रिटेल बेदम, कहा-किराया करो कम

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 9:44 PM IST

रिटेल कंपनियां किराये में और कमी चाहती है। एक तरफ बिक्री ठप हो गई है, तो दूसरी ओर किराये में खास कटौती नहीं की जा रही है।
स्पेंसर्स, फ्यूचर ग्रुप, रिलायंस रिटेल, आदित्य बिरला समूह ने कहा है कि अगर किराये में आगे कोई कटौती नहीं की जाती है, तो वे उन स्टोरों को बंद कर देंगे, जो फायदेमंद नहीं हैं।
वैसे अगर पिछले छह महीने में देखें, तो रिटेल स्पेस के किराये में 30 से 40 फीसदी की कमी आई है। लेकिन बिक्री में हो रही बेतहाशा गिरावट की वजह से रिटेल कंपनियां किराये में और कटौती की बात कर रहे हैं।
जोंस लैंग लासाले मेघराज के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिटेल स्पेस का किराया बिक्री का 4 से 5 फीसदी होता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत में रिटेल किराये में इतनी जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई कि यह बिक्री का 20 से 40 फीसदी हो गया।
जोंस लैंग ने इशारा किया है कि अगर रिटेल किराये का हिस्सा बढ़कर बिक्री का 28 फीसदी हो जाता है, तो भारत के छोटे रिटेल शॉप के परिचालन में घाटा होना शुरू हो जाएगा। देशभर में रीबॉक के 720 स्टोर हैं और यह अपनी कुल बिक्री का 10 फीसदी किराये के तौर पर खर्च करती है।
यह बात तो तीन साल पहले की हुई। उसके बाद जैसे ही किराये में बढ़ोतरी हुई, यह हिस्सा भी बढ़कर 25 फीसदी हो गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो इस स्थिति में स्टोर की हालत 1 से 2 साल में खराब होने लगती है और किसी तरह ये स्टोर 3 से 4 साल तक चल जाते हैं। जब किराये में किसी तरह की कमी नहीं आती है, तो आखिरकार स्टोर पर ताला लगाना पड़ता है।
जोंस लैंग लासाले मेघराज के प्रबंध निदेशक (रिटेल) शुभ्रांशु पाणि कहते हैं, ‘बहुत सारी रिटेल कंपनियां अपने स्टोर बंद कर रहे हैं। इससे वे ग्राहक तो खोएंगे, साथ ही उनकी कमाई भी जाती रहेगी। इस स्थिति में स्टोर बंद करने या बड़े लोकेशन में शिफ्ट करने के अलावा कोई उपाय नहीं बचेगा।’ मुंबई की छोटी रिटेल कंपनी फूडलैंड फ्रेश ने हाल ही में अपने 42 आउटलेट में से 39 बंद कर दिए।

First Published : March 26, 2009 | 10:44 PM IST