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व्यक्तिगत गारंटर मामलों की रिपोर्टिंग के लिए IBBI ने बढ़ाई समयसीमा, मिला 3 महीने का अतिरिक्त समय

आईबीबीआई ने व्यक्तिगत गारंटरों के दिवाला समाधान मामलों में ई-फॉर्म रिपोर्टिंग की समय-सीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी है। इससे संकल्प पेशेवरों को तकनीकी चुनौतियों को दूर करने और सटीक डेटा देने का अतिरिक्त समय मिलेगा

IDBI Bank

प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

Last Updated: सितंबर 25, 2026 | 10:06 PM IST

भारतीय दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने ऋण समाधान पेशेवरों को व्यक्तिगत गारंटीकर्ताओं के दिवालियापन के मामलों की रिपोर्ट करने के लिए दिसंबर के अंत तक 3 और महीने का समय दिया है। यह समय सीमा पेशेवरों द्वारा अनुपालन के लिए और समय मांगे जाने के बाद दूसरी बार बढ़ाई गई है।

आईबीबीआई ने अपने 24 सितंबर के सर्कुलर में कहा है कि हितधारकों को हो रही व्यावहारिक कठिनाइयों और आवश्यक संक्रमणकालीन समय के कारण व्यक्तिगत गारंटर के दिवाला समाधान कार्यवाही से संबंधित फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाई गई है।

आईबीबीआई ने मार्च में कंपनियों के व्यक्तिगत गारंटरों के ऋण समाधान की निगरानी के लिए अपने ई-प्लेटफॉर्म पर इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म दाखिल करना अनिवार्य किया था। नियामक ने पहले ही 30 सितंबर, 2026 तक तीन महीने के लिए समय-सीमा बढ़ा दी थी।  इसके पहले समाधान पेशेवर ईमेल के माध्यम से बोर्ड को दिवाला समाधान प्रक्रिया के बारे में आवधिक जानकारी देते थे। इसमें वक्त लगता था और प्रक्रिया अप्रभावी मानी जाती थी। 

आईबीबीआई ने बेहतर निगरानी और प्रक्रिया की सटीकता के लिए प्रवेश, पुनर्भुगतान योजना, कार्यान्वयन और त्रैमासिक रिपोर्टिंग तक फैले चरणों को कवर करने वाले छह फॉर्म पेश किए थे। 

उद्योग के विशेषज्ञों ने कहा कि फॉर्म जमा करने के लिए अतिरिक्त समय पेशेवरों को परिचालन या तकनीकी चुनौतियों का समाधान करने, अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और यह सुनिश्चित करने की अनुमति देगा कि प्रस्तुत जानकारी पूर्ण और सटीक हो।

इन फॉर्मों को देर से दाखिल करने या संशोधित करने पर दंड अब 31 दिसंबर, 2026 के बाद ही लगाया जाएगा। एक अलग आदेश में आईबीबीआई ने परिसमापन में अनुपालन अनुशासन को मजबूत करने के लिए परिसमापन फॉर्म दाखिल करने में देरी के लिए शुल्क शुरू किया है। आईबीबीआई ने कहा कि 30 सितंबर, 2026 या उससे पहले जमा किए जाने वाले फॉर्मों के लिए, देरी से दाखिल होने की अवधि के लिए प्रति माह 500 रुपये का शुल्क, साथ में लागू जीएसटी भी देना होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि आईबीबीआई समय पर अनुपालन लागू कर रहा है। 

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