एचसीएल में समाएगी सत्यम!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 5:36 PM IST

मायटास सौदे से शुरू हुआ विवाद सत्यम कंप्यूटर्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।


घरेलू या विदेशी कंपनी और निजी इक्विटी फर्मों की ओर से जबरिया अधिग्रहण की आशंका के बीच सत्यम कंप्यूटर्स के प्रबंधक और कुछ संस्थागत निवेशक किसी अन्य सॉफ्टवेयर कंपनी के साथ सत्यम के विलय की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

इसके लिए सत्यम दिल्ली स्थित एचसीएल टेक्नोलॉजिज और बेंगलुरु स्थित माइंड ट्री से बात कर रही है। निवेश बैंक के एक सूत्र ने बताया कि एचसीएल के साथ सत्यम का गैर-नकद (कैशलेस) विलय हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि सत्यम प्रबंधकों को विवादस्पद मायटास सौदे (जिसे रद्द कर दिया गया) के बाद संस्थागत निवेशकों, खासकर विदेशी निवेशकों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विवाद की वजह से कंपनी के चार स्वतंत्र निवेशक इस्तीफा तक दे चुके हैं।

निवेश बैंक के सूत्रों के मुताबिक, अगर एचसीएल और सत्यम का विलय होता है, तो यह देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी बन सकती है।

इस बीच सत्यम के प्रवर्तकों की कंपनी में हिस्सेदारी घटकर करीब 5 फीसदी तक पहुंच गई है, क्योंकि कुछ संस्थागत निवेशकों ने गिरवी रखे गए शेयरों को बेच दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, सत्यम के विलय का प्रारूप डीएसपी मेरिल लिंच की ओर तैयार किया जा सकता है। निवेशक कंपनी का विलय इसलिए भी करने को इच्छुक हैं, क्योंकि गैर-आईटी कंपनी सत्यम का अधिग्रहण करने की योजना बना रही है।

हालांकि इस बारे में एचसीएल की ओर से कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया गया। सत्यम के अधिकारी का कहना है कि फिलहाल इस बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा।

सूत्रों का कहना है कि 10 जनवरी को प्रस्तावित सत्यम की बोर्ड बैठक के बाद इसका फैसला हो सकता है। क्योंकि अभी कंपनी के कुछ निदेशकों का पद खाली है। ऐसे में बैठक में निदेशकों की संख्या तय होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकता है।

अगर  शिव नाडार प्रवर्तित एचसीएल और सत्यम का विलय होता है, तो यह देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी बन सकती है।

First Published : January 5, 2009 | 12:07 AM IST