प्रतीकात्मक तस्वीर
भारत के नौ बुनियादी क्षेत्रों की वृद्धि पांच माह के उच्च स्तर पर पहुंच गई। वाणिज्य मंत्रालय के सोमवार को जारी आंकड़े के अनुसार 2022-23 के नए आधार वर्ष वाले संशोधित ‘बुनियादी उद्योग सूचकांक’ (आईसीआई) के पहले आंकड़ों में भारत के नौ बुनियादी क्षेत्रों की वृद्धि जून में पांच माह के उच्च स्तर पांच प्रतिशत पर पहुंच गई जबकि यह मई में 3.2 प्रतिशत थी। इसमें लौह अयस्क, बिजली और कोयले में तेज वृद्धि ने पेट्रोलियम-आधारित उद्योग में लगातार बनी हुई सुस्ती की भरपाई कर दी।
इस रीडिंग के साथ एक नई श्रृंखला की शुरुआत हुई है, जो 2011-12 की पुरानी श्रृंखला की जगह लेगी। इसमें लौह अयस्क को शामिल करके क्षेत्रों की संख्या आठ से बढ़ाकर नौ कर दी गई है। नए आधार के तहत वृद्धि दर में पुरानी श्रृंखला के मुकाबले सुधार दिखा है। मई की रीडिंग नई श्रृंखला में 0.5 प्रतिशत से बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गई। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘इसमें लौह अयस्क की वजह से तेजी आई है।’ जून में कुल सूचकांक गिरकर 119.6 रहा जबकि पिछले महीने 120.1 था।
नौ क्षेत्रों वाले सूचकांक में लौह अयस्क का भाराशं 4.9 प्रतिशत है। लौह अयस्क में जून में 43.9 प्रतिशत की भारी वृद्धि (पिछले साल के कम आधार के मुकाबले) हुई। यह समग्र वृद्धि का सबसे बड़ा कारक बनकर उभरा। अप्रैल 2024 की पिछली श्रृंखला की तुलना में इस क्षेत्र में वृद्धि अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।
इस सूचकांक में बिजली का सर्वाधिक भारांश 30.9 प्रतिशत है। बिजली ने सर्वोच्च स्थान पर रहने वाली पेट्रोलियम रिफाइनरी का स्थान हासिल कर लिया है। इसमें जून में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि मई में 11.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह पिछले महीने के मुकाबले थोड़ी धीमी रही। हालांकि फिर भी हेडलाइन नंबर में इसका बड़ा योगदान रहा।
पुन: आधार तय किए जाने से सूचकांक में भारांश काफी हद तक बदल गया है। लिहाजा बिजली की हिस्सेदारी में जबरदस्त उछाल आया। पुरानी श्रृंखला में बिजली की हिस्सेदारी 19.85 प्रतिशत थी और यह नई श्रृंखला में उछलकर 30.9 प्रतिशत हो गई। लिहाजा नई श्रृंखला में बिजली सबसे ज्यादा भारांश वाला क्षेत्र हो गया है। हालांकि पुरानी श्रृंखला में पेट्रोलियम रिफाइनरी का भारांश 28.04 प्रतिशत था और यह नई श्रृंखला में घटकर 22.6 प्रतिशत पर आ गया।
नई श्रृंखला में कोयला, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का भारांश कम हो गया जबकि स्टील और उर्वरक का भारांश लगभग वैसा ही बना हुआ है।
आंकड़ों से पता चला है कि नौ में से पांच क्षेत्रों में इस महीने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। लौह अयस्क, बिजली, सीमेंट, स्टील और कोयला सकारात्मक दायरे में रहे जबकि प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल, रिफाइनरी उत्पादों व उर्वरक में गिरावट आई। सीमेंट का उत्पादन 9.8 प्रतिशत बढ़कर पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। स्टील की वृद्धि 4.6 प्रतिशत रही जो 21 महीने का निचला स्तर है। सबनवीस ने इन दो अहम क्षेत्रों में मज़बूती का कारण निजी क्षेत्र और सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे खर्च को बताया।