मुंबई से भी पर्यटकों ने मुंह मोड़ा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 2:05 AM IST

जितने ज्यादा स्टार, उतने ही कम ग्राहक। जी हां, चंद महीने पहले आतंक का वार झेल चुकी और अब मंदी की मार से परेशान आर्थिक राजधानी मुंबई में होटलों के सितारे गर्दिश में हैं। सस्ते होटल ही नहीं, नामचीन फोर स्टार और फाइव स्टार होटलों से भी ग्राहक नदारद हैं।
आतंकी हमले के बाद मंदी के हमले से मुंबई में होटलों की बुकिंग काफी कम हो गई है। पिछले दो महीने के दौरान बुकिंग कराने वाले ग्राहक आधे ही रह गए हैं। 

इससे निपटने के लिए होटल कारोबारी कमरों के किराये में भी कमी कर रहे हैं। कुछ होटलों ने किराये 10 फीसदी घटाए हैं और कुछ छोटे होटल तो 50 फीसदी की छूट पर भी कमरे बुक कर रहे हैं।
भारतीय होटल एवं रेस्टोरेंट संघ के अध्यक्ष नारायण अल्वा किराये कम करने की तस्दीक करते हैं। वह कहते हैं कि आधे से ज्यादा कमरे खाली पड़े रहने से बेहतर है कि ग्राहकों को कम किराये पर कमरे दे दिए जाएं।
उनके मुताबिक होटल के रेट कार्ड पर शायद आपको कमरे का किराया ज्यादा दिखे, लेकिन अगर व्यक्तिगत स्तर पर मोलभाव किया जाए, तो अच्छी खासी छूट हासिल हो सकती है।
अल्वा के अनुसार होटल कारोबार फायदे में तभी रह सकता है, जब उसके कम से कम 75 फीसदी कमरे भरे हुए रहें। पिछले साल तक मुंबई के ज्यादातर होटलों में 75 से 100 फीसदी कमरे भरे रहते थे, लेकिन आज यह आंकड़ा घटकर महज 45 से 60 फीसदी रह गया है।
यहां छोटे-बड़े कुल 18,000 से ज्यादा होटल हैं और उनमें कुल मिलाकर आधे कमरे ही भरे हैं। विदेशी ग्राहकों की संख्या में कमी आई है और देसी ग्राहकों में बमुश्किल 10 फीसदी बड़े होटलों का रुख करते हैं, इसलिए फाइव स्टार होटलों की रौनक तो बिल्कुल उड़ गई है। अल्वा इसके लिए राजनीतिक पार्टियों की तोड़फोड़ को भी दोष देते हैं, जिससे माहौल बिगड़ रहा है।
होटल कारोबार पर ग्रहण केवल मुंबई या भारत में नहीं है, बल्कि समूची दुनिया में ऐसा ही हो रहा है। होटलों की जानकारी देने वाले पोर्टल होटल डॉट कॉम के प्रबंध निदेशक जोहान स्वानस्ट्रॉम के अनुसार एशिया में बैंकॉक, शांघाई और कुआलालंपुर जैसे शहरों में भी ऐसा ही हाल है, जबकि ये शहर हमेशा से पर्यटन के केंद्र रहे हैं।
इस समय तो वहां भी 1,200 से 4,200 रुपये खर्च करने पर अच्छे होटल में कमरे मिल रहे हैं। होटल डॉट कॉम के मुताबिक जनवरी 2004 के बाद पहली बार वैश्विक स्तर पर होटलों के किराये औसतन 3 फीसदी तक घटे हैं। 

कारोबारियों का कहना है कि विदेशी सैलानियों के साथ स्थानीय पर्यटकों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है।

First Published : February 23, 2009 | 10:45 PM IST