बायोसिमिलर दवाओं को करेगी लॉन्च

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 9:28 PM IST

पिछले साल तीन दवाओं के बायोसिमिलर वर्जनों को लॉन्च करने के बाद रिलायंस लाइफ साइंसेज ने फिर से अपनी कमर कस ली है।
कंपनी अब अगले साल चार ऐसी ही दवाओं को लॉन्च करने की योजना बना रही है। कैंसर और दिल की बीमारियों की इन दवाओं पर क्लिनिकल रिसर्च इस वक्त चल रहा है।
कंपनी के अध्यक्ष के.वी. सुब्रमण्यम ने बताया कि, ‘हम दवाओं के बायोसिमिलर वर्जनों पर काम कर रहे हैं, जिनकी तरफ हमारे ज्यादातर प्रतिद्वंद्वियों का ध्यान है।’
कंपनी ने पिछले साल रेलिफेरॉन, रेलिपोऑटीन और रेलिग्रास्ट नामक दवाओं को बाजार में उतारा था। इस वक्त कंपनी यूरोप में जीसीएसएफ का इंसानों पर परीक्षण कर रही है। इस दवा का इस्तेमाल कैंसर रोगी किमियोथेरपी के साथ करते हैं। यह शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में इजाफा करती है।
कंपनी इस वक्त एक और जीसीएसएफ दवा को बनाने में जुटी हुई है, जो अगले साल तक बाजार में उतरेगी। ये दोनों दवाएं रिलायंस लाइफ साइंसेज  2007 में ब्रिटिश दवा निर्माता कंपनी जिनीमेडिक्स के अधिग्रहण के साथ मिली थीं।
दुनिया भर में बिना पेटेंट वाली बायोटेक दवाओं का कारोबार तेजी से बढ़ता जा रहा है। बायोसिमिलर दवाओं का अमेरिका और यूरोप में बाजार 2012 तक  16 अरब डॉलर का हो जाएगा। डॉ. रेड्डीज, वॉकहार्ट, इंटास बायोफार्मास्युचिकल्स और बायोकॉन जैसी भारतीय कंपनियां इस वक्त कई बायोसिमिलर दवाओं को बनाने में जुटी हुई हैं।
रिलायंस लाइफ साइंसेज इस वक्त अपनी दवाओं को मुख्य रूप से दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिकी देशों में निर्यात करती है। सुब्रमण्यम ने बताया कि जैसे ही बायोसिमिलर दवाओं को लेकर नियमन प्रणाली बनेगी, कंपनी आगे बढ़ते हुए इन दवाओं को अमेरिका और यूरोप में भी बेचना शुरू कर देगी।
कंपनी ने इससे पहले अपने खुद के बनाए हुए प्लाज्मा प्रोटीन्स को भी बाजार में उतार चुकी है। प्लाज्मा प्रोटीन खून का ऐसा हिस्सा होते हैं, जो खून को जमाने, बीमारियों से लड़ने और दूसरे अहम कामों में मदद करते हैं। सुब्रमण्यम ने बताया कि कंपनी ने दिमाग के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एक दवा को लॉन्च किया था।
बायोसिमिलर के साथ-साथ कंपनी इस वक्त पार्किंसन, रीढ़ की हड्डी की बीमारियों, डाइबेटिक अल्सर, ल्यूकोडे्रमा और दिल की बीमारियों की दवाओं खोजने के लिए स्टेम सेल पर भी रिसर्च कर रही है। वैसे, इन उत्पादों को बाजार में उतरने में अभी तीन से चार साल का वक्त लग जाएगा। कंपनी बीमारियों के होने से पहले ही उनकी चेतावनी देने के बारे में काम कर रही है।

First Published : March 26, 2009 | 5:45 PM IST