सरकार ने शिपिंग कॉर्पोरेशन आफ इंडिया के निजीकरण के बोली के मानदंडों में बदलाव किया है। साथ ही रुचि पत्र दाखिल करने की तिथि भी बढ़ाकर 1 मार्च कर दी गई है, जो पहले 13 मार्च रखी गई थी।
सरकार ने अवधि में भी बदलाव किया है, जिसमें रुचि लेने वाले बोलीकर्ता की सकल पूंजी और इबिटा या परिचालन लाभ की गणना 31 मार्च 2020 से 31 दिसंबर, 2019 के मुताबिक या उसके बाद से की जाएगी।
इसमें इसलिए बदलाव किया गया है क्योंकि विदेशी कंपनियों का अलग रिपोर्टिंग चक्र होता है और वे भारत के अप्रैल-मार्च से अलग लेखा वर्ष का अनुपालन करती हैं। एक अधिकारी ने कहा, ‘यह एक विसंगति थी और इसे ठीक कर दिया गया है।’
अधिकारी ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित छूट का लाभ कुछ भारतीय कंपनियों को भी मिल सकेगा, जिन्हें कोविड के कारण अपने खाते बंद करने में देरी हुई। बदलाव से यह अनुमति मिल गई है कि दिलचस्पी लेने वाले खरीदा अपनी सकल पूंजी 31 दिसंबर, 2019 या इसके बाद का दिखाना होगा और सकल पूंजी लेन देन पूरी होने तक यथावत मानी जाएगी। कंपनी के निजीकरण के प्राथमिक सूचना ज्ञापन में कहा गया है कि बोली लगाने वाले की न्यूनतम सकल पूंजी 2,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए और पिछले 5 वित्त वर्ष में कम से कम 3 वर्षों में परिचालन मुनाफा धनात्मक होना चाहिए। सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की कंपनी, सेबी में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष या एक कंपनी या भारत के बाहर का फंड कंपनी के लिए बोली लगाने के पात्रहोगा। कर्मचारी भी स्वतंत्र रूप से या कंसोर्टियम बनाकर इस लेन देन में हिस्सा ले सकते हैं। कर्मचारियों को लेन देन पाूरा रने के लिए एक इकाई बनाना होगा, जिसके लिए वित्तीय बोली का 10 प्रतिशत अंशदान देने की जरूरत होगी। सरकार ने शिपिंग कॉर्पोरेशन में पूरी 63.75 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई है, जिससे शुक्रवार को बंद शेयर भाव के मुताबिक सरकार को करीब 3,597 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है।