रियल एस्टेट सुस्त, हार्डवेयर पस्त

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 2:01 AM IST

रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा चालू परियोजनाओं को लटकाने और नई परियोजनाओं को ठेंगा दिखाए जाने से एनसीआर के हार्डवेयर उद्यमियों के होश उड़ गये है।
नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली में हार्डवेयर निर्माण से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि रियल एस्टेट के मंद हो जाने से नए ऑर्डरों का टोटा हो गया है और पिछले साल की तुलना में इनकी संख्या में 70 फीसदी तक की कमी आई है।
पिछले छह महीने के दौरान हार्डवेयर उत्पादों का कुल कारोबार भी 60 फीसदी तक प्रभावित हुआ है। मांग न होने से एक तरफ हार्डवेयर उत्पादों के निर्माण से जुड़ी कई इकाइयां बंदी की कगार पर हैं। वहीं बाजार में भी इस समय फुटकर खरीददार ही नजर आ रहे हैं।
ऐसे में कारोबारियों की बिक्री भी दो-तिहाई तक गिर गई है। चावड़ी बाजार में गोल्डन हार्डवेयर ट्रेडिंग कंपनी के राजेश सिंह बताते है, ‘पिछले साल सिंतबर तक हमारी मासिक बिक्री औसतन लगभग 10 से 12 लाख रुपये थी जो अब घटकर केवल 3 से 4 लाख रुपये ही रह गई है।’
दिल्ली के चावड़ी बाजार स्थित हार्डवेयर ट्रेडर्स एसोसिएशन के विजय भानावत का मानना है कि हार्डवेयर उत्पादों की सबसे ज्यादा मांग रियल एस्टेट कंपनियां करती है। लेकिन पिछले छह महीनों में रियल एस्टेट में छाई मंदी से हमारे कारोबार की तो हालत ही पस्त हो गई है।
कंपनियों की तरफ से नए ऑर्डर न मिलने से निर्माण इकाइयों में काम रुका हुआ सा है। वहीं रियल एस्टेट कंपनियों की तरफ से पहले का भुगतान न किये जाने से हार्डवेयर कारोबारियों की काफी बड़ी राशि भी फंसी हुई है। ऐसे में नए उत्पादों की खरीद भी कारोबारियों के लिए कठिन होती जा रही है।
गौरतलब है कि नोएडा, गजियाबाद और दिल्ली में ही हार्डवेयर उत्पादों का निर्माण करने वाली लगभग 300 से 350 छोटी इकाइयां है। इसके अलावा लगभग 4 हजार से अधिक डीलर हैं जो एनसीआर में हार्डवेयर उत्पादों की खरीद-फरोख्त करने के साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के शहरों में हार्डवेयर उत्पादों की आपूर्ति भी करते है।
गाजियाबाद स्थित हार्डवेयर प्रोडक्ट्स मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन के आर एस गुप्ता का कहना है कि मंदी के इस दौर में लखनऊ, बनारस, कानपुर और इलाहाबाद जैसे छोटे शहरों की ओर से उठने वाली मांग के कारण ही हमारे कारोबार में थोड़ी जान बची हुई है। लेकिन इन शहरों से आने वाली मांग भी 30 फीसदी तक प्रभावित हुई है।
गुप्ता का कहना है कि मांग में कमी के चलते हमने उत्पादों की कीमतों को भी 15 से 20 फीसदी कम किया है।

First Published : February 23, 2009 | 9:47 PM IST