मंदी से हुईं तार तार, सरकारी रियायत की दरकार

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 12:01 AM IST

उत्तराखंड में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) पर वैश्विक मंदी के कुप्रभाव का मुकाबला करने के लिए राज्य के विभिन्न औद्योगिक संगठनों ने इस क्षेत्र के लिए सरकार से और अधिक रियायती कदम उठाए जाने की मांग की है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (आईएयू) ने सरकार को भेजे अपने सुझावों में ठोस कदम उठाए जाने का आह्वान किया है जिनमें नकदी संकट से जूझ रहे छोटे उद्योगों के लिए एक विशेष कोष के गठन की मांग भी शामिल है।
सीआईआई ने अपने 10-सूत्री सुझाव में कहा है, ‘सूक्ष्म और अन्य छोटी इकाइयों के लिए एक अलग कोष बनाया जाना चाहिए जिसमें सभी बैंकों को बिना ब्याज के रकम जमा करनी चाहिए। इस कोष में लक्ष्य की प्राप्ति को ध्यान में रख कर रकम जमा की जानी चाहिए। जो बैंक लक्ष्य से अधिक होंगे, उन्हें इस कोष से अतिरिक्त धन वितरित किया जाना चाहिए। यह लघु एवं मझोली इकाइयों को बड़े ऋण देने के लिए बैंकों को प्रोत्साहित करेगा।’
सीआईआई के सुझाव का समर्थन करते हुए आईएयू ने कहा है कि सरकार को रिवॉल्विंग फंड का निर्माण कर क्षेत्र को वित्तीय मदद मुहैया करना परोक्ष रूप से शुरू कर देनी चाहिए। आईएयू के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा, ‘ब्याज दरें अभी भी अधिक बनी हुई हैं और विकास दर को बढ़ावा देने के लिए इन ब्याज दरों को 10 फीसदी से नीचे के स्तर पर लाए जाने की जरूरत होगी।’
ये सभी सुझाव एमएसएमई पर मंदी के प्रभाव का आकलन करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा स्टेट लेवल बैंकर कमेटी (एसएलबीसी) को दिए गए निर्देश के बाद सामने आए हैं।
उद्योगपतियों का कहना है कि वैश्विक मंदी के तूफान से मुकाबला करने के लिए कुछ और ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। वैश्विक मंदी ने बाजार में मांग को बुरी तरह से प्रभावित किया है।
औद्योगिक संगठनों ने कहा है कि सरकार को सिर्फ आरबीआई की नई पहलों और दिशा-निर्देशों पर निर्भर रहने के बजाय कुछ और ठोस कदम उठाने चाहिए। आरबीआई की नई पहलों में एमएसएमई के बकाया के पुनर्व्यवस्थापन और स्वीकृत सीमा के तहत ऋणों का वितरण प्रमुख रूप से शामिल हैं।
औद्योगिक संगठनों ने इस क्षेत्र पर पड़े वैश्विक मंदी के असर का आकलन किए जाने पर भी सहमति जताई है। इन संगठनों ने इस उद्योग के लिए ऋण के आसान प्रवाह की भी मांग की है।
आईएयू ने कहा है, ‘सरकार द्वारा किए गए तमाम प्रयास अपर्याप्त साबित हुए हैं। यह समय है जब सरकार को अंदरूनी मांग को प्रोत्साहित करना चाहिए और इसके लिए यह जरूरी है कि हमारे पास जल्द ही एक प्रभावी और सक्रिय कीमत क्रय वरीयता नीति होनी चाहिए।’
आईएयू ने कहा है कि बैंकों को भी एमएसएमई को नकदी संकट से मुकाबले के लिए सक्षम बनाने हेतु मार्जिन कम करने पर विचार करना चाहिए और उन्हें तदर्थ सीमाएं मुहैया करानी चाहिए।
मौजूदा वित्तीय उथल-पुथल में बैंकों के लिए एनपीए प्रबंधन भी एक बड़ी चुनौती होगी। मौजूदा आर्थिक मंदी ने कंपनियों की ऋण पुनर्भुगतान क्षमता को काफी हद तक प्रभावित किया है।

First Published : February 5, 2009 | 1:37 PM IST