‘सबसे बड़ी चुनौती है किराए को लेकर हो रही जंग’

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 1:55 AM IST

पिछला साल एयरलाइंस उद्योग के लिए काफी बुरा साबित हुआ। लागतें आसमान पर थीं, मांग में तेज गिरावट आई और घाटा बढ़ता गया। बड़ी-बड़ी एयरलाइंसों को घरेलू मांग में तेज गिरावट की वजह से पिछले साल कम से कम 3,000 करोड़ रुपये का घाटा सहना पड़ा।
इस साल की शुरुआत भी कोई बहुत अच्छी नहीं रही। मांग की स्थिति का उन्होंने बहुत ही बुरा अंदाजा लगाया और इसकी कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ी। लेकिन इस हालत का असर बजट या एलसीसी एयरलाइंसों पर ज्यादा नहीं पड़ा। इन्हीं में से एक कंपनी है स्पाइसजेट, जिसके सीईओ संजय अग्रवाल ने राम प्रसाद साहू को चुनौतियों और मौकों के बारे में खुल कर बताया।
ईंधन की कीमतों में कमी आने की वजह से दिसंबर तिमाही में आप पर से दबाव कुछ कम हुआ है। ऐसे में इस तिमाही को लेकर क्या उम्मीद है? क्या इस तिमाही में आप अपनी लागत निकाल पाएंगे?
आप इस तिमाही में एटीएफ की लागत में 3-4 फीसदी की कमी आने की उम्मीद कर सकते हैं। जनवरी में हमारा लोड फैक्टर 68 फीसदी का रहा, जिसे बहुत ज्यादा नहीं कहा जा सकता है। दूसरी तरफ, हमारे किराए में 40-50 फीसदी की गिरावट आई है।
मैं मानता हूं कि यह बहुत बुरा महीना साबित हुआ, लेकिन फिर भी हमने अच्छा काम किया। वजह रही, ईंधन के मद में खर्च होने वाले पैसों का बचना। आज के माहौल में हमें अपनी लागत निकालने में 60 के आंकड़े तक पहुंचने की जरूरत है।
मेरे मुताबिक इस साल में ज्यादा विकास होने की उम्मीद नहीं है। मांग का स्तर पिछले साल के बराबर ही रहेगा। आर्थिक स्थिति को देखते हुए मांग में साल के अंत तक या अगले साल में इजाफा होना शुरू होगा।
जनवरी में स्पाइसजेट के बाजार को बढ़ाने में किस चीज ने मदद की? 
हमारे पास घरेलू बाजार का 6.6 फीसदी बेड़ा है। हमारा जनवरी में 11.8 फीसदी बाजार पर कब्जा रहा। इसमें ज्यादा यात्रियों वाले रूटों पर जोर देने की हमारी रणनीति काम आई। हम सबसे ज्यादा यात्रियों वाले शहरों के लिए हर हफ्ते औसतन 20 और दिन में तीन उड़ानें संचालित करते हैं।
दूसरे लो कॉस्ट कैरियरों से आप खुद को कैसे अलग साबित करेंगे? साथ ही, लागत कम करने के लिए आपकी रणनीति क्या है?
हम सबसे अच्छी तरह से अपने विमानों का इस्तेमाल करते हैं और यही हमारी सबसे बड़ी खूबी है। हमसे यात्री काफी खुश रहते हैं और हमारी सीटें भी काफी आरामदेह हैं। साथ ही, हम उड़ानें काफी कम रद्द होती हैं।
इसके अलावा हमारे कर्मी भी काफी दोस्ताना बर्ताव करते हैं। मेरे मुताबिक इन्हीं बातों से हम औरों से अलग हैं। जहां तक लागत की बात है, तो हम ईंधन के कुशल इस्तेमाल पर काफी जोर दे रहे हैं। इसके लिए हम अच्छे रास्तों और रूटों को चुनते हैं। ये सिर्फ लागत की बात नहीं, बल्कि आपकी कमाई का भी रास्ता है।
अगर चुनौतियों की बात करें, आपको ज्यादा चिंता किस बात से होती है?
सबसे बड़ी चुनौती तो किराए को लेकर होती जंग है। मेरी मानें तो इससे किसी को फायदा नहीं होता। एक वक्त ऐसा था जब आपकी कमाई 10 करोड़ डॉलर थी। ऐसे में बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कंपनी एक करोड़ लगा सकती थी।
यह बात तो समझ में आती है। लेकिन जब आप हर साल 15 करोड़ डॉलर का नुकसान सह रहे हों और बाजार में पहुंच बढ़ाने के लिए दो करोड़ डॉलर का निवेश करना चाहते हैं। यह बहुत बड़ी बेवकूफी है। इससे किसी का भी फायदा नहीं हो पाता है।
मंदी के इस माहौल में स्पाइसजेट के खुदरा निवेशकों के लिए अलग क्या है?
देखिए तीन बातें हैं जिस पर आपको विश्वास करने की जरूरत है। पहली, लंबे समय के लिए भारत में विमानन का भविष्य। दूसरी, एलसीसी मॉडल और भारत में उसका भविष्य।
तीसरी और अंतिम कि क्या भारतीय एलसीसी स्पेस में स्पाइसजेट ठीक-ठाक चलने वाली कंपनी है? अगर आप इतिहास को उठा कर देंखे तो विमानन क्षेत्र में किए जाने वाले निवेश में बेहद उतार-चढ़ाव नजर आएगा।
इसलिए मेरा मानना है कि निवेशकों को थोड़ा धैर्य रखना चाहिए। इसके इतर, अमेरिका में यह बाजार बहुत अच्छा कारोबार कर रहा है और वहां आमतौर पर अच्छे समय में 2-3 फीसदी का वृध्दि देखने को मिलती है लेकिन भारत अभी एक बेहतर मंच की तलाश कर रहा है।
अमेरिका की जनसंख्या 300 मिलियन है और वहां हजारों की संख्या में हवाईजहाज है और वह भी काफी नहीं है जबकि भारत में एक बड़े मध्यम वर्ग की जनसंख्या ही 300 मिलियन है और उसके एवज में हवाईजहाजों की संख्या केवल 350 है।
क्या आपको ऐसा लगता है कि इस क्षेत्र में अधिग्रहण और विलय का नया दौर शुरू होने वाला है?
मेरा तो स्पष्ट मानना है कि बात चाहे पूर्ण सेवा क्षेत्रों की हो या फिर कम लागत वाले विमानन क्षेत्रों की, केवल दो एयरलाइन ही काफी हैं। अगर दूसरे देशों को देखें तो वहां टे्रन नेटवर्क बहुत ही जबरदस्त है और ये टे्रन यात्रा के लिहाज से काफी किफायती और विश्वसनीय माध्यम है।

First Published : February 22, 2009 | 9:37 PM IST