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ऑर्डर घटे, निर्माण धीमा पड़ा… इन्फ्रा सेक्टर की हालत पर रिपोर्ट ने बजाई खतरे की घंटी

सड़क सेक्टर की रफ्तार क्यों पड़ी धीमी? नए प्रोजेक्ट घटे, निर्माण सुस्त, कंपनियों की बढ़ीं मुश्किलें

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- June 23, 2026 | 2:21 PM IST

Infrastructure Stocks: देश में सड़क निर्माण लंबे समय तक सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर अभियान का सबसे मजबूत हिस्सा रहा है। एक समय ऐसा था जब हर साल हजारों किलोमीटर नई सड़क परियोजनाएं मंजूर हो रही थीं और निर्माण भी तेजी से आगे बढ़ रहा था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह रफ्तार लगातार धीमी पड़ती दिख रही है। वित्त वर्ष 2025-26 भी सड़क क्षेत्र के लिए कोई राहत लेकर नहीं आया। नए प्रोजेक्ट्स कम निकले, निर्माण की गति घटी और सड़क कंपनियों के सामने ऑर्डर जुटाने की चुनौती और बढ़ गई।

पहले जैसी नहीं रही प्रोजेक्ट्स की बरसात

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने वित्त वर्ष 2025-26 में 3,124 किलोमीटर सड़क परियोजनाओं के ठेके दिए, जिनकी कुल कीमत करीब 42,300 करोड़ रुपये रही। यह आंकड़ा पिछले दो वर्षों की तुलना में थोड़ा बेहतर जरूर है, लेकिन कुछ साल पहले की स्थिति से काफी कमजोर है।

तुलना करें तो वित्त वर्ष 2022-23 में NHAI ने करीब 6,300 किलोमीटर सड़क परियोजनाएं आवंटित की थीं, जिनकी कीमत लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये थी। यानी तीन साल में सड़क परियोजनाओं के आकार और संख्या दोनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

अगर सड़क परिवहन मंत्रालय और NHAI दोनों के आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में सड़क परियोजनाओं का आवंटन करीब 7,000 किलोमीटर रहा। यह पिछले सात सालों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।

सड़कें बन भी कम रही हैं

नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ नए प्रोजेक्ट्स ही नहीं घटे हैं, बल्कि जमीन पर निर्माण की रफ्तार भी कमजोर हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में सड़क निर्माण 12 फीसदी घट गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में भी निर्माण में 14 फीसदी की गिरावट आई थी। यानी लगातार दो साल से सड़क निर्माण की रफ्तार नीचे जा रही है। नतीजा यह हुआ कि निर्माण गतिविधि वित्त वर्ष 2016-17 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। सरल शब्दों में कहें तो सरकार जितनी सड़कें पहले बनवा रही थी, अब उतनी तेजी नहीं दिख रही है।

आखिर निर्माण धीमा क्यों पड़ रहा है?

रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह जमीन अधिग्रहण में देरी है। कई बार परियोजनाओं को मंजूरी मिल जाती है, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण काम शुरू नहीं हो पाता। कई परियोजनाएं महीनों और वर्षों तक अटकी रहती हैं। जब जमीन समय पर नहीं मिलती तो निर्माण लागत भी बढ़ती है और परियोजनाएं तय समय पर पूरी नहीं हो पातीं। इसका असर पूरे सेक्टर पर पड़ता है।

सड़क कंपनियों को क्यों हो रही है परेशानी?

किसी भी निर्माण कंपनी की कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कितने नए ऑर्डर मिल रहे हैं। जब सरकार की तरफ से कम प्रोजेक्ट निकलेंगे तो कंपनियों के पास काम भी कम होगा। नुवामा की रिपोर्ट बताती है कि लिस्टेड सड़क निर्माण कंपनियों की हिस्सेदारी NHAI के कुल प्रोजेक्ट आवंटन में करीब 25 फीसदी पर ही बनी हुई है। पिछले कुछ वर्षों से इसमें कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

इसका मतलब है कि बड़ी लिस्टेड कंपनियां भी पहले की तरह बड़े पैमाने पर नए ऑर्डर हासिल नहीं कर पा रही हैं। इससे उनकी भविष्य की कमाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।

खर्च तो हो रहा है, लेकिन नतीजे नहीं दिख रहे

दिलचस्प बात यह है कि NHAI का पूंजीगत खर्च यानी कैपेक्स वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के लगभग बराबर है। लेकिन इसके बावजूद सड़क निर्माण 5 फीसदी घटकर 5,313 किलोमीटर रह गया। यानी खर्च में कोई बड़ी कमी नहीं आई, फिर भी जमीन पर बनने वाली सड़कों की संख्या कम हो गई। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि सिर्फ पैसा खर्च करना काफी नहीं है, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुधार की जरूरत है।

अब कर्ज घटाने पर ज्यादा ध्यान

पिछले कुछ वर्षों में NHAI पर कर्ज का बोझ काफी बढ़ गया था। अब प्राधिकरण अपनी बैलेंस शीट मजबूत करने में जुटा है। वित्त वर्ष 2025-26 में सड़क मंत्रालय ने सड़क परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण यानी एसेट मोनेटाइजेशन के जरिए करीब 28,300 करोड़ रुपये जुटाए। यह उसके तय लक्ष्य के करीब है। साथ ही NHAI का ऋण-इक्विटी अनुपात घटकर 0.17 गुना रह गया है, जो एक साल पहले 0.26 गुना था। प्राधिकरण का लक्ष्य 2030 तक पूरी तरह कर्ज मुक्त होना है।

अगले साल भी राहत मिलने की उम्मीद कम

सड़क क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगले वित्त वर्ष में भी हालात बहुत बेहतर होते नहीं दिख रहे हैं। केंद्र सरकार ने 2026-27 के बजट में सड़क क्षेत्र के लिए आवंटन में बहुत बड़ी बढ़ोतरी नहीं की है। दूसरी तरफ NHAI का फोकस भी नए प्रोजेक्ट्स पर भारी खर्च करने के बजाय कर्ज कम करने पर है। ऐसे में बड़े पैमाने पर नए सड़क प्रोजेक्ट्स निकलने की संभावना फिलहाल कम नजर आती है।

सड़क कंपनियों को बदलनी होगी रणनीति

रिपोर्ट का मानना है कि सड़क निर्माण कंपनियों को अब सिर्फ हाईवे प्रोजेक्ट्स पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें रेलवे, मेट्रो, पानी सप्लाई, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य निर्माण क्षेत्रों में भी अवसर तलाशने होंगे। क्योंकि सड़क क्षेत्र में नए ऑर्डर हासिल करना पहले के मुकाबले कठिन हो गया है और मुनाफा भी दबाव में है। ऐसे में कारोबार को बढ़ाने के लिए कंपनियों को अपने काम का दायरा बढ़ाना पड़ सकता है।

First Published : June 23, 2026 | 2:12 PM IST