सरकार को उम्मीद है कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 31 अक्टूबर तक चार श्रम संहिताओं के तहत नियम जारी कर देंगे। केंद्र सरकार नया श्रम कानून ढांचा लागू करने की कोशिशें तेज कर रही है। श्रम सचिव चंद्र भूषण कुमार ने आज यह जानकारी दी।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री और ग्रांट थॉर्नटन भारत की ओर से नई श्रम संहिताओं पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कुमार ने कहा कि 10 राज्य पहले ही अपने नियम जारी कर चुके हैं, जबकि बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सलाह-मशविरे के लिए अपने मसौदा नियम जारी किए हैं।
श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन पर ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट लॉन्च करते हुए कुमार ने कहा, ‘मैंने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ व्यक्तिगत रूप से बैठक की है और हमें उम्मीद है कि 31 अक्टूबर तक हमारे पास राज्य स्तर पर नियम होंगे। इसलिए यह एक बहुत बड़ी, बहुत ही बड़ी कवायद होने वाली है क्योंकि ऐसे ज्यादातर मामलों में जहां हमारे उद्योग और व्यापार करते हैं, वहां संबंधित सरकार राज्य सरकार ही होती है।’
29 केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह लेने वाली ये चार श्रम सहिताएं नवंबर 2025 में लागू हुईं। इनमें वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और काम की जगह पर सुरक्षा व कामकाज की स्थितियों से जुड़े प्रावधानों को एक साथ लाया गया है। केंद्र सरकार ने मई 2026 में इन संहिताओं के तहत नियम अधिसूचित किए, लेकिन इनका क्रियान्वयन राज्यों द्वारा अपने नियम बनाने पर भी निर्भर करता है। इसकी वजह यह है कि श्रम समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है। चूंकि कई प्रावधानों को असल में लागू करने के लिए राज्य-स्तर पर नियम बनाने की जरूरत होती है, इसलिए नए ढांचे को पूरी तरह से चालू करने की दिशा में राज्यों द्वारा नियम बनाना एक अहम कदम बन गया है।
ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नए ढांचे से नियोक्ताओं के लिए अनुपालन की आवश्यकताओं में काफी कमी आई है। नियमों की संख्या 1,436 से घटकर 351 रह गई।
