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NBFC सेक्टर में बड़ा बदलाव, अचानक बढ़ सकता है टॉप कंपनियों का दबदबा

अगर भारतीय रिजर्व बैंक के स्केल बेस्ड रेगुलेटरी (एसबीआर) फ्रेमवर्क के प्रस्तावित बदलाव को लागू किया जाता है तो ऊपरी परत की गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की संपत्तियां, कुल परिसंपत्तियों का लगभग 70 प्रतिशत हो सकती हैं, जो अभी…

Lending from banks to NBFCs slowed down, service and vehicle loans also affected बैंकों से एनबीएफसी को ऋण हुआ सुस्त, सेवा और वाहन ऋण पर भी असर

Lending from banks to NBFCs slowed down, service and vehicle loans also affected

Last Updated: अप्रैल 17, 2026 | 8:26 AM IST

अगर भारतीय रिजर्व बैंक के स्केल बेस्ड रेगुलेटरी (एसबीआर) फ्रेमवर्क के प्रस्तावित बदलाव को लागू किया जाता है तो ऊपरी परत की गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की संपत्तियां, कुल परिसंपत्तियों का लगभग 70 प्रतिशत हो सकती हैं, जो अभी 30 प्रतिशत हैं।

प्रस्तावित संशोधन से सरकार समर्थित एनबीएफसी को शामिल किए जाने से ऊपरी परत की एनबीएफसी की संख्या मौजूदा 15 से बढ़कर 19 हो सकती है। रिजर्व बैंक ने एसबीआर फ्रेमवर्क में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसमे ऊपरी परत के एनबीएफसी की पहचान के लिए एक सरलीकृत और स्वामित्व-तटस्थ दृष्टिकोण का प्रस्ताव है। परिसंपत्ति के आकार और एक पैरामीट्रिक स्कोरिंग मॉडल के वर्तमान दो-आयामी पद्धति की जगह 1 लाख करोड़ रुपये की एकल परिसंपत्ति आकार सीमा पेश की गई है।

मसौदे में सरकारी स्वामित्व वाले एनबीएफसी को भी ऊपरी परत श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव है। मसौदा दिशानिर्देशों के मुताबिक ऊपरी परत की एनबीएफसी की पहचान के लिए परिसंपत्ति के आकार की सीमा की समीक्षा हर 5 साल में की जाएगी। राज्य सरकार की गारंटी द्वारा समर्थित एक्सपोजर पर 20 प्रतिशत का जोखिम भार जारी रहेगा, ऐसे एक्सपोजर किसी भी सीमा के बिना राज्य सरकार को हस्तांतरित हो जाएंगे।

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