निर्यात के मामले में लुढ़का टायर भी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 6:34 PM IST

दुनिया भर में वाहनों की बिक्री में हुई जोरदार कमी के साथ कई देशों के आयात नियम कड़े होने से भारत की टायर कंपनियों के निर्यात पर बड़ा बुरा असर पड़ा है। हाल यह है कि पिछली तीन तिमाहियों में टायर की मांग 12 फीसदी तक गिर चुकी है।
वैसे इस दौरान डॉलर और अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपये में काफी गिरावट देखी हुई। मांग में हुई उल्लेखनीय कमी के चलते सिएट, जेके टायर्स ऐंड इंडस्ट्रीज, अपोलो टायर और एमआरएफ जैसी भारतीय टायर कंपनियां इसका फायदा उठाने में नाकाम रही हैं।
चीन जैसे सस्ते टायर तैयार निर्माता देश इस चिंता को और बढ़ा रहे हैं। पूरी दुनिया में केवल ट्रक, बस और कारों की मांग घटने से टायर के निर्यात में 20-25 फीसदी की कमी हुई है।
टायर निर्माताओं की शीर्ष संस्था ऑटोमोटिव टायर मैन्यूफैक्चर्स एसोसिशन (एटीएमए) के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2008 के बीच 23.46 लाख टायर का निर्यात हुआ जो एक साल पहले की समान अवधि से 12 फीसदी कम है।
उस समय टायरों का कुल निर्यात 26.68 लाख रहा था। संस्था के मुताबिक, बसों और ट्रकों के मामले सबसे अधिक 16 फीसदी की गिरावट हुई है। अप्रैल से दिसंबर 2007 के बीच जहां 18.65 लाख टायरों का निर्यात किया गया, वहीं 2008 में महज 15.63 लाख टायरों का निर्यात हो पाया।
इस बीच कार सेगमेंट में टायरों की मांग केवल दो फीसदी गिरी है। पहले के 8.03 लाख की तुलना में अप्रैल-दिसंबर 2007 में यह 7.83 लाख टायर रह गई। 

एटीएमए के महानिदेशक राजीव बुद्धराजा ने बताया, ”मलयेशिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और थाईलैंड में उच्च आयात शुल्क की वजह से भारतीय टायर निर्यातकों को दिक्कत हो रही है। इस समय, उत्पादन और खपत के लिहाज से ये देश काफी तेज तरक्की कर रहे हैं।”
देश के सबसे बड़े टायर निर्यातक सिएट को मौजूदा वित्त वर्ष की बीत चुकी तिमाहियों में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, कंपनी के मुताबिक मौजूदा तिमाही में मुश्किलों के कम होने के संकेत मिल रहे हैं।
कंपनी के बिक्री और विपणन मामलों के उपाध्यक्ष अर्नब बनर्जी ने बताया, ”अभी हम अपने उत्पादन का 20 फीसदी निर्यात कर रहे हैं, लेकिन पश्चिम एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका के बाजारों में टायरों की मांग में जोरदार कमी देखी गई है।”
हालांकि, बनर्जी ने बताया, ”मौजूदा तिमाही में सुधार के संकेत मिले हैं। 2008-09 के वित्त वर्ष में कुल मिलाकर लाभ होने का कोई अनुमान नहीं है।”

एटीएमए के मुताबिक, सिएट ने अप्रैल से दिसंबर 2008 के बीच 412 करोड़ रुपये का टायर निर्यात किया। 1,806 करोड़ रुपये के टायर बाजार में सिएट की हिस्सेदारी 23 फीसदी की रही।

First Published : February 27, 2009 | 11:06 PM IST