टारो की पेशकश पर तमतमा गई सन फार्मा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 09, 2022 | 7:52 PM IST

अधिग्रहण के प्रयासों से जूझती हुई इजरायली दवा निर्माता कंपनी टारो फार्मास्युटिकल ने विलय के लिए सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज के साथ विलय के लिए 58 प्रतिशत प्रीमियम या 15 डॉलर प्रति शेयर नकद की मांग की है।


हालांकि सन फार्मा ने कंपनी की इस मांग को यह कहते हुए सिरे से खारिज कर दिया कि यह कंपनी की कीमत से काफी ज्यादा है। कंपनी का कहना है कि पिछले तीन साल से कंपनी ने अपने ऑडिट वित्तीय नतीजे घोषित नहीं किए हैं।

इजरायली सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश-अदालत से 30 दिनों के भीतर बाहर निपटारे के विकल्प ढूंढ़े जाएं, की समयावधि आज खत्म हो गई।

अब उम्मीद है कि इसके बाद टारो में बची 64 प्रतिशत प्रवर्तकों और दूसरे शेयरधारकों की हिस्सेदारी के अधिग्रहण के प्रयासों में लगी सन फार्मा की किस्मत का फैसला अदालत करेगी।

इससे पहले सन फार्मास्युटिकल ने अदालत के निर्देश के आधार पर दो विकल्प सुझाए थे, जिनमें से एक में कंपनी ने ज्यादा से ज्यादा 9.50 डॉलर प्रति शेयर टारो को पेशकश दी थी।

टारो के चेयरमैन बैरी लेविट ने कल देर रात सन फार्मा के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक दिलीप सांघवी को संपर्क में कहा था, ‘हमें लगता है कि इस स्तर पर विलय कीमत में अपने हित में शेयरधारकों का मत हासिल करने की उचित संभावनाएं हैं और हमारा निदेशक मंडल इसका समर्थन करने को तैयार है।’

उन्होंने कहा कि इस कीमत पर टारो विलय की बातचीत करने की इच्छुक है और इजरायली सर्वोच्च न्यायालय की ओर से 30 दिन की मियाद को अगर कुछ दिन के लिए और बढ़वाने के लिए वह अपनी तरफ से भी कोशिश करने को तैयार है।

इसके जवाब में दिलीप सांघवी का कहना है, ‘समझौते की अवधि के 29वें दिन मिले आपके कल के पत्र में 82 प्रतिशत प्रीमियम पर विलय का प्रस्ताव दिया गया है। यह अदालत की व्यवस्था में देरी करने के अपने प्रयास को उचित ठहराने की एक और दुर्भाग्यपूर्ण कोशिश है।’

सन पहले ही टारो की उस सलाह को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने सन फार्मा के विलय की कीमतों पर शेयरधारकों में जनमत संग्रह की बात कही थी। कंपनी ने अदालत के बाहर निपटारे के तौर पर टारो को 9.50 डॉलर प्रति शेयर की पेशकश दी थी, जिसे टारो ने शेयरधारकों के सामने रखने की बात कही थी।

दिलीप सांघवी ने टारो के विकल्प के प्रस्ताव पर कहा है कि अगर विलय रद्द हो जाता है तो प्रवर्तक लेविट और मोरोस परिवार अपने शेयर अपने पास रख सकते हैं। टारो और उसके बाहरी निदेशक टारो के प्रवर्तकों के हितों को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

दिलीप सांघवी का कहना है कि यह नया प्रस्ताव पहले विकल्प करार को खारिज करने के उद्देश्य दिया गया था, जिसके तहत अगर यह विलय नाकामयाब रहता है तो ऐसी स्थिति में सन फार्मा को कंपनी में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी खरीदने का हक है।

लेविट अब भी अपनी बात पर बरकरार हैं कि सन का 9.50 डॉलर प्रति शेयर का प्रस्ताव टारो का बहुत कम मूल्यांकन है। सन फार्मा ने पिछले साल ब्रैंडस इन्वेस्टमेंट के शेयर खरीदने के लिए 10.25 डॉलर प्रति शेयर का भुगतान किया था।

इसके अलावा कंपनी के विलय को रोकने लायक शेयरों के साथ टेम्पलटन भी इस स्तर पर विलय के समर्थन में नहीं है। दोनों कंपनियों के बीच में मई, 2007 से ही शीतयुध्द की स्थिति बनी हुई है, जिस वक्त सन ने उस समय मुसीबतों का सामना कर रही इजरायली कंपनी में हिस्सेदारी खरीदी थी।

तब से टारो कंपनी के अधिग्रहण को नहीं होने देना चाहती और इस सिलसिले में वह न्यू यॉर्क और इजरायली अदालतों का दरवाजा भी खटखटा चुकी है।

सन-टारो में बढ़ती दरार

मई 2007 में मुसीबत का सामना करती टारो में कंपनी ने हिस्सेदारी खरीदी। तभी से टारो नहीं चाहती अधिग्रहण

भारतीय दवा निर्माता कंपनी सन फार्मा के पास पहले ही टारो में है 36 फीसदी हिस्सा

अदालत के निर्देश से पहले सन फार्मा ने टारो के अधिग्रहण के लिए पहले 7.75 डॉलर प्रति शेयर की बोली लगाई थी

इजरायली सर्वोच्चय न्यायालय की 30 दिनों की मियाद 8 जनवरी को हो जाएगी पूरी

First Published : January 7, 2009 | 10:54 PM IST