फ्रैंकलिन की छह डेट योजनाओं को बंद करने के पक्ष में मतदान

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 9:36 AM IST

फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्युचुअल फंड की छह बंद डेट योजनाओं के निवेशकों ने इन योजनाओं को बंद करने के पक्ष में भारी मतदान किया है। ऑब्जर्वर की रिपोर्ट में खुलसा किया गया है कि इन डेट योजनाओं में से पांच – फ्रैंकलिन इंडिया लो ड्यूरेशन फंड, फ्रैंकलिन इंडिया क्रेडिट रिस्क फंड, फ्रैंकलिन इंडिया शॉर्ट टर्म इनकम प्लान, फ्रैंकलिन इंडिया अल्ट्रा शॉर्ट बॉन्ड फंड और फ्रैंकलिन इंडिया इनकम ऑपर्चयुनिटीज फंड में तकरीबन 97 फीसदी मत इन योजनाओं को बंद करने के पक्ष में डाले गए हैं। डायनेमिक एक्यूरल फंड के मामले में यह आंकड़ा 93 फीसदी रहा।
पिछले महीने हुई छह वीडियो बैठकों में परिसंपत्ति प्रबंधक के शीर्ष प्रबंधन और न्यासी ने निवेशकों को यह आश्वासन दिया था कि अगर इस मतदान प्रक्रिया का परिणाम हां रहता है, तो इससे तेजी से कागजों के मुद्रीकरण और अपने निवेश के मूल्य को संरक्षित किया जा सकेगा, क्योंकि बाजार की स्थितियां बहुत अधिक अनुकूल हो गई हैं।
प्लान रुपी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के संस्थापक अमोल जोशी ने कहा कि समापन हमेशा निवेशकों के हित में था। भारी-भरकम मतों और ऋण बाजार में सुधार का अर्थ यह हो सकता है कि आगे चलकर निवेशकों के लिए बहुत तेजी से सुधार हो। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी परिसमापक की नियुक्ति करने के वास्तेदूसरे मत के लिए तीन से पांच सप्ताह और लग सकते हैं। ऑब्जर्वर की रिपोर्ट पर आपत्तियों की जांच के बाद नकदी के संवितरण के बारे में फैसला करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय 25 जनवरी को फिर से मामले की सुनवाई करेगा।
फ्रैंकलिन टेम्पलटन के प्रवक्ता ने कहा कि हम सभी छह योजनाओं में क्रमबद्ध तरीके से समापन के पक्ष में भारी मतदान करने के लिए अपने यूनिट धारकों के प्रति आभारी हैं। हमें उम्मीद है कि निवेश का संवितरण जल्द से जल्द शुरू किया जाए जो 25 जनवरी, 2021 को निर्धारित अगली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अधीन होगा। परिसंपत्ति प्रबंधक के नवीनतम अपडेट के अनुसार इन छह डेट योजनाओं में 24 अप्रैल, 2020 के बाद से परिपक्वता, पूर्व भुगतान और कूपन भुगतान से 15 जनवरी, 2021 तक समापन किए तक 13,789 करोड़ रुपये का नकदी प्रवाह प्राप्त हुआ था।
15 जनवरी तक उपलब्ध रही नकदी 9,190 करोड़ रुपये थी जो कोष व्यय के अधीन था पांच नकद सकारात्मक योजनाओं के लिए थी। सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर की शुरुआत में एक अंतरिम आदेश जारी किया था जिसमें एफटी म्युचुअल फंड के न्यासियों को सेबी (म्युचुअल फंड) विनियमन 1996 की धारा 18 (15) (सी) के तहत इन छह ऋण योजनाओं के समापन के लिए यूनिट धारकों की सहमति लेने की अनुमति दी गई थी। रिडम्प्शन को अगली अधिसूचना तक निलंबित रखा गया था।
अक्टूबर में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि फ्रैंकलिन टैम्प्लन के न्यासियों द्वारा इन योजनाओं को बंद करने के फैसले को यूनिट धारकों की सहमति के बना लागू नहीं किया जा सकता है, लेकिन सेबी के म्युचुअल फंड के नियम 39-41 वैध और मान्य थे।

First Published : January 18, 2021 | 11:18 PM IST