नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजूकेशन ऐंड रिसर्च (एनआईपीईआर), मोहाली ने दवा निर्माण में लगे लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) के लिए ‘एसएमई फार्मा सेंटर’ नामक एक विशेष केंद्र लॉन्च किया है।
यह केंद्र दवा निर्माण, उत्पाद स्थिरता और अन्य प्रक्रियाओं में इन लघु इकाइयों की मदद करेगा। यह केंद्र इन इकाइयों की मानव श्रम जरूरतों को भी पूरा करेगा। इस केंद्र से पूरे देश में 5,000 दवा निर्माताओं को फायदा पहुंचने की संभावना है।
औद्योगिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह केंद्र खासकर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में 900 लघु इकाइयों के लिए फायदेमंद साबित होगा। इसका प्रमुख कारण यह है कि ये इकाइयां इस संस्थान से ज्यादा दूर नहीं हैं।
स्मॉल फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री कन्फेडरेशन के महासचिव जगदीप सिंह ने बताया, ‘यह केंद्र एसएमई क्षेत्र की फार्मा इकाइयों के लिए निश्चित रूप से लाभदायक होगा, क्योंकि ये इकाइयां नई प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षित मानव श्रम और अच्छी निर्माण कार्य प्रणालियों तक अपनी पहुंच बना सकेंगी।’
एनआईपीईआर के निदेशक पी. रामा राव ने बताया, ‘एसएमई फार्मा सेंटर पूरी तरह तैयार है और रसायन एवं उर्वरक मंत्री रामविलास पासवान द्वारा 23 फरवरी को इसका उद्धाटन किया जाएगा।
दवा निर्माण में लगे लघु एवं मझोले उद्योगों में प्रशिक्षित मानव श्रम का अभाव महसूस किया जाता रहा है। शुरू में लोगों को मशीनरी और उपकरणों से जुडे क़ार्य के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा जिनका इस्तेमाल इस उद्योग में रोजाना के आधार पर किया जाता है।
इस प्रशिक्षण के जरिये श्रेष्ठ निर्माण कार्य प्रणालियों को निर्धारित किया जाएगा। इसके बाद इन लघु इकाइयों को तकनीकी मदद भी मुहैया कराई जाएगी। केंद्र किसी भी तरह की समस्या के समाधान में सक्षम होगा।’
राव ने कहा कि एनआईपीईआर ये सुविधाएं मुहैया कराने के एवज में मामूली राशि वसूलेगा। लेकिन इस केंद्र के खर्च के एक बड़े हिस्से का वहन केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा। संस्थान विश्लेषण और जांच सेवाएं भी इन उद्यमियों को मुहैया कराएगा।
एनआईपीईआर के केंद्र ये सेवाएं मुहैया कराने की तैयारी कर रहे हैं। कई प्रमुख दवा कंपनियां पहले से ही एनआईपीईआर की प्रौद्योगिकी विकास सुविधा और शोध प्रयोगशालाओं का इस्तेमाल कर लाभान्वित हो रही हैं।