कोलकाता में एक करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनी ‘कोरल सॉफ्टवेयर’ के लिए वैश्विक मंदी एक वरदान साबित हो रही है।
यह कंपनी कंपनियों के लिए बेहद लाभदायक और अनुकूल माने जाने वाले ‘एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग’ (ईआरपी) सॉफ्टवेयर की बिक्री करती है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी प्रेम चंद कांकरिया के मुताबिक, ‘ज्यादातर कंपनियां लागत में कटौती के उपाय तलाश रही हैं और ऐसे में वे ईआरपी सॉल्युशन को अपना रही हैं जो न सिर्फ कार्यालयों और उत्पादन इकाइयों को जोड़ता है बल्कि यह श्रमिकों और कार्यालयों को भी जोड़ता है।
ईआरपी सॉल्युशन कंपनियों को रोजाना के कारोबारी लेन-देन का रिकॉर्ड रखने में सक्षम बनाता है। हमने पाया है कि कंपनियां ईआरपी सॉल्युशन को खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी ले रही हैं, क्योंकि ये कंपनियां अब यह जानने को अधिक उत्सुक हैं कि उनके सभी कार्यालयों में कामकाज कैसे चलता है।’
कांकरिया ने कहा कि कोरल कंपनी का ऐसा सॉल्युशन है जो ईआरपी क्षेत्र में सक्रिय सैप, ओरेकल जैसी बड़ी कंपनियों की तुलना में ज्यादा किफायती है। कांकरिया ने कहा, ‘हमारे ईआरपी सॉल्युशन से कंपनियां 15-18 महीनों के अंदर लागत वसूल कर सकती हैं।’
कोरल के ईआरपी सॉफ्टवेयर की कीमत 10-15 लाख रुपये प्रति कार्यान्वयन है। एक इम्पलीमेंटेशन यानी कार्यान्वयन का मतलब है कि लगभग 20-30 लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
कम्पलीट इम्लीमेंटेशन, जिसमें हार्डवेयर और सभी कार्यालयों, फैक्टरियों, रिटेल प्वाइंट आदि को जोड़ा जाना भी शामिल है, के लिए किसी कंपनी को 30-50 लाख रुपये खर्च करने की जरूरत है।
इसके अलावा कोरल अकाउंटेंसी सॉफ्टवेयर भी बेचती है जिसकी कीमत 10,000-25,000 रुपये प्रति लाइसेंस है। इसके एक्साइज कैलकुलेशन सॉफ्टवेयर की कीमत 17,500-30,000 रुपये प्रति लाइसेंस है।
कांकरिया ने कहा, ‘अपने ईआरपी सॉल्युशंस के लिए तेजी से बढ़ रही मांग से उत्साहित होकर हम नए शाखा कार्यालय खोलने की योजना बना रहे हैं। उदाहरण के लिए, हम मुंबई में लगभग 6 कर्मचारियों के साथ एक कार्यालय खोलेंगे।
हम इतने की कर्मचारियों के साथ दक्षिण भारत और दिल्ली में एक-एक क्षेत्रीय कार्यालय भी खोलेंगे। फिलहाल भारत में हमारे तकरीबन 7 कार्यालय हैं जिनमें 50 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। प्रत्येक नए केंद्र में 6 लोगों को रखा जाएगा।’
कंपनी ने अपना ईआरपी सॉफ्टवेयर दिसंबर 2007 में लॉन्च किया था। उन्होंने कहा, ‘भारत में मझोले आकार की कंपनियों में ईआरपी की पहुंच महज 10 फीसदी की है।
इसके अलावा ईआरपी में निवेश करने वाली बहुत सी कंपनियां सही कार्यान्वयन के लिए इंतजार नहीं करतीं और इसी वजह से ऐसे सॉफ्टवेयर की विफलता दर काफी अधिक है। लेकिन हमारे जैसे ईआरपी प्रदाताओं के लिए यह अच्छे विकास अवसर मुहैया करा रहा है।’
कांकरिया ने कहा, ‘ईआरपी सॉफ्टवेयर कार्यान्वयन के लिए विफलता दर काफी अधिक बनी हुई है, क्योंकि पूरी तरह से कार्यान्वयन में तकरीबन एक साल का वक्त लगता है जिसमें सभी शाखा कार्यालयों, फैक्टरियों, रिटेल प्वाइंट आदि को जोड़ा जाना शामिल होता है और फिर तब जाकर कर्मचारी इसका समुचित उपयोग कर पाते हैं।
इसकी प्रक्रिया थोड़ी लंबी होती है, लेकिन कर्मचारी अक्सर इसके सही कार्यान्वयन का इंतजार नहीं करते। इस वजह से उन्हें ईआरपी में विफलता हाथ लगती है, चाहे यह ईआरपी सॉल्युशन किसी प्रतिष्ठित कंपनी का ही क्यों न हो।’
भारत में ईआरपी बाजार 2009-10 के लिए अनुमानित तौर पर 60 करोड़ डॉलर का है जो पूर्ववर्ती वर्ष के मुकाबले लगभग 30 फीसदी की बढ़त को दर्शाता है। भारत में ईआरपी बाजार पर सैप और ओरेकल का दबदबा है।
ईआरपी एक उद्यम-आधारित सूचना प्रणाली है जिसे सभी संसाधनों, सूचना, और ऑर्डर या बिलिंग जैसी संपूर्ण कारोबारी प्रक्रियाओं के समन्वयन के लिए तैयार किया गया है।
ईआरपी सिस्टम व्यावसायिक प्रणाली के लिए सहायक है जो निर्माण, आपूर्ति चेन प्रबंधन, वित्त, परियोजनाओं, मानव संसाधन और ग्राहक संबंध प्रबंधन जैसी व्यावसायिक गतिविधियों की विविधता को एकल डाटाबेस में बनाए रखती है।
ईआरपी सिस्टम एक कॉमन डाटाबेस और मॉडयूलर सॉफ्टवेयर डिजाइन पर आधारित है। कॉमन डाटाबेस व्यवसाय से जुड़े प्रत्येक विभाग को सही समय पर सूचना के भंडारण और पुन: प्राप्त करने की अनुमति दे सकता है।
सूचना विश्वस्त और सुलभ होनी चाहिए। मॉडयूलर सॉफ्टवेयर की डिजाइन इस तरह होनी चाहिए कि विभिन्न विक्रेताओं से मॉडयूल को अपनी जरूरत के मुताबिक चुना जा सके और व्यवसाय प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए नए मॉडयूल को जोड़ा जा सके।