दुलियाजान-नुमालीगढ़ गैस पाइपलाइन को कॉमन कैरियर घोषित करने के प्रस्ताव पर संबंधित पक्षों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रिया देखी है। इंद्रधनुष गैस ग्रिड (आईजीजीएल) ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) की ओर से लाए गए प्रस्ताव का समर्थन किया है। वहीं नुमालीगढ़ रिफाइनरी (एनआरएल) और गुजरात स्टेट पेट्रोनेट ने इस कदम का विरोध किया है। वहीं इस पाइपलाइन की मालिक कंपनी डीएनपी ने पीएनजीआरबी के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देने के लिए और वक्त मांगा है।
अगर इसे कॉमन कैरियर घोषित कर दिया जाता है तो एक से ज्यादा ग्राहक इस पाइपलाइन का इस्तेमाल कर सकेंगे। 192 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन से दुलियाजान स्थित ऑयल इंडिया की फील्ड से एनआरएल के निजी इस्तेमाल के लिए प्राकृतिक गैस ले जाई जाती है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 346 करोड़ रुपये थी और 28 फरवरी, 2011 को इसे चालू किया गया था। इस समर्पित पाइपलाइन से नुमालीगढ़ रिफाइनरी को ज्यादा सस्ती प्राकृतिक गैस मिल पाती है। इस पाइपलाइन को कॉमन कैरियर घोषित करने के कदम से पाइपलाइन की क्षमता पर असर पड़ सकता है क्योंकि गैस परिवहन के इस सस्ते साधन का इस्तेमाल अन्य इकाइयां भी करना चाहती हैं।
एनआरएल ने कहा, ‘पाइपलाइन की पूरी 1.2 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन (एमएमएससीएमडी) क्षमता की जरूरत एनआरएल को है और अन्य इकाइयों के लिए कोई अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह पाइपलाइन कॉमन कैरियर घोषित किए जाने के लिए सही नहीं है।’
हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनी (एचओईसी) भी पाइपलाइन की उपलब्धता का लाभ उठाने की इच्छुक इकाइयों में से एक है, जिसने आने वाले समय में प्राकृतिक गैस उत्पादन और बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
इंद्रधनुष गैस के मामले में दुलियाजान-नुमालीगढ़ गैस पाइपलाइन अहम है, जो अपनी नॉर्थ-ईस्ट गैस ग्रिड (एनईजीजी) परियोजना को लागू करने की योजना बना रही है।
आईजीजीएल के मुताबिक दुलियाजान नुमालीगढ़ गैस पाइपलाइन उत्तरी असम क्षेत्र में स्थित ऑयल इंडिया के गैस स्रोतों को एनआरएल से जोड़ती है। कंपनी ने कहा, ‘अगर इस पाइपलाइन को कॉमन कैरियर में बदला जाता है तो इससे ऊपरी असम क्षेत्र से एनईजीजी तक गैस लाने में मदद मिलेगी और पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित कहीं के भी आम अंतिम उपभोक्ता को इसकी आपूर्ति की जा सकेगी।’
लेकिन जीएसपीएल ने इसका विरोध किया है। जीएसपीएल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है, ‘जीएसपीएल इस समर्पित पाइपलाइन को प्राकृतिक गैस पाइपलाइन में स्वत: बदलाव का विरोध करती है।’ कंपनी के मुताबिक दुलियाजान नुमालीगढ़ गैस पाइपलाइन खासकर एनआरएल के लिए बिछाई गई है। ऐसे में इसे कॉमन कैरियर में तब्दील करना पीएनजीआरबी ऐक्ट 2006 के खिलाफ है।