इंजीनियरिंग, निर्माण और पूंजीगत सामान बनाने वाली कंपनियों की ऑर्डर बुक के लिए तीसरी तिमाही ठीक-ठाक रही। इस दौरान कंपनियों की ऑर्डर बुक में लगभग 10 फीसदी का इजाफा हुआ है।
तिमाही दर तिमाही आधार पर कंपनियों की ऑर्डर बुक में रिकॉर्ड 36 फीसदी की गिरावट आई है।
साल की पहली तिमाही में इन कंपनियों की ऑर्डर बुक में 128 फीसदी का इजाफा हुआ है। जबकि दूसरी तिमाही में यह आंकड़ा 136 फीसदी हो गया। पर साल की तीसरी तिमाही में यह आंकड़ा घटकर 52 फीसदी हो गया।
इन कंपनियों को इंजीनियरिंग, निर्माण, गैस व तेल पाइपलाइन और बिजली उपकरणों के लिए देश और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ ही केंद्रीय और राज्य सरकार से बारी-बारी मिलते हैं। इसीलिए ऑर्डर बुक में गिरावट आने क ा मतलब है अंतरराष्ट्रीय मंदी में कंपनियां सोच समझकर विस्तार कर रही हैं।
एक तरफ जहां इन कं पनियों को कें द्रीय और राज्य सरकार की ओर से मिलने वाले ऑर्डरों में मामूली सी बढ़ोतरी हुई है, वहीं दूसरी ओर विदेशी कंपनियों से मिलने वाले ऑर्डरों में गिरावट आई है। साल की तीसरी तिमाही में विदेशी कंपनियों से मिलने वाले ऑर्डरों में 26 फीसदी की गिरावट आई है।
स्थानीय कंपनियों से मिलने वाले ऑर्डरों में 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जबकि राज्य सरकार से मिलने वाले ऑर्डरों में 3 फीसदी का इजाफा हुआ है।
लेकिन केंद्रीय सरकार की ओर से मिलने वाले ऑर्डरों में 114 फीसदी का इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में केंद्र सरकार ने इन कंपनियों को 9,324 करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए थे।
इसमें से लगभग 3,574 करोड़ रुपये के ऑर्डर बिजली परियोजनाओं के लिए ही थे। जबकि तेल और गैस, रेलवे, शिपिंग और इंजीनियरिंग क्षेत्रों के लिए 500-500 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले थे।
दिसंबर तिमाही में 43 कंपनियों को ही कुल 38,770 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले थे। जबकि साल 2007 में इसी समयावधि के दौरान इन कंपनियों को 35,177 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले थे। इन ऑर्डरों में से 60 फीसदी ऑर्डर चार कंपनियों -बीएचईएल, एलऐंडटी, पटेल इंजीनियरिंग और एबीजी शिपयार्ड को मिले।
इसमें से भी 41 फीसदी ऑर्डर बीएचईएल और एलऐंडटी को मिले। नागार्जुन कंस्ट्रक्शंस, पुंज लॉयड, सीमेंस और सुभाष प्रोजेक्ट्स की ऑर्डर बुक में 40 फीसदी कमी आई है।