आर्थिक संकट की वजह से कठिन दौर से गुजर रही देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने कहा है कि वे कर्मचारियों के वैरिएबल वेतन के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेगी।
इस बाबत कंपनी ने कहा कि वह अगले वित्त वर्ष में कर्मचारियों के वेतन में वृध्दि नहीं करेगी। वहीं लागत घटाने के लिए नौकरी में कटौती की जा सकती है।
टीसीएस के प्रबंध निदेशक एस. रामादुरई ने कहा कि आगामी वित्त वर्ष में वित्तीय स्थिति के बिगड़ने पर कर्मचारियों की छंटनी से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
साथ ही उन्होंने कहा कि अगले साल कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी नहीं होगी। रामादुरई ने कहा कि कंपनी पहले ही कर्मचारियों की भर्ती को फ्रीज कर दिया है। साथ ही कर्मचारियों के वेतन पर मिलने वालों भत्तों के ढांचे की समीक्षा कर रही है।
रामादुरई ने कहा है कि हमलोग लागत में कमी करने जा रहे हैं। फिलवक्त कर्मचारियों के वेतन और उन पर हो रहे खर्च की वजह से कंपनी की 54 फीसदी आमदनी खर्च हो जाती है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के काम करने के घंटे में भी इजाफा किया जाएगा। इसे हर हफ्ते बढ़ाकर 40 से 45 घंटे कर दिया जाएगा। काम के नए घंटे 1 अप्रैल से लागू होगा।
रामादुरई ने कहा कि कंपनी कैंपस भर्ती के जरिये जिन 24,500 लोगों को नियुक्त करने जा रही है, उसकी संख्या में कमी हो सकती हे। इन्हें जून में ज्वाइन करना था।
उन्होंने कहा कि इन नए कर्मचारियों के वेतन को भी संशोधित किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर कंपनियों की भर्ती नीति समय और काम दोनों तरह का होता है।
ऐसे में काम के घंटे में इजाफा करने से कंपनी को फायदा होने की उम्मीद है। कंपनी ने ब्रिटेन के 100 कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने के लिए कहा है। रामादुरई ने कहा, ‘ हमारे ज्यादातर काम कॉन्टै्रक्ट आधार पर हैं।
1.3 लाख कर्मचारियों के वेतन में 8 फीसदी तक की कटौती
1 अप्रैल से काम करने के घंटे को बढ़ाया जाएगा
24,500 लोगों की नियुक्ति पर लटक सकती है तलवार
कैंपसों से भर्ती किए गए कर्मियों के वेतन की होगी समीक्षा
नए इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में देरी