…ताकि गिर न जाए बुलंद इमारत

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 8:05 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक दस प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों के खातों की जांच कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कंपनियों की व्यावहार्यता या उसकी क्षमता कितनी है।
साथ ही उन जोखिमों का पता लगा रही है, जहां कंपनियां लोन चुकता करने या जनता से जमा की गई रकम को वापस करने में डिफाल्ट कर सकती हैं। सूत्रों का कहना है कि आरबीआई का मकसद कंपनियों के खातों की विस्तृत जांच करना है, जिससे कर्ज और इक्विटी रेश्यो का सही पता चल सके, साथ ही कंपनियों की क्षमता और मौजूदा परिचालन मार्जिन का पता लग सके।
रिजर्व बैंक की ओर से जिन कंपनियों के खातों की जांच की जा रही है, उनमें डीएलएफ, इंडियाबुल्स रियल एस्टेट, यूनिटेक, एचडीआईएल, महिंद्रा लाइफस्पेस, पेनिनसुलर लैंड, अंसल प्रॉपर्टीज, फोनिक्स मिल्स, अनंतराज इंडस्ट्रीज और आकृति सिटी लिमिटेड शामिल हैं।
फिलहाल आरबीआई सामान्य सूचनाओं के आधार पर कंपनी के खातों की आंतरिक जांच में जुटी है, लेकिन जल्द ही वह कंपनियों से लोन, नकद जमा और फिक्स्ड डिपॉजिट के बारे में बैंकों और म्युचुअल फंड कंपनियों से जानकारी मांग सकता है।
सूत्रों का कहना है कि कंपनियों को इस बात का भी जिक्र करना होगा कि उन्होंने गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं के जरिए कितनी रकम उधर ली है। दरअसल, कई कंपनियों ने सीधे लोन लेने के बजाए अपनी गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं के जरिए कर्ज उगाही की है।
ऐसे में आरबीआई उन कंपनियों से जुडी ग़ैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं के खातों की भी स्वतंत्र जांच कर सकता है। कंपनियों और गैर बैंकिग वित्तीय संस्थाओं के खातों की जांच के बाद अगर इस बात का पता चलता है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है, तो आरबीआई बैंकों से उन कंपनियों में अपना एक्सपोजर कम करने को कह सकता है। इस जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बैंकों ने आरबीआई से कहा है कि बड़ी मात्रा में लोन डिफाल्ट हो सकता है, जिससे बैंकिंग प्रणाली के लिए मुश्किल आ सकती है।
इन कंपनियों में लोन जोखिम के बारे में इससे पता चलता है कि ये रियल्टी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर बैंकों से लॉन्ग टर्म लोन लिया है, साथ ही कॉमर्शियल पेपर को बंधक रखकर म्युचुअल फंड कंपनियों से भी हजारों करोड़ रुपये की शॉर्ट टर्म लोन की उगाही की है। ऐसे में अगर एक भी कॉमर्शियल पेपर डिफाल्ट होता है, तो म्युचुअल फंड कंपनियों पर प्रतिकूल असर पड़गा, साथ ही बैंकों को भी नुकसान होगा, जिसका प्रभाव आम जनता की जमा रकम पर पड़ सकता है।

First Published : March 14, 2009 | 2:33 PM IST