’ में दिए गए ये निष्कर्ष उपभोक्ता प्राथमिकताओं में अनुभव आधारित उपभोग की ओर हो रहे बदलाव को दर्शाते हैं। इन अनुभव आधारित श्रेणियों में होटल आवास पर होने वाला खर्च सबसे तेज वृद्धि दर्ज करने का अनुमान है, जो 2030 तक 10.6 प्रतिशत सीएजीआर की दर से बढ़ सकता है।

सीबीआरई के चेयरमैन एवं सीईओ (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका ) अंशुमन मैगजीन ने कहा कि आज के समय में उपभोक्ता सिर्फ होटल में ठहरने के लिए कमरा नहीं लेते, बल्कि वे ऐसी जगहें पसंद कर रहे हैं जो उन्हें अनोखा अनुभव दें, स्थानीय संस्कृति से जोड़ें और जिन्हें वे सोशल मीडिया पर साझा कर सकें। रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी के बाद यह बदलाव और तेज हुआ है। 2022 के बाद से लोगों में यात्रा, बाहर खाने, मनोरंजन और अन्य अनुभवों पर खर्च बढ़ा है क्योंकि लंबे समय तक पाबंदियों के बाद लोग अब अपनी छूटी हुई गतिविधियों की भरपाई कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रवृत्ति मुख्य रूप से जेन जी द्वारा संचालित हो रही है, जो वर्तमान में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे बड़ी जनसांख्यिकीय श्रेणी है। 1997 से 2012 के बीच जन्मी यह पीढ़ी अब कार्यबल में प्रवेश कर रही है और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही है। जिससे उनका खर्च तेजी से बढ़ रहा है। यह वृद्धि किसी भी अन्य जीवित पीढ़ी की तुलना में अधिक रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट के अनुसार जेन जी यात्री अब ऐसे स्थानों को प्राथमिकता देते हैं जो दृश्य रूप से अलग और आकर्षक हों तथा जो केवल ठहरने की जगह न होकर एक संपूर्ण अनुभव प्रदान करें और सोशल मीडिया के लिए भी उपयुक्त बैकग्राउंड बन सकें। वे मानक आतिथ्य के बजाय व्यक्तिगत सेवाओं को अधिक महत्व देते हैं और ऐसे साझा स्थान पसंद करते हैं, जहां वाइन टेस्टिंग, लाइव एकॉस्टिक परफॉर्मेंस (जहां कोई कलाकार सामने रहकर अपनी कला का प्रदर्शन करता हो)और स्थानीय सांस्कृतिक आयोजनों जैसे अनुभवात्मक कार्यक्रम आयोजित हों।

इसके साथ ही अब लोग वेलनेस (स्वास्थ्य, मानसिक शांति और फिटनेस) को अपनी बुनियादी जरूरत मानने लगे हैं। निर्बाध तकनीक (सीमलेस टेक्नॉलजी) को वे एक बुनियादी जरूरत के रूप में देखते हैं। मैगजीन ने कहा कि अनुभव आधारित उपभोग की ओर यह बदलाव एक दीर्घकालिक आर्थिक प्रवृत्ति बन चुका है। इसकी वजह से संपत्ति मालिकों और संस्थागत निवेशकों के लिए लाइफस्टाइल होटल सेगमेंट एक आकर्षक अवसर के रूप में उभर रहा है।

इस सेगमेंट में मानक होटलों की तुलना में प्रति उपलब्ध कमरे अधिक राजस्व और औसत दैनिक दर प्राप्त हो रही है। साथ ही यह मॉडल अपेक्षाकृत पूंजी-प्रभावी है क्योंकि मौजूदा संपत्तियों के रूपांतरण के माध्यम से इसे विकसित किया जा सकता है।

सीबीआरई की एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अनुसंधान प्रमुख अदा चोई ने कहा कि अनुभव आधारित अर्थव्यवस्था कोई ट्रेंड नहीं बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आतिथ्य क्षेत्र इस यात्रा के एक रोमांचक चरण में है। विशेष रूप से भारत में बढ़ती आय, परिपक्व होता जेन जी उपभोक्ता वर्ग और लाइफस्टाइल आतिथ्य उत्पादों की गंभीर कमी मिलकर इस क्षेत्र को निवेश के लिए सबसे आकर्षक बाजारों में से एक बना रही है।

सीबीआरई के अनुसार लाइफस्टाइल होटल नामक एक नई संपत्ति श्रेणी इस पीढ़ीगत मांग के जवाब के रूप में उभरी है। ये होटल न तो पूरी तरह बुटीक होटल हैं और न ही बड़े वैश्विक चेन होटल, बल्कि दोनों के बीच की एक श्रेणी में आते हैं। इनमें स्वतंत्र होटलों जैसा डिजाइन और स्थानीय पहचान होती है। लेकिन साथ ही संस्थागत ब्रांडों की तरह संचालन क्षमता, वितरण नेटवर्क और लॉयल्टी प्रोग्राम का लाभ भी मिलता है। भारत में लाइफस्टाइल होटलों की पैठ अभी भी सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग जैसे बाजारों की तुलना में कम है। 2015 से 2025 के बीच एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कुल होटल में औसतन 5 प्रतिशत की सीएजीआर से वृद्धि हुई।

वहीं इसी अवधि में लाइफस्टाइल होटलों की आपूर्ति 19 प्रतिशत की तेज सीएजीआर से बढ़ी। यह रफ्तार आगे भी जारी रहने की उम्मीद है और 2030 तक लाइफस्टाइल होटल आपूर्ति के 10 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि समग्र होटल बाजार की वृद्धि इससे कम रहने की संभावना है।

इसके अलावा सीबीआरई ने रिपोर्ट कहा गया है कि डेवलपर अब नई परियोजनाएं शुरू करने की बजाय मौजूदा संपत्तियों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं क्योंकि भूमि की कीमतों और निर्माण लागतों में लगातार वृद्धि हो रही है। भारत में बड़ी संख्या में मौजूद पुराने, स्वतंत्र और बिना ब्रांड वाले होटल अब लाइफस्टाइल संपत्ति के रूप में बदले और पुनर्स्थापित किए जा रहे हैं, जो अक्सर नई निर्माण लागत की तुलना में काफी कम खर्च में संभव होता है।

First Published : June 23, 2026 | 8:03 AM IST