प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
केंद्र सरकार ने चारों श्रम संहिताओं के अंतिम नियम शुक्रवार को अधिसूचित कर दिए। औद्योगिक संबंध संहिता 2020, मजदूरी संहिता 2019, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशाएं संहिता 2020 के लिए नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी हो गई। यह अधिसूचना संसद के कानून पारित किए जाने के लगभग छह साल बाद और 30 से अधिक गजट अधिसूचनाओं के माध्यम से जारी की गई है।
मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में मसौदा संस्करण प्रकाशित किया था और हितधारकों से सुझाव मांगे थे। इसके बाद अंतिम नियम पारित किए गए। सरकार ने कहा है कि अंतिम नियम तय करने से पहले मसौदा नियमों पर प्राप्त सुझावों पर विचार हुआ था। मसौदा नियमों के चार महीने से अधिक समय के बाद मसौदा नियम जारी किए गए थे। दरअसल परामर्श करने का समय फरवरी में ही खत्म हो गया था।
अंतिम नियमों में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं जो दिसंबर के मसौदा ढांचे में या तो नहीं थे या कम उल्लेख थे। इन उपबंधों में अनिवार्य नियुक्ति पत्र, 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच, स्पष्ट ओवरटाइम प्रावधान और श्रमिक पुन: कौशल निधि के लिए योगदान शामिल हैं।
केंद्र के अधिसूचित अंतिम नियम दिसंबर 2025 में जारी मसौदा संस्करण से महत्त्वपूर्ण बिंदु हटाए जाने का संकेत देते हैं। दरअसल जहां मसौदा नियमों में न्यूनतम मजदूरी तय करने के मानदंड स्पष्ट रूप से तय किए गए थे। इन मानदंडों में कैलोरी का उपयोग, कपड़े, आवास किराया, ईंधन व्यय और एक मानक श्रमिक वर्ग परिवार की शिक्षा और चिकित्सा आवश्यकताएं शामिल थे। हालांकि अधिसूचित नियमों में इन प्रावधानों को हटा दिया गया है। इस बारे में कहा गया है कि केंद्र सरकार ‘विशेष या सामान्य आदेश’ के माध्यम से अलग से इन मानदंडों का उल्लेख करेगा।
अंतिम नियमों में मजदूरी निर्धारण और कौशल वर्गीकरण के लिए प्रस्तावित तकनीकी समिति पर अलग प्रावधान को भी हटा दिया गया है। इससे केंद्र को मजदूरी-निर्धारण पद्धति तय करने में अधिक विवेकाधिकार प्राप्त हो गया है।
ईवाई इंडिया में पीपल एडवाइजरी सर्विसेज-टैक्स के पार्टनर पुनीत गुप्ता ने कहा कि मजदूरी संहिता, आईआर संहिता और ओश संहिता के तहत केंद्रीय नियम मुख्य रूप से उन प्रतिष्ठानों पर लागू होंगे जहां केंद्र ‘उपयुक्त सरकार’ है।
इनमें दूरसंचार, बैंकिंग और बीमा, खदानें, तेल क्षेत्र, बंदरगाह, हवाई परिवहन और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और उनके ठेकेदार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता के नियम कई राज्यों में संचालित होने वाले प्रतिष्ठानों पर अधिक व्यापक रूप से लागू होंगे।
एकॉर्ड जूरिस के प्रबंध भागीदार अलैय रजवी ने कहा कि अंतिम नियमों ने ‘मजदूरी’ की परिभाषा को स्पष्ट रूप से बहिष्कृत घटकों को सूचीबद्ध करके कड़ा कर दिया है, जो ग्रेच्युटी, भविष्य निधि और ओवरटाइम भुगतान की गणना को प्रभावित करता है।